आदिवासियों का शोषण और फ़र्ज़ी आरोप लगाने से भाजपा कभी नहीं चूकती, फ़र्ज़ी आदिवासी राजनीति की मुहजोर कोशिश करते हैं और हर बार विफल होते हैं….

सरकार गठन के साथ ही विश्व व्यापी महामारी ने गरीबों के जीवन में कई मुश्किलें खड़ी कर दी। एक उर्जावान मुख्यमंत्री की कुशल नेतृत्व में झारखण्ड देश का पहला राज्य बना जिसने अपने श्रमिकों और कामगारों को हवाई जहाज, ट्रेन और आवागमन के अन्य साधनों से लेकर आई।राज्य में लाभुकों को अनुदानित दर या एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 05 किलोग्राम चावल प्रति माह, प्रति लाभुक उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजनान्तर्गत आच्छादित लाभुकों को हरा राशन कार्ड उपलब्ध कराया गया, शहरों में निवास करने वाले श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक योजना शुरू की गई, जिसके तहत शत प्रतिशत रोजगार नहीं तो बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान किया गया है,नीलाम्बर पीताम्बर जल समृधि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, पोटो हो खेल योजना शुरू की गई, ताकि ग्रामीणों को प्रति दिन काम सुनिश्चित हो सके. हेमन्त सरकार यहीं नहीं रुकी, उसने मनरेगा अन्तर्गत राज्य सरकार दवारा न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाकर रूपये 225/प्रति मानव दिवस करने का निर्णय लिया, जिसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निधारित प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी दर और राज्य सरकार दवारा निर्धारित रूपये 225/- के बीच के अंतर की राशि का वहन राज्य सरकार द्वारा किया गया। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जाति/अल्पसंख्यक वर्ग, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन के युवाओं को स्वरोजगारास्वयं के व्यवसाय शुरू करने हेतु सुगम एवं सस्ते दर पर ऋण पर अनुदान का लाभ देने हेतु मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना का क्रियान्वयन कर रही है। फूलो झानो आशीर्वाद अभियान अंतर्गत करीब 23 हजार महिलाओं को हडिया-दारू निर्माण एवं बिक्री के कार्य से मुक्त कराकर आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़ा गया है। एक साड़ी रुपये 10/- प्रति धोती लुंगी एवं रूपये 10/- प्रति साड़ी की अनुदानित दर पर वितरण किया जा रहा है, हेमन्त सरकार सरकार ने राज्य के किसानों को 50,000/- रूपये तक के अल्पकालीन फसल ऋण बकाया राषि माफ करने हेतु फसल रुण माफी योजना चल रही है , हेमन्त सरकार द्वारा यह सभी जरुरतमंदों को पेंशन देने के लिए सर्वजन पेंशन योजना शुरू की गई, लगातार बढ़ते पेट्रोल के दाम से गरीबों को निजात देने के उदेश्य से हेमन्त सरकार द्वारा गरीबों को पेट्रोल पर सब्सिडी देने की पहल की गई है। गरीब के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिए हेमन्त सरकार द्वारा 80 उत्कृष्ट विद्यालय तथा 325 प्रखण्ड स्तरीय लीडर स्कूल के साथ-साथ 4091 ग्राम पंचायत स्तरीय आदर्श विद्यालय तैयार हो रहे हैं ,राज्य में कार्यरथ पारा शिक्षकों को सहायक शिक्षक के सम्मान के साथ भविष्य सुरक्षित किया गया, सरना धर्म कोड लागू किया,रैयतों को एक करोड़ तक की ठीकेदारी ,निजी क्षेत्र में 75% आरक्षण,खेल की विश्व स्तर की सुविधा मुहया करना और खेल को प्रोत्साहन देने के साथ सीधी नियुक्ति,अब जैसा हम जानते हैं कि जब जब कोई गैर भाजपा मुख्यमंत्री और वो भी अगर आदिवासी हो और जनहित के कार्य कर रहा हो जिसकी सफलता स्वयं भाजपाई देख कर रह नही पाते और फ़र्ज़ी आरोप प्रत्यारोप में अपनी फ़र्ज़ी आदिवासी राजनीति जिन्दा रखने की मुहजोर कोशिश करते हैं और हर बार विफल होते हैं


अब मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार देखिए वहां के आदिवासी भाई बहनों की कितनी हितैषी है यह इन बातों को पड़कर एक सरल व्यक्ति भी अनुमान लगा सकता है कि भाजपा कितनी आदिवासी हित की बात करती है …
आदिवासियों की पहचान मिटाने की साजिश

मध्य प्रदेश में एक बार फिर आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग कर दिया गया है। इससे वहां के आदिवासी बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। मध्य प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार ने “आदिम जाति कल्याण विभाग” का नाम बदलकर “जनजातीय कार्य विभाग” कर दिया गया है। सूबे के आदिवासी जनप्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों ने सरकार के इस कृत्य को आदिवासी समाज पर सांस्कृतिक हमला बताया है, मुख्यमंत्री के इस फैसले का जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन समेत मध्य प्रदेश के अनेक आदिवासी संगठनों ने विरोध किया था।


आदिवासियों पर सांस्कृतिक हमला आरएसएस-भाजपा का पुराना षड्यंत्र
आदिवासी शब्द दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है और इसका अर्थ मूल निवासी होता है। आरएसएस लंबे समय से एक षड्यंत्र के तहत आदिवासियों को वनवासी कहता है।देश के आदिवासी क्षेत्रों में आरएसएस द्वारा एकल स्कूल वनवासी कल्याण आश्रम एवं वनवासी नाम से अनेक संगठन चलाए जा रहे हैं। आरएसएस इन एकल स्कूलों तथा संगठनों के माध्यम से आदिवासी बच्चों का हिन्दुकरण (जय श्रीराम का नारा तथा राम की देवता के रूप में स्थापना) करता है। वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना 1952 में की गई थी। इसका मुख्यालय जमशेदपुर (झारखंड) में है।


अब चुनाव नजदीक देख फिर से पूरा भाजपाई कुनबा आदिवासयों का चुनावी फायदा उठाने की तैयारी कर रही,लेकिन अब आदिवासी समाज को भाजपा के लिए जोड़े रखना आसन नही…
मिशन 2023, पार्टी को मालूम है कि आदिवासी वर्ग के भरोसे ही सत्ता को बरकरार रखा जा सकता है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में जनजातीय गौरव दिवस 15 नवंबर के ठीक पांच महीने बाद मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के 45 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को साधने के लिए वन समितियों का सम्मेलन बुलाया गया है। शाह के जरिए फिर आदिवासियों को साधने की कोशिश की जा रही है।
2003 से 2013 तक भाजपा के साथ रहा आदिवासी वर्ग जब-जब प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक भाजपा के साथ रहा है, तब-तब भाजपा की सरकार बनी है। 2018 में आदिवसियों के मुंह मोड़ते ही कांग्रेस की सरकार बन गई थी। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीट हैं। मध्‍य प्रदेश में 2023 के चुनाव में भी निर्णायक भूमिका अदा करेगा आदिवासी वोट बैंक । पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि आदिवासी वर्ग की सबसे बड़ी हितैषी पार्टी सिर्फ भाजपा ही है।

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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