अग्निपथ योजना – केन्द्रीय आइडियोलॉजी का देश के बहुजन-गरीब युवा को कटोरा थमाने का षड्यंत्र

अग्निपथ योजना : विभिन्न जाति सम्प्रदाय से आने वाले इन रिटायर्ड मिलेट्री ट्रेंड अग्निवीरों पर जब धार्मिक रंग चढ़ेगा, बेरोजगारी के आलम में यह भीड़तंत्र-सांप्रदायिक दंगे के हिस्सा होंगे. तब क्या राज्य पुलिस इन्हें संभाल पायेगी? देश की अखंडता को खंडित करने वाला योजना…    

रांची : देश में जब से बहुसंख्यक गरीब आबादी में ऐतिहासिक शिक्षण का प्रसार हुआ है. युवा अपने अधिकारों के प्रति गंभीर होने लगे है, तब से एक ख़ास आइडियोलॉजी के अक्स में देश में निजीकरण का दौर थोपने का प्रयास आरम्भ हुआ है. रेलवे में निजीकरण ला सरकारी नौकरी खत्म कर दी गई. UPSC में लेटरल एंट्री लाकर पद खत्म किये गए. अब सेना जैसे देश के महत्वपूर्ण आयाम में अग्निपथ योजना के तहत अस्थाई अग्निवीर को लाकर संविधान में अंकित अधिकारों के खात्मे के मद्देनज़र, देश के पढ़े लिखे बेरोज़गार यवा के भविष्य के साथ सुनियोजित खिलवाड़ की चाल चली गई है. जिससे भविष्य में देश के युवा स्वतः अपने हाथों में कटोरा प्स्कड़े खड़े दिखेंगे.

बेरोजगार मिलेट्री ट्रेंड अग्निवीरों पर धार्मिक रंग चढ़ेने पर क्या सांप्रदायिक दंगे राज्य पुलिस रोक पायेगी – देश में अग्निपथ योजना एक गंभीर सवाल 

देश के समक्ष महत्वपर्ण सवाल खड़ा हो चला है कि देश के यह अग्निवीर विभिन्न जाति सम्प्रदाय के होंगे. ऐसे में जब इन बेरोजगार रिटायर्ड मिलेट्री ट्रेंड बेरोजगार अग्निवीरों पर धार्मिक रंग चढ़ेगा और सांप्रदायिक दंगों का हिस्सा बनेंगे. तब क्या राज्य पुलिस इन्हें रोक पाने में सक्षम होंगे. अंदाजा लगाना भी देश को भयभीत करता है. ऐसे में क्या पूरे योजना को देश के अखंडता में ख़तरा नहीं माना जाना चाहिए. और पूरे स्कीम को देश की सैन्य ताकत को कमजोर करने वाला नहीं माना जाना चाहिए. और भाजपा आईटी सेल यह कहते पाए जा रहे हैं कि जो मिल रहा उससे युवाओं संतुष्ट रहना चाहिए. मसलन, तमाम परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार को तत्काल इस योजना को वापस लेते हुए देश के बेरोजगार युवाओं से माफ़ी मांगनी चाहिए. और आरएसएस चीफ मोहन भगवत को इसपर बोलना चाहिए.

अग्निवीर स्कीम देश की सैन्य ताक़त को कमजोर करने वाला, मुल्क के बेरोजगार युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाला. देश के खर्चे पर निजी कंपनियों के लिए सस्ता दास तैयार करने वाला, देश की अखंडता को खंडित करने वाला, सुनियोजित योजना है. केंद्र की मोदी सरकार के इस गलत फैसले का देशभर में कड़ा विरोध होना चाहिए. और अगर सरकार द्वरा जल्द इस गलत निर्णय वापस नहीं लिया गया तो देश के युवा का यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है, देश की शांति बहंग हो सकती है. गुस्से में बेरोगार युवाओं को रोकना भाजपा आइडियोलॉजी के लिए मिश्किल हो सकती है. मसलन, सरकार को तत्काल इस तुगुलकी फरमान को वापस लेना चाहिए.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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