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झारखण्ड महिला सशक्तिकरण : दरिंदे फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट से पा रहे सजा – बेटियों को मिल रहा है न्याय

April 16, 2022 by najhma Leave a Comment

दोषियों को स्पीडी ट्रायल से न्यायालय द्वारा सुनायी जा रही है सजा. झारखण्ड की बेटियां जीने लगी है लोकतंत्र को. झारखण्ड महिला सशक्तिकरण के मद्देनज़र दोषियों को 20-20 साल की सजा राहत देने वाली खबर…

राँची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड महिला सशक्तिकरण की पोड़ियाँ मजबूती से चढ़ रहा है. ज्ञात हो, महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर राज्य में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनायें धरातल पर सफलता पूर्वक उतारे जा रहे हैं. एक तरफ शिक्षा, खेल, कृषि, व्यवसाय, स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में महिलाओं आगे लाया जा रहा है तो दूसरी तरफ महिला सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में झारखण्ड पुलिस व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण-आधुनिकीकरण व थानों में महिला हेल्प डेस्क गठित करने जैसे निर्णय पर प्रमुखता से जोर दिया गया है. साथ ही महिला दुष्कर्म जैसे मामलों में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से गुनेहगारों को सजा मिल रही है.

ज्ञात हो, यह परम्परा पूर्व की सरकारों में झारखण्ड में कभी नहीं दिखी. बल्कि बेटी को न्याय की जगह उसके पिता को स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा अपमानित होना पड़ा है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास तथ्य के स्पष्ट उदाहरण हो सकते हैं. महिला पीड़ितों के नाम पर पुलिस व्यवस्था सुदृढ़ीककरण पर करोड़ों खर्च तो हुए, लेकिन नतीजा ढहक के तीन पात ही रहा. मौजूदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में पहला मौका है जब झारखण्ड में न केवल पुलिस व्यवस्था सुदृढ़ीकारन के दिशा में कई ठोस निर्णय लिये गये हैं. गैंग रेप के दोषियों को स्पीडी ट्रायल में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी जा रही है. निश्चित रूप से यह लोकतंत्र में राहत देने वाली खबर हो सकती है.

मई 2019 नाबालिग गैंग रेप का मामला

ज्ञात हो, मई 2019 नाबालिग गैंग रेप का मामला दर्ज हुआ था. नाबालिग एक मई 2019 को अपने दोस्त के साथ एक शादी से रामगढ़ से लौट रही थी. शालीमार मार्केट के पास रात 11:30 बजे उसकी स्कूटी की चाबी खो गयी थी. दोनों चाबी ढूंढ रहे थे. उसी समय तीनों अभियुक्त आये और पीडिता के पुरुष दोस्त को मारपीट कर भगा दिया. फिर नाबालिग के साथ उन सभी ने मौसीबाड़ी में दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी पुलिस या किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दी. 2 मई 2019 को नाबालिग ने धुर्वा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी. धुर्वा पुलिस ने तीनों दरिंदों को गिरफ्तार किया था.

रांची पोक्सो के विशेष न्यायाधीश ने सुनायी दोषियों को 20-20 साल की सजा 

रांची पोक्सो के विशेष न्यायाधीश आसिफ इकबाल की अदालत ने बुधवार को कांके की रहने वाली नाबालिग लड़की से धुर्वा में गैंग रेप के तीन दोषी शंकर महतो, सुनील आइंद व आनंद कुमार साव को 20-20 साल की सजा सुनायी है. वहीं 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर दोषियों को छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. मामला एक मई 2019 का है. धुर्वा थाना में नाबालिग के बयान पर अज्ञात के खिलाफ दो मई 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. तीनों को धुर्वा पुलिस ने गिरफ्तार किया था. मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोहन रजक ने 10 गवाह पेश किये.

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हेमन्त सोरेन देश के ऐसे सीएम जो बढ़ती महंगाई के कुप्रभाव को ‘भ्रूण हत्या’-‘बाल विवाह’ जैसे अपराध के बढ़ावे के रूप में देखते हैं

April 6, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : सीएम सोरेन ने सदन में स्पष्ट कहा – देश में महंगाई को संतुलित नहीं किया गया तो ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान बेमायने हो जायेंगे. कुपोषण का प्रसार होगा, कुपोषण मुक्ति के प्रयास विफल होगे. आर्थिक अभाव में बेटियों का गला घोंटा जायेगा. ‘भ्रूण हत्या’-‘बाल विवाह’ जैसे अपराध को बढावा मिलेगा

भाजपा की गलत नीतियों से बढ़ी बेहतहाशा महंगाई ने मध्यम वर्ग का तोड़ा कमर, राज्य सरकारों के राहत पहुँचाने का हर प्रयास विफल

राँची : देश में बेतहाशा बढती महंगाई से गरीब-मध्यम वर्ग बुरी तरह प्रभावित है. उसके सारे गुना-गणित, जोड़-घटाव की कमर टूट गई है. भयावह परिस्थिति से प्रतीत होता है कि भाजपा की केन्द्रीय मोदी सरकार महंगाई नियंत्रण में विफल है. बढ़ती महंगाई का मुख्य कारक पेट्रोलियम पदार्थों -जैसे पेट्रोल-डीजल के दामों में बेलाग वृद्धि व आवश्यक वस्तुओं की मांग-आपूर्ति में अंतर को समझा जा रहा है. चूँकि महंगाई का जनक सरकार की ही नीतियां ही रही है. नतीजतन, बेलगाम महंगाई के विरोध में विपक्ष समेत आम जनता सड़कों पर उतरने को विवश है.

केंद्र सरकार को चाहिए कि महंगाई रोकने हेतु तत्काल सख्त कदम उठाएं. अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो देश के समक्ष अपराधिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं. केन्द्रीय सरकार और भाजपा शाषित राज्य भले इसके दुष्परिणाम से अभिज्ञ हो या जान बुझ कर आंखे मूँद रखी हो, लेकिन गैर भाजपा शासित राज्य आने वाली समस्याओं से डर रहे हैं. ज्ञात हो, बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पहली बार महंगाई से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर स्पष्ट बोले. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा जनता को राहत दी जा रही है लेकिन बेतहाशा बढती महंगाई में सभी प्रयास विफल साबित हो रहे हैं.

बढती महंगाई के कारण आने वाके दिनों में भ्रूण हत्या, बाल विवाह जैसे अपराध बढ़ेंगे. कुपोषण मुक्ति के सभी प्रयास विफल साबित होंगे – मुख्यमंत्री  

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बढती महंगाई के कारण कई समस्याएं खड़ी होंगी. भ्रूण हत्या, बाल विवाह से जंग समाज हार जाएगा. राज्य सरकारों के समक्ष बढ़ते अपराध चुनौतियाँ पेश करेंगे. राज्य-देश को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ेगा. महंगाई बढ़ने के कारण कुव्यवस्थाएं बढ़ेंगी. आजादी के बाद से अबतक हम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की लड़ाई लड़ ही रहे हैं. पर महंगाई के कारण सब खत्म हो जाएगा. बेटियों को और अधिक बोझ समझा जाएगा. आर्थिक अभाव में उन्हें कोई नहीं पढ़ाएगा. भाजपा के ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान समाप्त हो जाएंगे. बढ़ती महंगाई की चपेट में सबसे पहले आदिवासी, दलित, पिछड़े व सभी गरीब वर्ग आएंगे. 

कोरोना त्रासदी में भी केन्द्रीय सत्ता ने मध्यम वर्ग, किसान, गरीबों को भगवान भरोसे छोड़ा

सीएम पहले कई बार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार की नीतियों से महंगाई में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. कोरोना संक्रमण काल में तो कई बार देखने को मिला कि मध्यमवर्गीय परिवार, मजदूर, किसान, गरीब को केंद्र ने भगवान भरोसे छोड़ दिया था. जबकि झारखण्ड सरकार ने राज्यवासियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला. महंगाई की वजह पेट्रोलियम पदार्थों की कीमटन में वृद्धि है. इससे कमाई किसकी हो रही है, किसी से छुपा नहीं है. राज्य सरकार को तो जीएसटी का पैसा भी नहीं मिल रहा है. सीएम ने कहा कि हम अपनी तरफ से प्रयास तो कर रहे हैं लेकिन अगर देश डूबा तो पता नहीं हमारे प्रयासों का क्या होगा.

सभी को राहत दिलाने के लिए हेमन्त सरकार बना रही कार्ययोजनाएं, धरातल पर दिख रहा लाभ 

मध्यम और कमजोर वर्ग को महंगाई की ज्यादा मार न झेलना पड़ें, इसके लिए हेमन्त सरकार में कई पहल हुई है. सीएम ने कहा है कि सभी वर्ग के जनता को राहत देने हेतु कार्ययोजनायें बनायी जा रही हैं. इसी कार्ययोजना का हिस्सा है, जहाँ राज्य के गरीब वर्ग को दुपहिया वाहनों के पेट्रोल पर 25 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी दिया जा रहा है. मनरेगा योजना में मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने का फैसला सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से ही किया है. झारखंड के गरीब मजदूरों को 198 रुपये की बजाय 225 रुपये का मेहनताना मिला है. मनरेगा मज़दूरों की मजदूरी का यह नई दर 1 अप्रैल 2021 से ही लागू हो गयी है. अति गरीब को मात्र 10 रुपए में धोती-साडी दी जा रही है.

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JMM विधायकों की कार्यशैली देते हैं संकेत – आंगनबाड़ी सेविका व पोषण सखी के कल्याण हेतु सरकार गंभीर

March 14, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : JMM विधायक सुदिव्य कुमार, दीपक बिरूआ, जोबा मांझी, जगरनाथ महतो समेत तमाम विधायकों ने नेतृत्व से मांग की है कि पारा शिक्षकों की तरह आंगनबाड़ी सेविका व पोषण सखी की समस्याओं का  हो समाधान. जल्द धरातल पर दिखेगी नियमावल. सभी जिलों में पोषण सखी की नियुक्ति पर हो रहा विचार…

कोरोना संकट काल में सीएम हेमन्त सोरेन ने राज्य की महिला शक्ति पर जताया भरोसा – आंगनबाड़ी सेविकाओं समेत तामाम महिलाओं ने दिखाया माँ अन्नपूर्ण का रूप 

रांची : झारखण्ड विधानसभा बजट सत्र में जेएमएम विधायकों द्वारा महिला सशक्तिकरण जैसे मानवीय मुद्दे को मजबूती से उठाया गया है. सदन में आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय और उनके कल्याण का मुद्दा सत्तारूढ़ जेएमएम विधायकों द्वारा जोर-शोर से उठाया गया. तमाम पहलू साफ़ संकेत देते हैं कि सीएम हेमन्त सोरेन की पूरी टीम राज्य के इस महिला समस्या का स्थाई हल निकालने को लेकर बेहद गंभीर है. ज्ञात हो, पूर्व की सरकारों ने आंगनबाड़ी बहनों को केवल छला है. और महिला सशक्तिकरण के रूप में जब इन बहनों की मजबूत अभिव्यक्ति उभरी तो पूर्व की भाजपा सरकार ने इनके अभिव्यक्ति को तानाशाह रूप दिखाया.

हक-अधिकार के मद्देनजर महिला सशक्तिकरण के रूप में उभरी मजबूत अभिव्यक्ति को बीजेपी के रघुवर सरकार द्वारा लाठी के बल पर कुचलने का कुत्सित प्रयास हुआ. क्या किसी सरकार की पुरुषवादी मानसिकता का इससे भयवाह रूप हो सकता है? यकीनन नहीं… और तब विपक्ष में रही झामुमो सत्ता में आने के बाद, मौजूदा दौर में उसके तमाम विधायक महिला सशक्तिकरण, महिला सम्मान में उसके अधिकार को सदन में ताक़त से उभारे, महिलाओं की आवाज बन गूंजे तो राज्य में महिला वर्ग के लिए राहत भरी खबर है.

शिक्षा बजट के अनुदान मांग पर चर्चा करते हुए जेएमएम विधायक दीपक बिरूआ ने कहा – आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय बहुत कम

विधानसभा सदन में शिक्षा बजट के अनुदान मांग पर चर्चा करते हुए जेएमएम विधायक दीपक बिरूआ ने मजबूती से कहा कि राज्य में आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय बहुत कम है. ऐसे में सरकार में इनके कल्याण हेतु एक वेलफेयर फंड का गठन किया जाना चाहिए. दीपक बिरूआ ने स्पष्ट तौर पर हेमन्त सरकार से केरल के तर्ज पर झारखण्ड के आगनबाडी बहनों के लिए 800 रुपये पेंशन सुनिश्चित करने और आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मेडिकल व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की.

  • जेएमएम विधायक सह सूबे की महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग मंत्री जोबा मांझी ने स्पष्ट किया है कि सरकार मार्च माह के अंत तक पोषण सखियों के सभी तरह के बकाया मानदेय का भुगतान कर देगी. 
  • जेएमएम विधायक सुदीव्य कुमार आंगनबाड़ी सेविकाओं और सरकार के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं. आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ वह कई दौर की बैठक कर चुके हैं.ज्ञात हो,  बैठक में हुई चर्चा के आधार पर विधायक सुदीव्य कुमार ने मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपें चुके हैं.
  • स्वंय मुख्यमंत्री कोरोना से लड़ाई में ग्राम स्तर पर शुरू “सर्वे एवं रैपिड एंटीजन जांच कार्यक्रम” की सफलता के लिए आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका पर भरोसा जता चुके हैं. 

पारा शिक्षकों की तरह हो आंगनबाड़ी सेविकाओं की समस्याओं का अंत हो – इसी दिशा में बन रही है  नियमावली

सत्तारूढ़ जेएमएम विधायकों की मांग है कि जिसतरह से चुनावी वादों के तहत मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पारा शिक्षकों की समस्याओं का स्थाई हल निकाला है, उसी तरह आंगनबाड़ी सेविकाओं की भी समस्याओं का अंत करें. बता दें कि राज्य में करीब 36,000 आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका कार्यरत हैं. लेकिन इनके लिए अब तक न कोई नियमावली बनी और न ही कोई निर्धारित मानदेय. नतीजतन, मजबूरन आंगनबाड़ी सेविका आंदोलन की राह पकड़ती हैं. ज्ञात हो, इनके कल्याण में हेमन्त सरकार एक नियमावली बना रही है जो अपने अंतिम पायदान पर है. 

नियमावली बनने से आंगबाड़ी सेविकाओं को होगा फायदा और राज्य में महिला सशक्तिकरण को मिलेगी मजबूती 

आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए जल्द ही नियमावली धरातल पर दिखेगी. इस नये नियमावली में आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए सेवा शर्त तय होगा. नियमावली के अनुरूप-

  1. आंगनबाड़ी सेविका की नियुक्ति होगी और मानदेय निर्धारित होगा. 
  2. इन्हें महंगाई भत्ता, अन्य भत्ता व स्वीकृत अवकाश मिलेगा. 
  3. आंगनबाड़ी सेविका, लघु सेविका और सहायिका की सेवा काल में मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा का लाभ मिलेगा. 
  4. चर्चा है कि लगभग 13 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने पर सहमती बन रही है.

केंद्र ने केवल छह जिलों में नियुक्ति किया पोषण सखी, मानदेय भी किया बंद, लेकिन हेमन्त सरकार सभी जिलों में करना चाहती है पोषण सखी की नियुक्ति 

ज्ञात हो, राज्य में पोषण सखी का भी मामला गंभीर है. राज्य में केंद्र द्वारा केवल छह जिलों में ही पोषण सखी नियुक्ति किया गया है. और अब उसके द्वारा मानदेय भी बंद कर दिया गया है. केंद्र ने ऐसे महिला समस्या हाथ उठाते हुए राज्य सरकार से कहा है कि यदि वह चाहे तो अपने संसाधन पर इसे योजना को चला सकते हैं. ऐसे में हेमन्त सोरेन सरकार मज्बोत इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए राज्य के सभी जिलों में पोषण सखी को नियुक्त करने पर विचार कर, राज्य में महिला सशक्तिकरण का ठोस आधार रखने की दिशा में आगे बढ़ चली है. 

केंद्र सरकार का स्टैंड क्लीयर करते हुए विभागीय मंत्री जोबा मांझी ने साफ़ कहा है कि हमारी सरकार पूरे राज्य में पोषण सखी की नियुक्ति पर विचार कर रही हैं. और इनके लंबित मानदेय का भुगतान मार्च माह के अंत तक हो जाएगा. बता दें कि अनुपूरक बजट में हेमन्त सरकार में पोषण सखियों के मानदेय के लिए 38 करोड़ का प्रावधान किया है.

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महिला दिवस विशेष : हेमन्त सरकार में आधी आबादी सशक्तिकरण केंद्रित योजनाएं – आर्थिक, सामाजिक व मानसिक उत्थान संभव 

March 10, 2022 by najhma Leave a Comment

महिला दिवस विशेष : वितीय वर्ष 2021-22 में योजनाओं के उपलब्धियां दर्शाती है कि हेमन्त सरकार में दलित, वंचित व महिलाएं (आधी आबादी) लाभान्वित हुए हैं. समाज में हासिये के छोर पर खड़े ऐसे वर्गों का आर्थिक, सामाजिक व मानसिक उत्थान संभव  हुआ है, सशक्तिकरण हुआ है… 

रांची/महिला दिवस विशेष : झारखण्ड समेत देश-दुनिया भर में 8 मार्च को ‘विश्व महिला दिवस’ अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया गया. नारी सम्मान में कार्यक्रम आयोजित हुए. झारखण्ड में भी महिला सम्मान में महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा पोषण अभियान में बेहतर कार्य करने वाली आंगनबाड़ी सेविका (दुमका की नूतन देवी एवं पश्चिमी सिंहभूम की रीता श्री पार्या) और कोविड संक्रमण काल में सराहनीय कार्य करने वाली दो महिलाओं (अमोला बास्की एवं जया बिरुली) को सम्मानित किया गया. 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के माध्यम से राज्य की तस्वीर बदलना चाहती है. हालांकि मुख्यमंत्री केवल ऐसे महिला अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय दिवस के अवसरों पर महिलाओं को सम्मानित कर महिला सशक्तिकरण के दिखावे पर भरोसा रखते. क्योंकि उनकी सरकार के 2 वर्षों के कार्यकाल में राज्य के सभी वर्गों के आधी आबादी के सम्मान में केन्द्रित 8 योजनायें, राज्य की महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक व मानसिक उत्थान में मील का पत्थर साबित हुआ है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में इन योजनाओं की उपलब्धियों बताती है कि हेमन्त सरकार में दलित व वंचित वर्ग की महिलाएं स्वयं को जरुर सशक्त महसूस किया हैं.  

हड़िया-दारु बेचने वाली 23675 महिलाओं को उपलब्ध कराया गया वैकल्पिक रोजगार

फूलो-झानों आशीर्वाद अभियान : हड़िया-दारु के निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को चिन्हित कर इस योजना के माध्यम से उन्हें सम्मानजनक आजीविका के साधन प्रदान किया गया. सितम्बर 2020 से शुरू हुई इस योजना को दो चरणों में चलायी गई है. पहला – सितम्बर 2020 से 15 नवंबर 2021. और दूसरा – 15 नवंबर 2021 से 28 दिसम्बर 2021. दोनों चरणों में कुल 23675 (14243 और 9432) महिलाओं को रोजगार के वैकल्पिक सम्मानजनक आजीविका के साधन सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया. स्वरोजगार हेतु कुल 2272.6 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया है.   

75,558 सखी मंडलों को दिया गया है 208 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि

झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी राज्य की ग्रामीण महिलाओं को परंपरागत काम में प्रोत्साहन हेतु हरसंभव सहायता कर रही हैं, ताकि इनका आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित हो सके. ग्रामीण महिलाओं को सखी मंडल से जोड़कर सशक्त आजीविका उपलब्ध कराने का प्रयास हुआ है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल 75,558 सखी मंडलों को कुल 208.69 करोड़ रुपये सामुहिक निवेश निधि उपलब्ध कराया गया है. यह राशि में तीन तरह के सखी मंडलों को दिया गया है – 

  1. कुल 26569 सखी मंडलों को चक्रीय निधि के रूप में 15,000 प्रति सखी मंडल की दर से कुल 38.89 करोड़ रुपये.
  2. कुल 18956 सखी मंडलों को चक्रीय निधि के रूप में 50,000 प्रति सखी मंडल की दर से कुल 94.79 करोड रुपये.
  3. 30,006 सखी मंडलों को चक्रीय निधि के रूप में 25,000 प्रति सखी मंडल की दर से कुल 75.01 करोड़ रुपये. 

आशा योजना से 24.58 लाख परिवारों को मिल रहा लाभ

आजीविका संवर्धन हुनर अभियान (आशा) के द्वारा राज्य की महिलाओं को कृषि आधारित आजीविका, वनोपज संग्रहण, पशुपालन, उद्यमिता समेत स्थानीय संसाधनों से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे महिलाओं के स्वरोजगार के क्षेत्र में वृद्धि हो रही है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में 26 लाख अतिरिक्त परिवारों के लक्ष्य में से अबतक 24.58 लाख परिवारों को जोड़ा जा चुका है. 

67,000 परिवारों को लाह की खेती से जोड़ा गया

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के तहत 67,000 परिवारों के साथ लाह की खेती को बढ़ावा दिया गया है. लगभग 25,000 परिवार रेशम उत्पादन और अतिरिक्त 17,000 परिवार इमली प्रसंस्करण में संलिप्त है. कुल 2.5 लाख परिवारों को आजीविका के विभिन्न माध्यमों से जोड़ा गया है. इस मुहीम में भी महिला को बड़ी मात्रा मे जोड़ा गया है. 

जानिये, महिला केंद्रित कुछ अन्य योजनाओं का हाल

  • दीदी बाड़ी योजना के तहत मनरेगा और राज्य आजीविका मिशन (जेएसएलपीएस) के सहयोग से बड़े पैमाने में महिलाओं को जोड़ा गया है. वर्तमान में लगभग 2,84,035 दीदी बाड़ी योजना राज्य में सचालित है. इसमें ग्रामीण (विशेषकर महिलाएं) अपने बाड़ी (घर के आसपास) में परिवार के पोषण की आवश्यकतानुसार पौधा लगा सकते हैं.
  • दीदी बागिया योजना में मनरेगा के तहत राज्य में विभिन्न प्रकार की नर्सरी स्थापित करने के लिए की गई है. राज्य में नर्सरी स्थापित करने के बाद लोगों को सस्ते दामों पर पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, एवं बेरोजगार महिलाओं को नर्सरी में सहायक बनाया जा रहा है. दीदी बागिया की कुल 412 योजनाएं शुरू की गयी है. 
  • पलाश ब्रांड : राज्य की ग्रामीण महिलाओं के द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने एवं उनके श्रम का समुचित लाभ उन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पलाश ब्रांड का शुभारंभ किया गया है. पलाश ब्रांड संग्रहण एवं पैकेजिंग कार्य में अब तक 10,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी है. वहीं करीब 1.10 लाख महिलाएं पूरे राज्य में पलाश ब्रांड के विभिन्न कार्यों से जुड़ कर अपनी आजीविका को सशक्त बना रही हैं.
  • डायन प्रथा से मुक्त करने और डायन बिसाही से चिन्हित महिलाओं को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए गरिमा परियोजना वित्तीय वर्ष 2019-20 से 3 वर्षों के लिए शुरू की गयी है.
  • सेतु शिक्षा पाठ्यक्रम राज्य के 17 जिलों में शुरू हो रहा है. इसके तहत स्कूल से दूर 8वीं से 10वीं तक की शिक्षा से 14 से 20 वर्ष की बालिकाओं को जोड़ने का लक्ष्य है.

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महिला सशक्तिकरण : महिला-पुरुष एक ही हल के हिस्से – एक के बिना लक्ष्य पाना मुश्किल -CM

March 9, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड महिला सशक्तिकरण : मौजूदा हेमन्त सरकार की नीतियों के कैनवास में महिला सशक्तिकरण को आंके तो मालूम पड़ता है कि राज्य में इस दिशा में कई बड़ी रेखाएं खिंची गयी है

रांची : अन्तरराष्ट्रीय स्त्री आन्दोलन की नेता क्लारा जे़टकिन के वक्तव्यों में 1920 में स्त्रियों की घरेलू ग़ुलामी और पुरुष-स्वामित्ववादी मानसिकता के प्रति गहरी नफ़रत दिखी थी. उनका मानना था कि औरतों की घरेलू ग़ुलामी व “पुराने दास स्वामियों जैसी” मानसिकता से संघर्ष किये बिना क्रान्ति डग आगे नहीं भर सकती. आधी आबादी की लामबन्दी के बिना स्त्री मुक्ति संभव नहीं है. राजनीति पर स्त्री मज़दूरों को जागृत और संगठित करने में पर्याप्त ज़ोर न देने की प्रवृत्ति की कटु आलोचना भी की थी.

101 वर्ष पहले अक्टूबर 1917 में दुनिया के एक छोर में स्त्रियों को समानता के अवसर और अधिकार मिले थे. हर क्षेत्र में सक्रियता के अवसर देने के साथ घरेलू दासता से छुटकारे हेतु सामाजिक संस्थाएँ खड़ी हुई. और यहीं से क़ानून पुरुष स्वामित्ववाद के विरुद्ध स्त्री समानता को प्रभावी बनाने की स्पष्ट रेखा खिंची. अर्थतंत्र, प्रशासन, क़ानून, शिक्षा व सरकार चलाने के कामों में भागीदारी हेतु औरतों के लिए दरवाजे़ खुले. भारत में इस विचारधारा ने गति तो पकड़ी लेकिन मौजूदा दौर में भाजपा की केन्द्रीय सत्ता की नीतियों व प्रशासनिक व्यवस्था के अक्स महिला सशक्तिकरण की रफ़्तार ज़रुर धीमी हुई है.

हेमन्त सरकार की नीतियों के कैनवास में महिला सशक्तिकरण

झारखण्ड की पृष्ठभूमि में, मौजूदा हेमन्त सरकार की नीतियों के कैनवास में महिला सशक्तिकरण को आंके तो मालूम पड़ता है कि राज्य में इस दिशा में कई बड़ी रेखाएं खिंची गयी है. महिलाओं को हडिया-दारू जैसे अभिशप्त जीवन से मुक्त कर सामुदायिक रसोईघर, सार्वजनिक भोजनालय, लॉण्ड्री, मरम्मत की दूकानें, शिशुशालाएँ, किण्डरगार्टेन, बालगृह, शिक्षा संस्थान जैसे कई प्रक्षेत्रों में आर्थिक मदद पहुँचा प्रेरित किया गया है. संक्षेप में कहें तो, घरेलू और शिक्षा सम्बन्धी कार्यों को व्यक्तिगत गृहस्थी के दायरे से समाज के दायरे में स्थानान्तरित कर संविधान के शर्तों को पूरा करने के लिए हेमन्त सरकार में पर्याप्त संजीदगी दिखी है. 

झारखंडी महिलायें घरेलू ग़ुलामी और पुरुष स्वामित्ववाद से निर्भरता से मुक्त हो रही है. उसे सक्षम बनाने का प्रयास हुआ है. वह समाज में क्षमताओं और अभिरुचियों के हिसाब से अपनी भूमिका तय करे, बेहतर अवसर दिये जा रहे हैं. स्त्री मज़दूरों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार संवेदनशील दिखी हैं. सरकार ने कुपोषण से लड़ते हुए प्रसूति गृह, माँओं और बच्चों के देखभाल सम्बन्धी, नवजातों और बच्चों के लालन-पालन सम्बन्धी तमाम प्रक्षेत्रों में संवेदनशील रुझान दिखाया है. ज़रूरतमन्द व बेरोज़गार महिलाओं की ज़रूरतें पूरी करने के दिशा में भी सरकार प्रयासरत दिखी है.

महिला-पुरुष एक ही हल के हिस्से – किसी एक के बिना लक्ष्य पाना मुश्किल

ज्ञात हो, झारखण्ड में महिला दिवस के दिन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को बढ़ चढ़ हिस्सा लेते देखा जाते है. उनके द्वारा झारखण्ड के महिला नेत्रियों-जनप्रतिनिधियों को हौसला-अफजाई, सम्मान देने की ईमानदार परम्परा की शुरुआत हुई है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा कि उनकी सरकार राज्य की महिलाओं के जरूरत के हिसाब से योजनाएं बना रही है. हर माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिकता है. उनकी सरकार महिला शक्ति के साथ कदम मिलाकर चलने को संकल्पित है. हर हाथ को रोज़गार देना सरकार का लक्ष्य है. महिला-पुरुष एक ही हल के हिस्से हैं. किसी एक के बिना कोई भी लक्ष्य पाना मुश्किल है.

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दीपक प्रकाश जी! केंद्र ने मनरेगा व पोषण सखियों का फंड रोका, कुछ तो बोलिए, आवास योजना में तो हेमन्त सरकार ही दे रही अतिरिक्त 50,000 रुपये

March 7, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : पीएम आवास योजना में भाजपा नेता के भ्रष्टाचार का आरोप बेबुनियाद, आवास योजना में हेमन्त सरकार के जनहित फैसले से वोट बैंक डिगने का भाजपा को सता रहा डर. सवाल -केंद्र द्वारा मनरेगा व पोषण सखियों का रोके गए फंड को लेकर दीपक प्रकाश जी के बयानों में क्यों नहीं दिखता दर्द?

रांची : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश फिर हेमन्त सरकार झूठा आरोप लगाने से नहीं चुक रहे. इस बार बहाना प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार को बनाया है. दीपक प्रकाश कह रहे है कि हेमन्त सरकार में ग़रीबों से आवास योजना में वसूली हो रही है. ज्ञात हो, पीएम आवास योजना को बहाना इसलिए बनाया गया है कि बजट 2022-23 में हेमन्त सरकार द्वारा लिए गए बड़े फैसले से भाजपा नेताओं को ग़रीबों के वोट डिगने का डर सता रहा है. साथ ही पिछले 3 माह से मनरेगा की राशि और 4 साल से पोषण सखियों की राशि देना बंद कर दिया है, भाजपा द्वारा इस अधिकार को छिपाने का प्रयास हो रहा हैं.

दीपक प्रकाश का आरोप इसलिए भी बेबुनियाद है क्योंकि हेमन्त सरकार में ग़रीबों को आवास देने का काम प्रमुखता से हो रहा है. ऐसे में दीपक प्रकाश को मनरेगा मजदूरों और पोषण सखियों के मानदेय की चिंता होने के बजाय नकारात्मक व भ्रम की राजनीति करने का सच समझा जा सकता है. ज्ञात हो, मोदी सरकार ने पिछले 3 माह से मनरेगा की मजदूरी राशि और 4 साल से पोषण सखियों की राशि देना बंद कर दिया है. ऐसे में हेमन्त सरकार में गरीबों को आवास योजना के तहत एक अतिरिक्त कमरे हेतु राज्य मद से 50,000 रुपये अतिरिक्त राशि देने और पोषण सखियों के मानदेय के लिए 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने से झारखण्ड भाजपा का आरोप के पीछे का डर साफ़ समझा जा सकता है. 

प्रति मकान 50,000 रुपये की अतिरिक्त राशि देने का फैसला

बजट 2022 में हेमन्त सरकार द्वारा पीएम आवास योजना में बड़ा फैसला लिया गया है. आगामी वित्त वर्ष 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में बनने वाले मकानों में एक अतिरिक्त कमरा जोड़ने के लिए हेमन्त सरकार प्रति मकान 50 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि लाभार्थियों को देगी. 

कोरोना संक्रमण में प्रतिबद्धता के साथ ग़रीबों को दिया गया आवास 

प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति को देखें, तो कोरोना संक्रमण के बचाव को लेकर लगे लॉकडाउन के दौरान झारखण्ड ने प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण में अच्छी प्रगति करते हुए देश में ओवर आल 94.82 अंक के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया था. कोरोना संक्रमण के इस चुनौतीपूर्ण समय में भी गरीब लाभुकों को अधिक घर मिल सके, इसी निमित हेमन्त सरकार ने काम किया. 

सितम्बर 2021 की स्थिति को देखे, तो झारखण्ड में 46 हजार भूमिहीनों को आवास दिया गया. नगर विकास निदेशालय के एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने स्लम एरिया को चिन्हित कर इन इलाकों में करीब 16 हजार आवास की स्वीकृति प्रदान कर दी है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में अब तक 1.57 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं. उसमें से 77 हजार आवास पूरे हो चुके हैं, 50 हजार आवास के निर्माण कार्य भी गति से चल रहा है.

केंद्र ने मनरेगा का फंड तीन माह से रोका, इसपर दीपक प्रकाश को न बोलना दिखाता है कि उन्हें झारखंडियों की कोई चिंता नहीं

नतीजतन, हेमन्त सरकार की पीएम आवास में उपलब्धियों में भाजपा नेता को अनुपलब्धि दिख रही है. दीपक प्रकाश के आरोप में केंद्र द्वारा मनरेगा फंड को रोके जाने की बात जनता से छिपाने की मंशा साफ़ झलकती है. बता दें कि करीब 3 महीने से मनेरगा मजदूरों को बकाया भुगतान नहीं हुआ है. योजनाओं में काम करके भी मजदूर मजदूरी की आस में बैठे हैं. केंद्र सरकार से बार-बार आग्रह किये जाने के बावजूद  केंद्र ऐसे गंभीर मामले को अनसुना कर रहा है. 

मजदूरों की मजदूरी नहीं मिलने की वजह से मजदूर मनरेगा कार्य को छोड़ कर दूसरे कामों में जा रहे थे. हालांकि राज्य के लगातार मांग पर बीते दिनों केंद्र ने फंड जारी की है. लेकिन भाजपा नेता ने कभी भी मोदी सरकार से इस गंभीर समस्या पर बात नहीं की. ट्विट तक नहीं दिखा, बल्कि जनता को मुद्दे से भटकाना का प्रयास किया .

मोदी सरकार ने 2017 से ही पोषण सखियों का रोका फंड, हेमन्त सरकार ने अपनी बहनों के लिए 38 करोड़ का किया प्रावधान 

यही नहीं राज्य के छह जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों में काम कर रही पोषण सखी को पिछले 11 माह से मानदेय राशि नहीं मिली है. इसका कारण है कि मोदी सरकार ने वर्ष 2017 से ही पोषण सखियों के फंड पर रोक लगा दी है. क्या कोई भाजपा नेता को इसकी चिंता है? काया कभी उनके बयानों में झारखंडी बहनों का दर्द छलका. ज्ञात हो, हेमन्त सरकार द्वारा पोषण सखियों के मानदेय के लिए राज्य मद से 38 करोड़ रुपये की राशि जारी किया गया है. अनुपूरक बजट में सरकार द्वारा 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

Filed Under: Women Tagged With: jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

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