BJP सांसद को पहले अपने क्षेत्र मणिपुर की चिंता करनी चाहिए, वहां ड्राप आउट की दर सर्वाधिक

BJP सांसद को पहले अपने क्षेत्र मणिपुर की चिंता करनी चाहिए, वहां ड्राप आउट की दर सर्वाधिक

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री भाजपा शासित राज्य मणिपुर से सांसद हैं. ड्राप आउट दर झारखण्ड में 6.4%, जबकि मणिपुर में 8.6%. हाई स्कूल ड्रॉप आउट मामले में 18 राज्यों से झारखण्ड बेहतर. ऐसे में सांसद महोदय को पहले मणिपुर की चिंता करनी चाहिए. हेमन्त सरकार तो इसपर उठा चुकी है कदम.

प्रदेश भाजपा केंद्रीय भाजपा को हेमन्त सरकार की उपलब्धियां बताने में शर्माते हैं. शायद केंद्र को नहीं बताया गया है कि राज्य में ड्राप आउट समस्या पर उठाये गए हैं कईं जरुरी कदम 

राँची : झारखण्ड में पंचायत राज चुनाव क मद्देनज़र आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है. लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता लगातार झारखण्ड दौरे पर हैं और योजनाओं की समीक्षा करने से नहीं चुक हैं. ऐसा कर वह एक तरफ आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार के कार्यशैली पर बेतुके सवाल उठा कर जनता को गुमराह करने का प्रयास करते देखे जा रहे हैं. ज्ञात हो, भाजपा नेता सह केंद्रीय शिक्षा एंव विदेश राज्यमंत्री डॉ राजुकमार रंजन सिंह द्वारा भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा गया कि झारखण्ड में बच्चों की ड्राप आउट की समस्या चिंताजनक है. रांची डीसी के साथ हुई बैठक में उनके द्वारा इसपर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई.

भाजपा की यह शोध तो नई नहीं. ज्ञात हो, इस मुद्दे मुख्यमंत्री द्वारा चिंता भी जताई गई है और ज़रुरी कदम भी उठाये गए हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि झारखण्ड भाजपा के पास ज़मीनी मुद्दों की घोर कमी है. और भाजपा सांसद द्वारा रिपोर्ट माँगा जाना प्रायोजित है. पंचायत चुनाव को प्रभावित करने की कुटिल चाल भर हो सकती है. जबकि कायदे से उन्हें इस मुद्दे पर पहले अपने क्षेत्र मणिपुर की चिंता करनी चाहिए. क्योंकि मणिपुर में ड्राप आउट दर झारखण्ड की तुलना में ज्यादा है. और हेमन्त सोरेन सरकार में बेहतर शिक्षा व ड्राप आउट की समस्या की सताए समाधान में कई कदम उठाये जा रहे हैं. जो झारखण्ड भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को बताने से डरती हैं

प्राथमिक शिक्षा में झारखण्ड मणिपुर से बेहतर, हाई स्कूल मामले में तो 18 राज्यों से बेहतर

मार्च 2022, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एकीकृत जिला सूचना प्रणाली रिपोर्ट (UDISE+) रिपोर्ट 2020-21 में बताया गया है कि प्राथमिक स्तर पर ड्राप आउट मामले में उत्तर पूर्व के तीन राज्यों यथा मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में दर सबसे अधिक है. प्राथमिक स्तर पर 8.6% के साथ मणिपुर में स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है. अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में स्कूल छोड़ने की दर क्रमशः 8.3%शत और 8.1% है.

मेघालय और नागालैंड में भी प्राथमिक स्तर पर क्रमशः 7.4% और 5.9% की उच्च ड्रॉपआउट दर है. वहीं, प्राथमिक स्तर पर ड्राप आउट मामले में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक झारखण्ड में यह दर 6.4% है. वहीं, हाई स्कूल में ड्रॉप आउट मामले में झारखण्ड की स्थिति 18 राज्यों से बेहतर है. लेकिन, भाजपा के लिए तो दिया तले अँधेरा है. गैर भाजपा शासित राज्यों को बदनाम करने के क्रम में उन्हें स्वशासित राज्यों में कमियां क्यों नहीं दिखती? जबकि की झारखण्ड में शिक्षण समस्या भाजपा सरकार की ही देन है. जो देश के लिए एक गंभीर सवाल हो सकता है?

शिक्षा मामले में भाजपा शासित उत्तर पूर्व राज्यों की स्थिति झारखण्ड से खराब. और विडम्बना है की सवाल उठाने वाले केंद्रीय मंत्री उत्तर-पूर्व मणिपुर से ही आते हैं

उत्तर पूर्व राज्य से आने वाले केंद्रीय शिक्षा एंव विदेश राज्यमंत्री डॉ राजुकमार रंजन सिंह को ड्राप आउट मामले में पहले अपने क्षेत्र की गंभीर स्थिति को गंभीरता से देखना चाहिए. ज्ञात हो मणिपुर में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पांच साल सत्ता में रही. राज्य की जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत दिया. वहीं, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड जैसे राज्यों में भी भाजपा की ही सत्ता में है. बावजूद इसके इन राज्यों में ड्राप आउट दर देश भर में सर्वाधिक है. जबकि, झारखण्ड में यह दर उपरोक्त भाजपा शासित राज्यों से काफी कम है. और मुख्य़मंत्री के नेतृत्व में सरकार ड्राप आउट की दर कम करने को लेकर प्रत्यनशील है. 

ज्ञात हो, ड्राप आउट की दर कम करने को लेकर हेमन्त सरकार में सेतु गाइड विशेष शिक्षण अभियान चलया जा रहा है. सेतु गाइड के रूप में चयनित छात्रों-बच्चों को पढ़ाया जा रहा हैं. शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, उनके बीच शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने तथा उनका नामांकन सुनिश्चित कराने के लिए वालेंटियर को जिम्मेवारी दी गयी है. पारा शिक्षकों को सहायक अध्यापक का दर्जा देकर उनकी सेवा 60 वर्ष तक के लिए सुनिश्चित की गयी है. श‍िक्षकों की बड़े पैमाने पर बहाली की तैयारी हो रही है. 

झारखण्ड में एक माह का स्कूल रूआर-2022 (बैक टू स्कूल) अभियान चलाया जा रहा है

कोरोना महामारी में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहे हैं. बच्चे ड्राप आउट न हों, इस दिशा में राज्य सरकार में गंभीर चिंतन-मनन हुआ है. और सरकार द्वारा 5 अप्रैल 2022 से एक माह का स्कूल रूआर-2022 (बैक टू स्कूल) विशेष अभियान चलाया जा रहा है. मुख्य सचिव द्वारा इसे सम्बन्ध में सभी उपायुक्तों को पत्र भेजा जा चूका हिया. जिसमे अभियान को सफल संचालन के स्पष्ट निर्देश दिया गया है. उम्मीद जताई जा सकती है कि भविष्य में अभियान का बेहतर रिजल्ट सामने आएगा जिससे राज्य के बच्चों में शिक्षा के प्रति रुझान बढेगा और राज्य में ड्राप आउट की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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