त्रिकूट रोपवे हादसा : सीएम व उनकी टीम ने निभाए मानवीय उत्तरदायित्व -भाजपा ने की राजनीति

झारखण्ड : त्रिकूट रोपवे हादसा स्थल पर 48 घंटे डटे रहे जेएमएम नेता सह मंत्री. साहेबगंज से ही सीएम हर पल जानकारी लेते रहे. उसी दिन वापस लौटे राँची. रेस्क्यू के बाद उच्चस्तरीय बैठक बलाई. मृतकों को 5 लाख की आर्थिक मदद व घायलों को सरकारी खर्च पर चिकित्सकीय मदद की हुई घोषणा…

हादसा किसी सरकार में हो सकता है, लेकिन भाजपा ने सेंकी राजनीतिक रोटी. जबकि ऐसे वक़्त में पहली जरूरत मानवीय धर्म निभाने की होती है 

रांची : देवघर जिले का त्रिकुट रोपवे हादसा स्थल पर 48 घंटे डटे रहे जेएमएम नेता सह मंत्री. साहेबगंज से ही सीएम हर पल जानकारी लेते रहे. हादसा शायद देश का पहल और कभी ना भूल पाने वाला हादसा है. 48 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चला और भारतीय जवानों ने रोपवे में फंसे 48 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. राज्य के लिए अच्छी खबर हो सकती है कि एक तरफ सेना रेस्क्यू कार्य में जुटी रही, तो वहीं, स्वयं मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन व उनकी टीम (कैबिनेट मंत्री से लेकर राज्य के सभी अधिकारी) हर पल रेस्क्यू कार्य प्रगति की जानकारी लेते रहे. दुर्भाग्य से तीन लोगों को बचाया नहीं जा सका.

ऐसे दुर्भाग्य दौर में सामान्य आदमी से लेकर सरकार और राजनीतिक पार्टियों का फर्ज है कि वह आपसी मतभेद भूल मानव धर्म निभाये और पीड़ितों की मदद करे. और ऐसे घटनाओं में श्रेय लेने की होड़ से बचे. लेकिन प्रदेश भाजपा के नेता-कार्यकर्ता लगातार राजनीति करते रहे और रेस्क्यू कार्य में मानसिक बाधा पहुंचाते है. जबकि संकट के दौर में सीएम व उनकी टीम में मानवता और उत्तरदायित्व निभाया है. ज्ञात हो, मुख्यमंत्री व सरकार द्वारा हादसे के पीड़ितों हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास हुआ. 

त्रिकूट रोपवे हादसा बचाव स्थल, ग्राउंड जीरो पर लगातार डेट रहे मंत्री हफीजुल हसन 

हेमन्त सरकार मंत्री सह जेएमएम नेता जगरनाथ महतो और हफीजुल हसन को त्रिकूट रोपवे हादसा की जानकारी मिलते ही घटना स्थल के लिए रवाना हो गये थे. मंत्री हाफिजुल हसन लगातार ग्राउंड जीरो पर बने रहे और बचाव कार्य का मुआयना करते रहे. वह हर वक्त देवघर डीसी के संपर्क रहे और रेस्क्यू कार्य की जानकारी लेते रहे और अड़चनें को दूर करते रहे. रेस्क्यू अभियान समाप्त होने के उपरान्त पीड़ितों से मिलने विधायक प्रदीप यादव के साथ अस्पताल पहुंचे. मृतको के परिजनों से मिल उन्हें ढाढस बंधाया. 

सीएम साहेबगंज दौरे पर थे, वह वहीं से हर पल रेस्क्यू कार्य प्रगति की जानकारी लेते रहे

सीएम साहेबगंज दौरे पर थे. वहां से ही उन्होंने उत्तरदायित्व निभा मानवता व संवेदनशीलता का परिचय दिया. वह जेएमएम सांसद विजय हांसदा के साथ देवघर डीसी से पल-पल जानकारी लेते रहे. और सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री व उनकी टीम राज्यवासियों से जानकारी साझा करते रहे. सीएम ने अपनी जान जोखिम में डाल कर रेस्क्यू कार्य करने वाले एयरफोर्स, आर्मी, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवानों तथा प्रशासन का आभार व्यक्त किया. 

https://twitter.com/HemantSorenJMM/status/1513805336284581892?s=20&t=dL5jBKC04lF62vlEFrtx4A

उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच करा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की घोषणा की. और उसी दिन वह साहेबगंज से वापस राँची लौट आये. रेस्क्यू कार्य समाप्त होने के बाद सीएम ने तत्काल आला अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक बैठक बुलाई. हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये आर्थिक सहायता और घायलों को सरकारी खर्च पर चिकित्सकीय सहायता देने का फैसला लिया. साथ ही घटना के दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया. 

भाजपा नेता-कार्यकर्ताओं ने सेंकी राजनीति रोटी, निशिकांत ऐसे वक्त में भी जिला प्रशासन पर निकालते रहे भड़ास -देते रहे उन्हें मानसिक प्रताड़ना

राज्य में विडम्बना रही की ऐसे भयावह दौर में, भाजपा नेताओं ने मानवीय धर्म निभाने के बजाय राजनीति को तरजीह दिया. ज्ञात हो, ऐसे घटनाएं तो आकस्मिक होती है. इस पर किसी का अख्तियार नहीं होता. लेकिन, भाजपा नेता-कार्यकर्ता इस सच्चाई से आँखें चुरा दिन भर त्रिकूट रोपवे हादसा को विफलता से जोड़ सरकार पर आरोप लगाते रहे. दीपक प्रकाश सरीके नेता तक ने भी ऐसी ही मानसिकता का परिचय दिया.

दीपक प्रकाश को यह कौन समझाए, कि हादसे किसी भी सरकार में हो सकता है. हादसा क्यों और कैसे हुआ यह जांच का विषय हो सकता है. ऐसे में संसद हमला, कारगिल युद्ध जैसी घटना भाजपा सत्ता में हुई थी और भाजपा को उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का झूठा बयान देना झारखण्ड के लिए शर्मनाक है. सोशल मीडिया गवाह है कि जेएमएम के दो शीर्ष नेता रात भर घटना स्थल पर डेट रहे. जबकि उनके पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे संकट के वक्त में, राहत कार्य के दौरान जिला प्रशासन को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते रहे. …आखिरी सच तो यही है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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