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झारखण्ड : हेमन्त सरकार द्वारा किया गया पारदेशीय छात्रवृति MoU क्या है 

August 23, 2022 by najhma Leave a Comment

शेवनिंग मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना के तहत हुआ पारदेशीय छात्रवृति MoU शैक्षणिक वर्ष 2023-24/25/26 के लिए ग्रेट ब्रिटेन के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में एक वर्षीय मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी.

रांची : शेवनिंग मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना के तहत, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रयास से हुआ पारदेशीय छात्रवृति MoU झारखण्ड में हासिए पर खड़े वर्ग को विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का मौका देगा. देश के इतिहास में पहली बार है, जब किसी राज्य सरकार दबे-कुचले वर्गों के लिए इस प्रकार का बाद कदम उठाया गया है. 

शेवनिंग मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना के तहत हुआ यह MoU हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड और Mr. Alex Ellis, ब्रिटिश हाई कमिश्नर की मौजूदगी में, रांची झारखण्ड सरकार और विदेश राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ब्रिटिश उच्चायोग, नई दिल्ली के बीच 23 अगस्त को MoU हुआ है.

ज्ञात हो, इससे पूर्व तक झारखण्ड सरकार द्वारा मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के जरिए यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एण्ड नॉर्थेन आयरलैण्ड के चयनित संस्थानों याविश्वविद्यालयों के चयनित पाठ्यक्रम में अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को अध्ययन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही थी. 

इस MoU के तहत अधिकतम पांच छात्रों का होगा चयन 

इस MoU के अन्तर्गत प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के लिए शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना हेतु झारखण्ड के अधिकतम 5 युवाओं का चयन होगा. चयनित पांच युवाओं की पढ़ाई का सम्पूर्ण व्यय झारखण्ड सरकार एवं विदेश राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय ब्रिटिश उच्चायोग, (FCDO) द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा.  MoU के तहत सभी भुगतान भारत सरकार के द्वारा अनुमोदित दिशा-निर्देश के आलोक में होगा. 

एक वर्षीय मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति 

शैक्षणिक वर्ष 2023- 24 (जिसके लिए अगस्त 2022 में आवेदन आमंत्रित किए गए हैं) से यह छात्रवृत्ति शुरू होगी. वर्तमान में यह MoU तीन वर्ष के लिए हुआ है. ऐसे में छात्रों को शैक्षणिक वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में एक वर्षीय मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी. 

शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति के लिए युवाओं को शैक्षणिक शिक्षण शुल्क के साथ परीक्षा एवं थीसिस शुल्क, एकल छात्र के लिए रहने का खर्च हेतु पर्याप्त मासिक भत्ता, एक भत्ता पैकेज तथा निवास स्थान से स्वीकृत मार्ग के लिए एक वापसी विमान किराया, आदि की सहायता प्रदान की जायेगी.

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पारदेशीय छात्रवृति MoU बहुसंख्यकों को देगा उच्च शिक्षा प्राप्ति का मौका

August 23, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : पारदेशीय छात्रवृति MoU – देश में पहली बार है जब किसी राज्य सरकार और विदेशी, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO), ब्रिटिश उच्चायोग की साझेदारी राज्य के लिए समावेशी और उच्च शिक्षा का खोलेगा द्वार.  

रांची : शेवनिंग मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना झारखण्ड के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति में सहायक होगा. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का यह प्रयास अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग के युवाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने का मानवीय अवसर देगा.

देश के इतिहास में पहली बार है, जब किसी राज्य सरकार के शिक्षा संबंधी योजना को विदेशों का सहयोग मिल रहा है. पारदेशीय छात्रवृति को लेकर शेवनिंग मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना के तहत यह MoU (Memorandum of understanding), 23 अगस्त 2022 को किया गया है. ज्ञात हो झारखण्ड एक अनुसुचित जाति, अनुसुचित जनजाति, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग बाहुल्य राज्य है. और देश के सामाजिक संरचना के अक्स में इन वर्गों की पैंठ शिक्षा में न के बराबर रही है. 

झारखण्ड सरकार एवं ब्रिटिश हाई कमीशन के साझा प्रयास से शेवनिंग मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना के तहत आर्थिक मदद प्रदान किए जाने से इन वर्गों के प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना पूरा होगा. इस एमओयू के अंतर्गत अधिकतम पांच छात्र या छात्राओं को छात्रवृत्ति के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान किया जाएगा.  

हेमन्त सरकार ने 23 अगस्त को किया पारदेशीय छात्रवृति MoU

पारदेशीय छात्रवृति MoU
पारदेशीय छात्रवृति MoU

 इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, झारखण्ड और Mr. Alex Ellis, ब्रिटिश हाई कमिश्नर की मौजूदगी में, रांची झारखण्ड सरकार और विदेश राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ब्रिटिश उच्चायोग, नई दिल्ली के बीच 23 अगस्त को MoU किया गए है.

ज्ञात हो, इससे पूर्व तक झारखण्ड सरकार द्वारा मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के जरिए यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एण्ड नॉर्थेन आयरलैण्ड के चयनित संस्थानों या विश्वविद्यालयों के चयनित पाठ्यक्रम में अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को अध्ययन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही थी.

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हेमन्त के नेतृत्व में आदिवासी हित में कई ठोस फैसले हुए, नहीं मिली बीजेपी की सराहना

August 22, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : 21 वर्षों में पहली बार हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में गंभीरता से आदिवासियों की वर्तमान स्थिति का आकलन हुआ और आदिवासी वर्ग के हित में कई ठोस व निर्णायक फैसले लिए गए. लेकिन भाजपा की नहीं मिली सराहना.

रांची : झारखण्ड के 21 वर्षों के इतिहास में एक आदिवासी सीएम, हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में पहली बार गंभीरता से सोच गया कि जिन आदिवासियों की जमीन के नीचे देश का सबसे ज्यादा खनिज दबा है, वह गरीब क्यों हैं? क्यों हक-अधिकार के प्रति आवाज उठाने पर उन आदिवासियों को जेल में डाला जाता है? क्यों झारखण्ड में विस्थापन व विकास के नाम पर केवल जमीन व खनीज-संपदा की लूट का सच सामने है.  

इस गंभीर मुद्दे पर झारखंडी दृष्टिकोण से आकलन हुआ और आदिवासी हित में कई ठोस व निर्णायक फैसले लिए गए. सीएम हेमन्त के नेतृत्व में न केवल आदिवासी वर्ग के हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन को संरक्षण मिला है, हाँसिए पर खड़ा इस वर्ग को शिक्षा से लेकर आर्थिक, सामाजिक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विकास पथ पर अग्रसित करने का प्रयास हुआ है. लेकिन विडंबन है किसी भी निर्णायक सले में भाजपा की सराहना हेमन्त सरकार नहीं मिली. 

सीएम हेमन्त के नेतृत्व में आदिवासी हित में लिए गए ठोस व निर्णायक फैसले 

  • हेमन्त सरकार में जनजातीय वर्ग को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास हुआ है. ज्ञात हो झारखंड के जनजातीय युवा को मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय स्कॉलरशिप स्कीम के तहत सरकारी स्कॉलरशिप पर विदेश भेजकर उच्च शिक्षा लेने का मौका दिया गया है. 
  • जनजातिय बाहुल्य क्षेत्रों में विकास हेतु जनजाति सलाहकार परिषद –TAC का गठन हुआ है.
  • जनजाति समाज के धार्मिक स्थलों को विकसित करने का काम शुरू हुआ. 
  • आदिवासियों की पहचान, सरना धर्म कोड बिल विधानसभा से पारित के केंद्र को भेज गया.
  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के संबंध में जनहित को तरजीह दी गई. 
  • 21 सालों में पहली बार जेपीएससी (JPSC) नियमावली बनी, परीक्षा सम्पन्न हुई, रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुए और दसकों से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्तियाँ हुई. इसमे पहली बार निष्पक्ष रूप से आदिवासी समुदाय को मौका मिला. 
  • निजी क्षेत्र के नियुक्तियों में 75% आरक्षण के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी मिली है. पहली बार हाँसिए पर खड़े आदिवासी वर्ग कि निष्पक्ष रूप से मौका मिल है. 
  • हेमंत सरकार में पहली बार ट्राइबल फिलोसॉफी जोर दिया गया. अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजन हुआ.
  • जनजातीय भाषाओं में शिक्षा पर जोर दिया गया.

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झारखण्ड : एक आदिवासी सीएम के नेतृत्व में झारखण्डी संघर्ष का निकाल रहा स्थाई हल

August 18, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : आदिवासी सीएम हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में दर्द भरे झारखण्डी संघर्ष का, समस्याओं का, हक-अधिकार संरक्षण का, रोजी-रोजगार का निकाल रहा स्थायी हल.  

रांची : आदिवासी सीएम हेमन्त सोरेन के नेतृत्व वाली झारखण्ड सरकार में मूलवासी-आदिवासी समेत तमाम झारखण्ड के लंबे झारखण्डी संघर्ष का सिरे से स्थाई हल निकाल रहे हैं. झारखंडी हक-अधिकार को संरक्षण मिल रहा है. ज्ञात हो, जनहित में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के संबंध में जनहित में लिया गया निर्णय कोई पहला झारखण्डी संघर्ष का स्थायी हल नहीं है. इससे पहले भी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा स्पष्ट तौर पर जनपक्ष में कई निर्णय ले अपनी ईमानदार मंशा को जाहीर किया है. 

अलग राज्य गठन के बाद झारखण्ड में 21 सालों में पहली बार जेपीएससी (JPSC) नियमावली बनी, परीक्षा सम्पन्न हुई, रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुए और दसकों से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्तियाँ हुई. निजी क्षेत्र के नियुक्तियों में 75% आरक्षण के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी मिली है. हाँसिए पर खड़े आदिवासी, दलित, पिछड़ों व गरीब वर्ग की पहचान को बचाने व आर्थिक सशक्तिकरण की कवायद शुरू हुई. राज्य में शिक्षा से लेकर सामाजिक, आर्थिक, ऐतिहासिक मजबूतीकरण में ठोस कदम उठाए गए.

TAC का गठन व जनजाति धार्मिक स्थलों का विकास कार्य राज्य में हुआ शुरू 

अनुसूची,जनजाति व पिछड़े समाज के सरकारी कर्मियों के विभागीय प्रोन्नति से जुड़ा फैसला लिया गया. जनजातिय बाहुल्य क्षेत्रों में विकास हेतु जनजाति सलाहकार परिषद -TAC का गठन हुआ है. जनजाति समाज के धार्मिक स्थलों को विकसित करने का काम शुरू हुआ. आदिवासियों की पहचान, सरना धर्म कोड बिल विधानसभा से पारित के केंद्र को भेज गया. आदिवासी युवाओं को उच्चतम शिक्षा ग्रहण करने हेतु सरकारी खर्च पर विदेशों के ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालय भेज गया है.

सहायक अध्यापक सेवाशर्त नियमावली 2021 को व पुरानी पेंशन योजना को मिली मंजूरी

झारखण्ड सहायक अध्यापक सेवाशर्त नियमावली 2021 को मंजूरी दे सीएम हेमन्त सोरेन ने राज्य के पारा शिक्षक को सहायक शिक्षक के रूप में नई पहचान दी. और उनके लंबे दर्द भरे संघर्ष को स्थायी विराम दिया. ठीक इसी प्रकार हेमन्त सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को कैबिनेट से स्वीकृति दिया गया है. पुरानी पेंशन योजना को स्वीकृति मिलने से राज्य के पेंशनधारियों को लबे संघर्ष से मुक्ति मिली है और उनका बुढ़ापा संरक्षित हुआ. फेहरिस्त लंबी है, वर्तमान में भी सरकार कई अनुबंधकर्मियों के स्थायीकरण के दिशा मे प्रयासरत है.

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झारखण्ड : हेमन्त सरकार में स्थानीयों को निजी नियुक्ति के क्षेत्र में मिला 75% आरक्षण

August 18, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : निजी नियुक्ति में 40000 तक वेतन वाले पदों पर लागू होगा आरक्षण. 30 दिनों अंदर कंपनियों को स्थानीयों का कराना होगा निबंधन. और हर तीन माह में करनी होगी वेतनधारियों की सूची पोर्टल पर अपलोड. 

रांची : केन्द्रीय राजनीति के अक्स में देश तेजी से निजीकरण की दिशा में बढ़ चला है. जिसके तहत सरकारी नौकरियों में संविधान के तहत देश के बहुजन को प्राप्त आरक्षण स्वतः खत्म होता जा रहा है. जो झारखण्ड जैसे आदिवासी-दलित-पिछड़ा बाहुल्य राज्य के लिए गंभीर विषय है. ज्ञात हो झारखण्ड एक ऐसा राज्य है जहां हक-अधिकार हनन के मद्देनजर मूलवासी-आदिवासी पहले से ही हाँसिए पर रहे हैं. और राज्य की निजी नियुक्ति के क्षेत्र में बाहरियों का नियोजन या नौकरी मिलने का सच सामने है. 

ऐसे विकट दौर में, हेमन्त सरकार में झारखण्ड के निजी नियुक्ति के क्षेत्रों में स्थानीयों के लिए 75% आरक्षण का प्रावधान किया जाना निश्चित रूप से बड़ा कदम है. ज्ञात हो, 29 जुलाई को श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा झारखण्ड स्थानीय नियोजन नियमावली, 2022 की गजट अधिसूचना जारी कर दी गयी है. 31 दिसंबर 2021 को झारखण्ड राज्य के निजी क्षेत्र में स्थानीय नियोजन अधिनियम, 2021 की अधिसूचना जारी की गयी थी. स्थानीय नियोजन अधिसूचना जारी होते ही नियमावली प्रभावी हो गयी है.

स्थानीय नियोजन अधिनियम का अनुपालन एक राज्यस्तरीय अनुश्रवण समिति करेगा

नियमावली के प्रावधानों के अनुसार, नियोक्ता नियमावली लागू होने के कंपनियों को 30 दिनों के अंदर निबंधन करायेंगे. फिर 3 माह के भीतर निर्धारित पोर्टल पर 40 हजार रुपये या इससे अधिक वेतन या मजदूरी प्राप्त करने वाले कर्मियों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा. और 75% स्थानीय उम्मीदवारों को नियोजित करना होगा. कुछ मामलों में छूट दी गयी है.

राज्य अनुश्रवण समिति होगी गठित : अधिनियम के अनुपालन के लिए एक राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति होगी. इसके अध्यक्ष श्रम विभाग के सचिव होंगे व निदेशक नियोजन एवं प्रशिक्षण सदस्य सचिव होंगे. इनके अलावा श्रमायुक्त, उद्योग निदेशक, मुख्य कारखाना निरीक्षक व मुख्य वॉयलर निरीक्षक सदस्य होंगे. राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति अधिनियम से संबंधित सभी मामलों पर संपूर्ण अनुपालन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन करेगी. समिति सरकार को हर तीन माह पर रिपोर्ट देगी.

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झारखण्ड : संवेदनशील हेमन्त सरकार में मूलवासी-जनजातियों को मिला हक-अधिकार 

August 18, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : हेमन्त सरकार की संवेदनशील के अक्स में एक बार फिर झारखण्ड में मूलवासी-जनजातियों के हक-अधिकार को संरक्षण मिला है. जल-जंगल-ज़मीन के संघर्ष को मजबूती मिली है. झारखण्डियों के आत्मविश्वास को ऊर्जा मिली है.

रांची : झारखण्ड में, हेमन्त सरकार की संवेदनशील के अक्स में एक बार फिर मूलवासियों-जनजातियों के हक-अधिकार को संरक्षण मिला है. हेमन्त सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिए ज़मीन नहीं देने या अवधि विस्तार नहीं किए जाने का निर्णय लिया गया है. इस फैसले ने मूलवासियों के अधिकार संरक्षण में एक बार फिर हेमन्त सरकार की ईमानदार मंशा को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है. 

ज्ञात हो, नेतरहाट में लगभग 30 वर्षों से निरंतर चल रही जल-जंगल-ज़मीन बचाने के संघर्ष को स्थायी विराम मिला है. आदिवासी समुदाय की लंबी लड़ायी को न्याय मिली है. सरकार के इस निर्णय ने जनजातीय समुदाय को सारना कोड बिल की भांति लंबे इंतजार के बाद खुश होने का मौका दिया है. ज्ञात हो, नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की शुरुआत 1964 में हुई थी. बाद में तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में इसकी अवधि विस्तार हुआ. और यह सिलसिला भाजपा सत्ता के लंबे काल में भी जारी रहा.  

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता लगातार लगा रहे थे गुहार  

संबंधित सभी ग्रामों द्वारा आमसभा के माध्यम से इस मुद्दे पर आवाज उठायी जा रही थी. जिसमें प्रभावित जनता द्वारा सरकार से गुहार लागाई गई थी कि लातेहार और गुमला जिला पांचवी अनुसूची क्षेत्र है और पेसा एक्ट 1996 के तहत ग्राम सभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है. मसलन, जनहित मंशा पर संवेदनशील हेमन्त सरकार में गंभीरता दिखायी गई. और मुख्यमंत्री द्वारा नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के जमीन की अवधि विस्तार प्रस्ताव को सहमति प्रदान नहीं की गई.

ज्ञात हो, झारखण्ड में छोटानागपुर प्रमंडल के प्रसिद्ध क्षेत्र नेतरहाट में जल, जंगल, जमीन के बचाव में, नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना रद्द करने हेतु मूलवासियों का यह संघर्ष लगभग 30 वर्षों से जारी था. जो समय के साथ बड़ा होता गया और नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना रद्द करने के आंदोलन में देश भर के शख्सियतों ने अपनी सहभागिता निभाई. अंततः इस लंबे संघर्ष को भी हेमन्त सरकार में स्थायी अंत मिला.

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