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हेमंत सोरेन

हेमन्त सरकार 2021 : गोपालकों व पशुओं के लिए हुए बेहतर काम, गाय राजनीति विषय नहीं कुपोषण मुक्ति व विकास का द्योतक …मिली सीख

January 3, 2022 by najhma Leave a Comment

हेमन्त सरकार में गोपालकों व पशुओं के कल्याण में हुए कार्य तथकथित गौभक्त पार्टी के लिए जहाँ सिख हो सकती है. वहीं गाय पर राजनीति करने वाले नेताओं के लिए चिंतनीय विषय कि पशु कल्याण में हुए काम राज्य-देश को कुपोषण मुक्ति के अलावे विकास के राह पर भी ले जा सकती है…

रांची : पूर्व की भाजपा की डबल इंजन सरकार में, गाय एक राजनीतिक विषय रहा और झारखण्ड को कथित तौर पर मॉब लिंचिंस्तान के रूप में जाना जाता रहा. हालांकि, राज्य में ऐसी घटना दोबारा न घटे, हेमन्त सरकार में मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून बनाया गया. शीतकालीन सत्र के दौरान विधेयक भी पास किया गया है. वर्ष 2021 में गोपालकों, गाय और गौशालाओं को लेकर झारखण्ड प्रदेश में सराहनीय कार्य हुए. पशुओं के विकास और कल्याण को लेकर हेमन्त सरकार पूरी तरह कृत-संकल्पित रही. मुख्यमंत्री पशुधन योजना की सफलता तथ्य की पुष्टि करती है. 

वहीं, पशुओं के विकास के लिए प्रति पशु 100 रूपये, गौशालाओं के रख-रखाव के लिए हर वर्ष 36,000 रुपये, गौशाला के लिए रेस्क्यू वाहन, प्रमंडलीय स्तर पर गौ मुक्तिधाम सहित गौशाला में ही गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद्य बनाने की पहल इसी संकल्प का हिस्सा भर है. साफ संकेत है कि हेमन्त सरकार द्वारा पशुओं के कल्याण में हुए कार्य तथकथित गौभक्त पार्टी के लिए जहाँ सिख हो सकती है. वहीं गाय पर राजनीति करने वाले नेताओं को सोचने पर मजबूर कर सकती है कि राजनीति से ज्यादा पशु कल्याण में हुए काम राज्य-देश को कुपोषण मुक्ति के अलावे विकास के राह पर भी गति से ले जा सकती है. 

गो मुक्ति धाम :मृत्यु के बाद गायों के शरीर का हो सकेगा पवित्र तौर पर निष्पादन

साल 2021 के फरवरी माह में हेमन्त सरकार द्वारा लाये बजट प्रावधान 2021-22, पशुपालकों के साथ-साथ पशुओं के लिए अहम हैं. सरकार द्वारा राज्य के प्रत्येक प्रमंडल में गो मुक्ति धाम बनाने का फैसला लिया गया. उद्देश्य साफ था कि मृत्यु के बाद गायों के शरीर का पवित्र तरीके से निष्पादन किया जा सके. बजट में ही मुख्यमंत्री द्वारा पशुधन योजना लाने की बात हुई. योजना के तहत पशुपालन क्षेत्र में बकरा विकास, शुकर विकास, बैकयार्ड लेयर कुकुट, बॉयलर कुकुट पालन, बत्तख चूजा वितरण, गव्य विकास क्षेत्र में दो दुधारू गाय का वितरण की पहल हुई. योजना में पशुओं के विकास को कई सुविधाओं व अनुदान को जोड़ा गया. जिससे पशुपालन के क्षेत्र में झारखण्ड निश्चित रूप से आगे बढ़ा है. 

जोड़ा बैल वितरण योजना से किसानों का होगा मुनाफा

बजट 2021-22 में ही राज्य सरकार जोड़ा बैल वितरण योजना लेकर आयी. इसके तहत गोपालकों द्वारा प्राप्त नर बाछाओं को बैल के रूप में तैयार कर इन्हें सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत किसानों को वितरित किया जा रहा है. इससे किसान को खेती में सहयोग मिलेगा और वे कम लागत में खेती कर सकेंगे. इससे उत्पादन लागत कम होगी और किसानों को मुनाफा अधिक होगा.

गौशालाओं के लिए रेस्क्यू वाहन और प्रति पशु 50 रुपये से बढ़ाकर किया 100 रुपये

राज्य के पशुओं की देखभाल और उसके संरक्षण को लेकर हेमन्त सरकार ने फैसला किया कि गौशालाओं में पशुओं के आहार के लिए एक वर्ष तक प्रति पशु प्रतिदिन 100 रुपये दिया जाएगा. इससे पहले प्रति पशु हर दिन 50 रुपये हर छह माह के लिए दिया जाता था. फिर फैसला हुआ कि राज्य के रजिस्टर 21 गौशालाओं को 10 रेस्क्यू वाहन दिया जाएगा. ताकि लावारिस पशुओं को रेस्क्यू किया जा सके. जो पशु सड़क पर बीमार अवस्था में रहते हैं, उन्हें रेस्क्यू कराया जा सके. 

गौशालाओं के रख-रखाव के लिए 9000 रुपये की राशि को बढ़ाकर किया 36,000

वर्ष 2021 के अंतिम दिन रांची स्थित गौशाला पहुंचे कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने घोषणा कर कहा कि सरकार राज्य के सभी गौशालाओं को सुदृढ़ एवं मजबूत करने के लिए कृतसंकल्पित है. इसलिए सरकार ने पूर्व में दिए जाने वाले पशुओं के भरण-पोषण के अनुदान की अधिकतम 9,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अधिकतम 36000 प्रति वर्ष कर दिया है. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार प्रमंडलीय स्तर पर गौ मुक्ति धाम की दिशा में कार्यरत हैं. साथ ही राज्य के सभी गौशाला के बकाया राशि का भी भुगतान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रांची गौशाला को भी 927000 की राशि भुगतान कर दिया गया है.

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शिक्षा के क्षेत्र में झारखण्ड ने मारी लंबी छलांग, SC-ST-OBC, अल्पसंख्यक सहित सामान्य जाति को मिलेगा, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ 

January 3, 2022 by najhma Leave a Comment

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय स्कॉलरशिप स्कीम, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, सामान्य वर्ग के बच्चों को साइकिल योजना, पारा शिक्षकों के लंबे समय के संघर्ष को मिला विराम और अल्पसंख्यक वर्ग की छात्रवृत्ति भी प्रमुख पहलों में शामिल.

रांची : वर्ष 2021 का आधा से अधिक समय पूरी तरह से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की चपेट में रहा. इस दौरान राज्य में विकास के काम काफी प्रभावित हुए. लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किसी क्षेत्र को प्राथमिकता से अछूता नहीं रखा, जिसमे शिक्षा प्रमुखता से शामिल रहा. मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में वह सभी काम हुए, जो वर्षों से लंबित थे. पहली बार झारखंड के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी स्कॉलरशिप पर विदेश जाने का मौका मिला. इसके अलावा सीएम सोरेन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने ऐसे कई अहम फैसले लिये, जो पिछले कई वर्षों से लंबित थे. 

उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को विदेश भेजने वाली पहली बार बनी हेमंत सरकार

शिक्षा के क्षेत्र में हेमंत सरकार द्वारा सबसे लंबी छलांग जनजातीय बच्चों के उच्च शिक्षा को लेकर लगाया गया. पहली बार झारखंड के जनजातीय बच्चों को सरकारी स्कॉलरशिप पर विदेश भेजकर उच्च शिक्षा लेने का मौका दिया गया. योजना का नाम रखा गया, मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय स्कॉलरशिप स्कीम. स्कीम की सफलता देख मुख्यमंत्री ने घोषणा कर दी कि भविष्य में सरकार अनुसूचित जनजाति के साथ अन्य वर्गों के सरकारी स्कॉलरशिप पर उच्च शिक्षा के योजना पर काम कर रही है. 

शिक्षा के लिए हेमन्त सरकार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से ऋण सुविधा को बनाएगी आसान, सभी वर्ग के बच्चों को साइकिल योजना का मिलेगा लाभ

राज्य के बच्चे शिक्षा से वंचित न हो, इसके लिए पहली बार राज्य सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लाने की पहल की. मुख्यमंत्री ने स्वंय सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर इसकी घोषणा की. इस योजना से बच्चों को शिक्षा के लिए कम ब्याज दर पर ऋण लेने में सुविधा मिल पाएगी. इसी तरह साइकिल योजना का लाभ जो पहले आठवीं और नौवीं क्लास के एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को मिल पाता था, उसे मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए भी लागू किया गया. 

पारा शिक्षकों को किया स्थायी, मेडिकल सुविधा सहित बढ़ा मानदेय की सुविधा

शिक्षा के क्षेत्र में हेमंत सरकार को दूसरी अहम सफलता पारा शिक्षकों के मामले में मिली. पिछले कई वर्षों से लंबित पारा शिक्षकों के मांगों पर मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में सकारात्मक विचार किया गया. पारा शिक्षकों की सेवा ने केवल स्थायी हो पायी, बल्कि इन्हें सहायक अध्यापक का नाम देते हुए इनके लिए मेडिकल सुविधा और मानदेय बढाने जैसे फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री ने तो यहां तक विश्वास दिलाया है कि इस निर्णय से अब पारा शिक्षक जो पहले साल में 11 माह हड़ताल पर रहते थे, 11 माह बच्चों को शिक्षा देने में काम करेंगे. 

मदरसा शिक्षकों के लंबित अनुदान को किया पूरा, जो नियम का पालन नहीं कर पा रहे थे उनके लिए किया गया संशोधन

अन्य वर्गों के लिए बेहतर शिक्षा की दिशा में भी हेमन्त सोरेन काफी सजग दिखे. पिछले कई वर्षों से लंबित अल्पसंख्यक वर्गों के मदरसों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के अनुदान पर सहमति बनी. इसमें मुख्य बिंदु यह रहा कि राज्य के स्वीकृति प्राप्त 183 मदरसों में मात्र 130 मदरसे ही अनुदान की शर्तों का पालन कर पा रहे थे. ऐसे में हेमन्त सोरेन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने मदरसों के अनुदान पर संशोधन की मंजूरी दी. संशोधन के तहत कुछ शर्तों को शिथिल कर दिया गया और कुछ मदरसों को नियम पालन करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया.

जानिये, वर्षो से लंबित अन्य किन मांगों को मुख्यमंत्री ने किया पूरा

शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को रोजगार दिलाने में भी हेमन्त सोरेन पीछे नहीं रहे. पूर्ववर्ती रघुवर सरकार की गलत नीतियों के कारण PGT के हजारों छात्र सेवा पाने से वंचित रह गये थे. यह काम पिछले 7 वर्षों से लंबित था. सीएम के निर्देश पर PGT शिक्षकों की सेवा संपुष्टि की गयी. इसी विभागीय स्तर पर ऐसे कई विषयों पर काम शुरू हुआ, जो वर्षों से लंबित थे. इसमें शामिल हैं…

  1. इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय की नियमावली प्रारूप ( 1995 के बाद).
  2. मॉडल स्कूल के घंटी आधारित मानदेय में बढ़ोत्तरी (2012 के बाद). 
  3. मॉडल विद्यालयों में केवी की तर्ज़ पर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति (2012 के बाद).
  4. प्लस टू (+2) उच्च विद्यालयों में 451 प्राचार्य के पद की स्वीकृति और उसके बाद नियुक्ति की कार्यवाही शुरू करना. (2000 के बाद). 
  5. मदरसा सेवा शर्त नियमावली का प्रारूप (1980 के बाद). 
  6. PGT हेतु पॉलिटिकल साइंस और साइक्लोजी के पद स्वीकृति के लिए आदेश जारी करना. (2000 के बाद).
  7. जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए रोजगार से जोड़ने का प्रयास.

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कभी घने जंगलों के लिए चर्चित था झारखण्ड, नई पर्यटन नीति झारखण्ड को दिलाएगी वही अलग पहचान

January 3, 2022 by najhma Leave a Comment

सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर सीएम ने जारी की नई पर्यटन नीति – 2021, धार्मिक से लेकर माइनिंग टूरिज्म तक को बढ़ावा देने के लिए तैयार है रोड मैप, रोजगार आधारित विकास का खुलेगा द्वारा…

हेमन्त सरकार की पर्यटन नीति झारखण्ड को देश-दुनिया में दिलाएगी अलग पहचान

रांची : झारखण्ड हजारों सालों से घने जंगलों के कारण देश-दुनिया में चर्चित रहा था, लेकिन पूर्व की सरकारों के लूट के अक्स में राज्य में जंगलों की अँधा-धुंध कटाई की नई रेखा खीची गयी. जिससे राज्य की पारंपरिक-आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक धरोहर छिन्न-भिन्न हुए, इनकार नहीं किया जा सकता. लेकिन मौजूदा हेमन्त सरकार में राज्य की प्राकृतिक सम्पदा को फिर से संवारने की कवायद तेज हो चली है. राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर नई पर्यटन नीति-2021 लॉन्च किया गया है. नई पर्यटन नीति-2021 में गढ़े अक्षरों से साफ है कि झाऱखण्ड अब फिर से देश-दुनिया में अपनी वही अलग पहचान बनाने को आतुर है. 

इस नीति के तहत खनिज संसाधनों को नुकसान पहुंचाये बिना सरकार का पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य में पर्यटन की असीम संभावना है. राज्य में नेतरहाट में खुबसूरत पहाड़ी है तो पतरातू, चांडिल और मसानजोर जैसे विशालकाय डैम भी हैं. राज्य में कई धार्मिक स्थल के साथ खनिज (माइनिंग) संपदा से घिरे क्षेत्र है. मसलन, राज्य में पहली बार प्रकृतिक के अलावे धार्मिक और माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नीति में सब्सिडी की भी बात की गयी है. जिससे सुनिश्चित होता है कि मौजूदा सरकार की नीति में राज्य के विकास की डगर लाखों लोगों के रोजगार मुहैया जैसे जन कल्याण से हो गुजरेगा. 

निजी क्षेत्र को भी किया गया है आमंत्रित, सब्सिडी व पर्यटकों के सुरक्षा पर विशेष जोर

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पहली बार नीजि क्षेत्र को सरकार ने आमंत्रित किया है. न केवल देशी बल्कि विदेशि इन्वेस्टरों को भी पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा. इन्वेस्टरों के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान है. यह कुल निवेश की सीमा का 25 प्रतिशत तक होगा. सब्सिडी की अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये तक की गयी है. 

नयी पर्यटन नीति में हेमंत सरकार ने पर्यटन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और सूचना केंद्र बनाने पर भी जोर दिया है. जिससे पर्यटकों को हर तरह की सेवाएं मिलना आसान हो पाएगा. वहीं पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उनकी सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी गयी है. इसके लिए सरकार एक सुरक्षा बल का भी गठन करेगी. सुरक्षा बलों में सेवानिवृत्त जवानों को रखा जाएगा. उन्हें सरकार विशेष प्रशिक्षण भी देगी. 

अनुसूचित क्षेत्रों वाले पर्यटन केन्द्रों के विकास पर सरकार का विशेष जोर, दिया जाएगा इन्सेन्टिव

नई पर्यटन नीति में अनुसूचित क्षेत्र के पर्यटन केन्द्रों पर निवेशकों को अतिरिक्त 5% इंसेंटिव दिया जायेगा. नए टूरिज्म यूनिट शुरू करने पर बिजली दरों में 30% तक की छूट मिलेगी. निवेशकों को लोन इंटरेस्ट में 50% सब्सिडी यानी कि अधिकतम 25 लाख रूपये तक की सुविधा 5 वर्षों के लिए दी जायेगी. सरकार के प्रयास से देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए झारखण्ड के 230 से अधिक पर्यटन स्थलों का चयन कर विकास किया जा रहा है. वहीं अपने लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र में 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर (प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से) सृजित किये जाएंगे. 

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लिए हैं कई अहम फैसले…

  • आइटीडीसी और जेटीडीसी के बीच होटल अशोका के स्वामित्व को लेकर एमओयू किया गया. पर्यटन विभाग की पहल पर होटल अशोका की 51 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर जो एमओयू हुआ है, उसके माध्यम से झारखण्ड ने टूरिज्म के क्षेत्र में पहला पड़ाव हासिल किया.
  • लातेहार, नेतरहाट, बेतला, चांडिल, दलमा, मिरचैया, बेतलसूद को इको टूरिज्म के तौर पर विकसित किया जाने का फैसला.
  • नेतरहाट में चीड़ के पेड़ और मैग्नोलिया सनसेट पॉइंट को पर्यटकों के लिए खास तौर से विकसित किया जा रहा है.
  • झारखण्ड को फूलों की घाटी बनाने की भी तैयारी है. राज्य में कई ऐसी जगहें हैं, जहां, खूबसूरत झील-झरने और फॉल हैं लेकिन प्रदेश की जनता ही इनसे अनभिज्ञ है. 
  • सरकार ने पर्यटन स्थलों को कई श्रेणियों में बांट कर काम करने का फैसला किया है. इसमें धार्मिक, इको-कल्चरल, रूरल, माइनिंग टूरिज्म शामिल हैं.

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