झारखण्ड : चंद सिक्कों की लालच में बड़े-छोटे भाई के रिश्ते को किया शर्मशार

झारखण्ड : कांग्रेस के तीनों विधायकों ने चंद सिक्कों की लालच मे राज्य की जनविश्वास का गला घोंटा है, बड़े भाई-छोटे भाई के रिश्ते को तार-तार किया है. ‘बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया जैसे कहावत को चरितार्थ किया है. बाप-दादा की कमाई इज्जत को मिट्टी मे मिलाया है.

रांची। झारखण्ड मे ईडी की हो रही सुनियोजित कार्रवाई के बीच झारखण्ड कांग्रेस के तीन विधायक – इरफान अंसारी (जामताड़ा), नमन विक्सल कोनगाड़ी (कोलेबिरा) और राजेश कच्छप (खीजरी) का ग्रामीण हावड़ा पुलिस द्वारा बंगाल में करोड़ों रुपयों कैस के साथ रंगे हाथों पकड़े जाने की घटना ने झारखण्ड मे कई रिश्तों को शर्मशार किया है. इन जनप्रतिनिधियों ने चंद सिक्कों की लालच मे जहां एक तरफ बाबूलाल मरांडी की भांति झारखण्ड की जनता का विश्वास का गला घोंटा है, तो वहीं एक बड़े भाई-छोटे भाई के बीच स्थापित विश्वास के डोर को भी तार-तार किया है. 

कॉंग्रेस के बेरमों विधायक अनूप सिंह का प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के साथ अरगोड़ा थाने में दर्ज कराई गई एफ़आईआर ने न केवल मामले को स्पष्ट किया है, सिक्कों की लालच को भी जनता के सामने रखा है. एफ़आईआर के अनुसार उनके पास इरफान अंसारी समेत अन्य दोनों विधायक का फोन आया था. जिसमें उनके द्वारा कहा गया था कि वह हेमन्त सोरेन की सरकार को गिरा दें और बीजेपी मे शामिल हो जाएं. इस संबंध मे उनकी असम के मुख्यमंत्री हेमन्त विश्वशर्मा से पूरी बात-चीत हो गई है. टोकन मनी लेकर सभी को गोहाटी रवाना होना है. नई सरकार मे उनकी मंत्रालय भी तय हो चुकी है. 

‘बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया’ कहावत हुआ चरितार्थ

मसलन, महाराष्ट्र के तर्ज पर हेमन्त सरकार को गिराने की पूरी पटकथा लिखी गई थी. लेकिन कहा जाता है कि ‘जांको राखे साइयाँ मार सके न कोई’, षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ और झारखण्ड मे एक बार फिर ऑपरेशन लोटस नाकाम हुआ है. कॉंग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर तीनों विधायकों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया. कहा जाता है कि अति जब अपने चरम पर पहुंचता है तो उसका विनाश निश्चित होता है. इस कथन का प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिला है. लेकिन, तमाम प्रकरण ने एक बार फिर ‘बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया’ जैसे कहावत को चरितार्थ किया है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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