किसानी व कृषि उत्पादन बढ़ावा में झारखण्ड वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ रही है 

लाह खेती में सरकार वैज्ञानिक प्रोत्साहन से 73 हज़ार किसान सशक्त हुए है. अधिकाँश संख्या महिला कृषकों की है. उपज व आमदनी बढ़ी है. राज्य में 460 कलेक्शन यूनिट व 25 ग्रामीण सेवा केंद्र से सामूहिक बिक्री को मिला है बढ़ावा.

कृषि क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे राज्य के 100 गांव. 58 लाख बिरसा किसानों को समृद्ध करने की दिशा में बढ़े सरकार के कदम. कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन में सहयोग हेतु कृषि विभाग का प्रदान संस्था से हुआ समझौता.

कृषि उत्पादन व किसानों के मजबूतीकरण में कई वैज्ञानिक तकनीक के मदद से हुई है हेमन्त सरकार में कई बड़ी पहल 

रांची : झारखण्ड कृषि विरासत का सच लिए ऐसा राज्य है जहाँ पूर्व की सरकारों में समृद्धि के वाहक मेहनती किसान की अनदेखी हुई है. लेकिन मौजूदा हेमन्त सरकार में किसानी की सुदृढ़ प्राथमिकता में रही है और कृषि उत्पादन के मजबूतीकरण में, वैज्ञानिक तकनीक से कई बड़ी पहल हुई है. जिससे न केवल किसान, उपज में बढ़ौतरी हुई है, उत्पाद के उचित मूल्य मिल रहे हैं. 

एक तरफ लाह की खेती में सरकार की वैज्ञानिकरण प्रोत्साहन से 73 हज़ार किसान सशक्त हुए हैं. जिसमे अधिकाँश संख्या महिला कृषकों की है. उपज में गुनाताम्क वृद्धि हुई है. तो वहीँ राज्य में 460 कलेक्शन यूनिट और 25 ग्रामीण सेवा केंद्र से सामूहिक बिक्री को  बढ़ावा मिला है. जिससे कृषकों की आमदनी बड़ी है . वाही दूसरी तरफ कृषि क्लस्टर के रूप में राज्य के 100 गांव विकसित होंगे. 58 लाख बिरसा किसानों को समृद्ध करने हेतु, कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन में सहयोग हेतु कृषि विभाग का प्रदान संस्था से समझौता हुआ है.

वनोपज से जुड़े को लोगों व उसके बाजार की समृद्धि के प्रति मुख्यमंत्री संजीदा

झारखण्ड में वनोपज से जुड़े लोगो व उसपर आधारित बाजार की समृद्धि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेत्रित्व में सरकार के प्रयास संजीदा दिखती है. तमाम प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं. वनोपज के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कारगर बनाने हेतु महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए लाह की खेती को बढ़ावा दिया गया है. जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर उसके आमदनी बढ़ोतरी के प्रयास हुए हैं. 

सरकार के कदम से लाह खेती से जुडी महिलाएं ना सिर्फ गाँव में रहकर अच्छी आमदनी कर रहीं हैं, लाह उत्पादन के बढ़ते आंकड़ों के वाहक बनी है. ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी सखी मंडल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को लाह खेती की अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण के जरिए उसके आमदनी को बढ़ाया है. नतीजतन, राज्य की 73000 से ज्यादा ग्रामीण परिवार लाह की आधुनिक वैज्ञानिक खेती से जुड़े है, जिनमें ज्यादातर परिवार अति गरीब एवं वनों के आस-पास के बासिन्दे हैं. इस साल 2000 मीट्रिक टन छिला लाह का उत्पादन हुआ है.

किसानों को मिल रहा है प्रशिक्षण एवं बाज़ार

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के अंतर्गत महिला किसानों को लाह उत्पादन और बिक्री के लिए तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण से लेकर बिक्री हेतु बाज़ार भी उपलब्ध कराया जा रहा है. किसान उत्पादक समूहों के माध्यम से लाह की सामूहिक खेती एवं बिक्री की व्यवस्था की गई है. आवासीय प्रशिक्षण व लाह खेती कर रहे किसानों के अनुभवों से किसानों को अवगत कराया जाता है. उचित बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए राज्य भर में 460 संग्रहण केंद्र और 25 ग्रामीण सेवा केंद्र का परिचालन किया जा रहा है. संचालित संस्थाओं के माध्यम से लाह उपज को एक जगह इकठ्ठा करते हैं और ग्रामीण सेवा केंद्र के माध्यम से उत्पाद की बिक्री होती है.

मसलन, वैज्ञानिक तकनीक व प्रशिक्षण के माध्यम से हो रही  लाह की खेती से राज्य के सुदूर इलाकों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ रहा है. राज्य के करीब 73 हजार लोगों को लाह की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देकर उनको लाह उत्पादन से जोड़ा गया है. जिसमे महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना अहम् भूमिका से राज्य में लाह खेती को पुनर्जीवित किया गया है. वहीं ग्रामीण सेवा केंद्र एवं संग्रहण केंद्र के माध्यम से किसानों को लाह का बेहतर बाजार एवं कीमत सुनिश्चित किया जा रहा है।“

कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन को त्रुटिरहित, क्लोज मॉनिटरिंग के लिए प्रदान नामक संस्था से एमओयू

राज्य में कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन को त्रुटिरहित बनाने के लिए, क्लोज मॉनिटरिंग के लिए, प्रदान नामक संस्था के साथ विभाग ने एमओयू किया है. इसका उदेश्य राज्य के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना हैं. कृषि क्षेत्र में मिसिंग ऐप को पूरी तरह से धरातल पर उतारने के लिए रिसोर्स पर्सन का सहयोग लेने के लिए प्रदान के साथ एमओयू हुआ है. प्रदान संस्था कृषि के क्षेत्र में अपनी निशुल्क सेवाएं कृषि विभाग को देगा और सरकार पर किसी भी प्रकार के राजस्व का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

प्रदान संस्था योजनाओं को सफलीभूत बनाने के लिए क्षेत्र के मौसम के अनुसार योजनाएं तैयार कर विभाग को सुझाव देगा. अन्य राज्यों में कृषि पद्धति का आकलन कर महत्वपूर्ण सुझाव भी देगा. कृषि क्लस्टर के रूप में राज्य में 100 गांव को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा. प्रदान संस्था मुख्य रूप से एफपीओ को क्रियान्वित करेगा, कृषि उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराएगा एवं कृषि से जुड़े जागरूकता अभियान में भूमिका निभाएगा.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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