झारखण्ड : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (मॉडल स्कूल) रखेगा झारखंडी बच्चों में आधुनिक भविष्य का नीव

मुख्यमंत्री ने कहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (मॉडल स्कूल), झारखण्ड जैसे आदिवासी बाहुल्य राज्य में साबित होगा आधुनिक शिक्षा केंद्र. यह केंद्र राज्य के बच्चों में रखेगा आधुनिक व गुणवत्तायुक्त शिक्षा का नीव.

राँची : झारखण्ड जैसे गरीब आदिवासी बाहुल्य राज्य के 21 वर्षों के इतिहास में, भाजपा शासन द्वारा साजिशन शिक्षा व्यवस्था को रसातल में पहुंचा गया. ज्ञात हो, पूर्व की रघुवर सरकार में मर्जिंग के नाम पर भारी संख्या में स्कूलों को बंद किया गया. नतीजतन, शिक्षा व्यवस्था चुनाव में मुख्य मुद्दों में एक रहा था. बहरहाल, हेमन्त सरकार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में, मॉडल स्कूल (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में बड़े बदलाव के फैसले लिए गए है. जिससे राज्य में सरकारी विद्यालयों को आधुनिक व उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र के रूप में अलग पहचान मिलने जा रहा है. 

मॉडल स्कूल में बच्चों की गुणवत्ता युक्त पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास हेतु सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होगी. इन विद्यालयों में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के साथ गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से संबंधित सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी. विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का संकल्प सरकार द्वारा लिया गया है. मॉडल स्कूल (स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव उच्च विद्यालय, जगन्नाथपुर, धुर्वा के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन शब्दों में यह आशय स्पष्ट दिखा. उन्होंने कहा कि यह सरकारी विद्यालय हर तरह से निजी विद्यालयों के समकक्ष नजर आएंगे. 

बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव रखी जाएगी, पढ़ाई की सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी उपलब्ध

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सिर्फ विद्यालय नहीं होगा. झारखण्ड के आदिवासी-मूलवासी समेत सभी वर्गों के बच्चों में बेहतर भविष्य का नींव रखेगा. क्योंकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षा की सारी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, विशेषज्ञ-शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे. लैबोरेट्रीज, लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब की व्यवस्था होगी. इसी मंशा के साथ सरकार द्वारा पूरे राज्य में कई सरकारी विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में बदलने का निर्णय लिया गया है. इसके के लिए 405 विद्यालय चयनित किए गए हैं. पहले चरण में 80 विद्यालयों के कायाकल्प का काम शुरू हुआ है. 

निर्माण कार्य में क्वालिटी से समझौता नहीं मुख्यमंत्री ने दिए ये निर्देश

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के भवन निर्माण में मैटेरियल्स की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर घटिया निर्माण की शिकायत मिलती है तो संबंधित पदाधिकारी एवं अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने दिए गए निर्देश…

  •  मॉडल स्कूल में मल्टीपरपस हॉल की व्यवस्था हो, ताकि यहां बच्चों की सभी एक्टिविटी को बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सके.
  •  पुराने भवन और बन रहे भवन को एक परिसर में लाया जाय और दोनों भवनों में आने-जाने के लिए कॉरिडोर हो.
  • विद्यालय भवन परिसर में जल संरक्षण को लेकर वाटर हार्वेस्टिंग की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.
  • विद्यालय परिसर की चहारदीवारी हो, ताकि उसका अतिक्रमण नहीं किया जा सके.
  • यहां इनडोर और आउटडोर खेलों के लिए समुचित व्यवस्था हो.
  • विद्यालय परिसर में चहारदीवारी के चारों ओर पेड़-पौधे लगाए जाएं.
संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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