झारखण्ड : ‘जैविक खेती’ में गुरूजी की सोच को दिया गया है अभियान का रूप, गोबर खरीदने के साथ खोले जाएंगे ऑर्गेनिक खेती के आउट लेट्स

झारखण्ड : जैविक खेती के फायदे से भलीभांति परिचित हैं मुख्यमंत्री, यह सोच उन्हें अपने पिता गुरुजी शिबू सोरेन से मिली है. सीएम की इस पहल से कृषकों के साथ पशुपालन, भूमि, जल-स्तर सहित बाजार को मिलेगा फायदा.

राँची : ग्रामीण कृषि आधारित अर्थव्यवस्था झारखण्ड का मुख्य आधार है. जो पूर्व की सरकारी नीतियों के अक्स में आज अनेक समस्याओं से ग्रसित है. अनदेखी व असम्वेदंशीलता में अधिक उत्पादन के लिये प्रदेश की कृषि में अत्यधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरको एवं कीटनाशक का उपयोग किया जाता रहा है. नतीजतन भूमि की उत्पादकता कम हुई है. ज्ञात हो, दिसुम गुरु शिबू सोरेन इस सत्य नजदीक से समझते थे. यही कारण रही कि  वह जैविक खेती को हमेशा बढ़ावा देने के पक्षधर रहे. 

लेकिन, पूर्व की सरकारों में, विशेष कर भाजपा सरकारों में इस मामले में न के बराबर ध्यान दिया गया. और झारखण्ड में कृषि अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंची जिससे राज्य ने पलायन को झेला. लेकिन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा दिसुम गुरु शिबू सोरेन की ज़मीनी सोच जैविक खेती, को झारखण्ड के कृषि अर्थव्यवस्था को टिकाऊ व ठोस बनाने के लिए एक अभियान के रूप में बढ़ाया जा रहा है. इसके लिए प्रदेश में पहली बार गोबर खरीदने की पहल हुई है और ऑर्गेनिक खेती के लिए आउटलेट्स खोलने का निर्णय लिया गया है. 

सरकार पशुपालकों से गाय-भैंस जैसे पशुओं का गोबर खऱीदेगी और इसमें सब्सिडी भी देगी

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष 2022 के बजट में किसानों से गोबर खरीदने का फैसला किया है. इसके तहत सरकार राज्य के पशुपालकों से गाय का गोबर खऱीदेगी और इसमें सब्सिडी भी देगी. गोबर खरीद योजना से जैविक खेती अभियान को राज्य में बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि इसके बाद राज्य के किसान अधिक जागरूक होंगे. कृषि विभाग की मानें, तो सरकार की योजना है किसानों द्वारा खरीदे गए गोबर से बॉयोगैस और वर्मी कंपोस्ट बनाया जाएगा. इसका फायदा यह होगा कि किसानों को वर्मी कंपोस्ट आसानी से मिल जाएगा. जैविक खाद आसानी से मिलने पर किसान जैविक खेती भी आसानी से कर पाएंगे.

सभी जिलों में ऑर्गेनिक आउटलेट्स खोलने का फैसला, ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन के लिये लैब की भी होगी स्थापना

झारखण्ड में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिये मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि विभाग ने राज्य के सभी जिलों में ऑर्गेनिक आउटलेट्स खोलने का फैसला किया है. इसके साथ ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन के लिये लैब की भी स्थापना की जायेगी. राजधानी के कृषि भवन में राज्य का पहला जैविक उत्पाद विपणन केंद्र खोला गया है. किसानों के जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार मिल पाए, इस दिशा में जैविक उत्पाद विपणन केंद्र मील का पत्थर साबित होगा. कृषि मंत्री के मुताबिक सरकार का प्रयास होगा कि राज्य के सभी जिलों में इसकी शाखाएं की स्थापना हो. इससे किसानों को जैविक उत्पादन का उचित मूल्य मिल पाएगा और उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकेगी. 

खेती-बागवानी में जैविक खाद के प्रयोग की वकालत करते रहे हैं गुरूजी

गुरुजी खेती-बागवानी में जैविक खाद के प्रयोग की भी वकालत करते रहे हैं. वे स्वंय इसे शत-प्रतिशत सुनिश्चित करते हैं. अपने सरकारी बंगले में शिबू सोरेन खेती-बागवानी की देखरेख स्वयं करते हैं. हालांकि अभी वे कुछ अस्वस्थ्य है. इसके कारण इस काम के लिए उन्होंने कुछ सहयोगी को ऱका है. गुरुजी हमेशा कहते है कि रासायनिक खाद का उपयोग कृषि उत्पादों के लिए नहीं किया जाना चाहिए. उनकी सोच है कि धरती हमें सब कुछ देती है तो हमें भी इसका ख्याल रखना चाहिए. धरती माता के समान है. ज्यादा खाद का इस्तेमाल इसे मार रहा है. यह बीमारियों का भी जड़ है. यह धरती का गला घोटने जैसा है. 

सीएम की इस पहल से कृषकों के साथ पशुपालन, भूमि, जल-स्तर सहित बाजार में मिलेगा फायदा

सीएम हेमन्त सोरेन की यह सोच झारखण्ड में कृषि ठोस आधार देगा. अगर किसानों से गोबर की खरीद योजना अफसरशाही के चक्कर में न फंसे, तो इसका सबसे पहला फायदा पशुपालन के क्षेत्र में होगा. वैसे किसान जो कृषि कार्यों के लिए गाय या बैल का इस्तेमाल नहीं करते थे, वे पशुपालन पर ध्यान देंगे. ऐसा वे गोबर का दाम मिलने के आस में कर्नेगे. किसानों की इससे कमाई बढ़ेगी. दूध के साथ-साथ किसानों को गोबर के भी दाम मिलेंगे.

वहीं, जैविक खेती अपनाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होगी. जहर रहित फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी. पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभ होगा. भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी, रासायनिक खाद युक्त मिट्टी से होने वाले प्रदूषण मे कमी आएगी. साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में झारखण्ड की कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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