• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar

Test Blog

My Blog

  • News
    • World
    • Contact Us/Press Release
  • SC-ST-OBC
  • Women
  • Viral Reports
  • Legends

हेमंत सोरेन

गवर्निंग काउंसिल बैठक : सीएम हेमन्त का राज्य हित में पीएम से कई आग्रह 

August 8, 2022 by najhma Leave a Comment

गवर्निंग काउंसिल बैठक : कोपरेटिव फेडरलइज़्म के तहत केंद्र से सहयोग का आग्रह. सुखाड़ के लिए विशेष पैकेज का आग्रह. पीएम से आग्रह कि वह बकाया राशि भुगतान हेतु खनन कंपनियों को निर्देश दें. ऐड वलोरम को समाप्त न करने का आग्रह.  

रांची : झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नीतिआयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में भाग लिया. बैठक में उन्होंने कहा कि ढाई वर्षों में राज्य ने आर्थिक, सामाजिक विकास एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कई कदम उठाये हैं. इसे और बल प्रदान करने के लिए कोपरेटिव फेडरलइज़्म की अवधारणा के तहत केंद्र सरकार का सहयोग सभी राज्यों को, विशेषकर झारखण्ड को प्राप्त हो. 

सुखाड़ जैसी विकट समस्या के लिए विशेष पैकेज का पीएम से आग्रह

मुख्यमंत्री गवर्निंग काउंसिल बैठक – झारखण्ड में करीब 30% वन भूमि क्षेत्र है. नई नियमावली में अनुसूचित जाती व पिछड़े वर्ग के हित समिलित करते हुए वन भूमि अपयोजन के लिए स्टेज-2 क्लीयरेंस के पूर्व ग्राम सभा की सहमति के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है. इसपर प्रधानमंत्री से पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया. 

सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण हर 3-4 साल में झारखण्ड को सुखाड़ का दंश झेलना पड़ता है. वर्तमान परिस्थिति में भी राज्य सुखाड़ की ओर बढ़ रहा है. राज्य मे सुखाड़ से निपटने के लिए प्रधानमंत्री से  विशेष पैकेज स्वीकृत करने का आग्रह किया गया. 

धान अधिप्राप्ति को 8 लाख से अधिक बढ़ाने हेतु मांगा गया केंद्र सरकार और FCI का सहयोग

सीएम :  झारखण्ड में सिंचाए के क्षेत्र मे फसलों में विविधता लाने की दिशा में अभी तक कोई विशेष कार्य योजना पर कार्य नहीं हो सका है. हमने धान अधिप्राप्ति को 2 वर्ष में 4 से 8 लाख टन पहुँचाया है परंतु आगे बढ़ने के लिए केंद्र सरकार और FCI के विशेष सहयोग की आवश्यकता है. 

राज्य में तिलहन और दलहन उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं. लेकिन, राज्य में सिंचाई सुविधाओं का घोर अभाव है. मात्र 20% भूमि पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है. सीएम ने अनुरोध किया कि झारखण्ड राज्य में लघु सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई की सुविधा को बढ़ाने हेतु एक विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए.

ऐड वलोरम के आधार पर कोयला कंपनियां नहीं कर रही रॉयल्टी भुगतान

झारखण्ड के खनिज एवं वन संपदाओं का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. परंतु राज्य के आदिवासी और मूलवासी ने हमेशा ठगा महसूस किया है. खनिज संपदा के उत्खनन से प्राप्त आय का अधिकाधिक हिस्सा झारखण्ड जैसे राज्य को प्राप्त होना चाहिए. परंतु पिछले कुछ वर्षों में हुए नीतियों मे नीतिगत परिवर्तन जन कल्याण के ठीक विपरीत साबित हुए हैं. जैसे GST लागू होने से झारखण्ड का आर्थिक नुकसान हुआ है. और इसकी भरपाई का भी समुचित तरीके से  प्रयास नहीं किया जा सका. 

कोयला कंपनियों द्वारा ऐड वलोरम के आधार पर रॉयल्टी भुगतान नहीं किया जा रहा है. जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. ज्ञात हुआ है कि कोयला मंत्रालय द्वारा इस प्रावधान को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है, जो झारखण्ड जैसे राज्य के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला निर्णय साबित हो सकता है. इस विषय पर भी प्रधानमंत्री से सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया गया. 

पीएम से बकाया राशि भुगतान कराने हेतु खनन कंपनियों को निर्देश देने का आग्रह 

झारखण्ड में विभिन्न खनन कंपनियों के भू-अर्जन, रॉयल्टी आदि मद में करीब 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया है। और कंपनियां इसके भुगतान में गंभीरता नहीं दिखा रही है. इस मामले में कई प्रयास भी किये गए. लेकिन फलाफल शून्य रहा है. बकाया मामले में भी प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया कि बकाया राशि भुगतान कराने हेतु वह इन खनन कंपनियों को निर्देश दें। जिससे राज्य के नागरिकों के सर्वांगीण विकास में इस राशि का उपयोग किया जा सके.

Filed Under: News in Hindi Tagged With: jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

जनजातीय महोत्सव 2022 : देश को जनजातीय परंपरा से घुलने-मिलने का मौका देगा

August 5, 2022 by najhma Leave a Comment

मुख्यमंत्री : “झारखण्ड जनजातीय महोत्सव” का भव्य आयोजन राज्य के लिए गौरव की बात है। जनजातीय समुदाय के कई अनछुए ऐतिहासिक पन्ने तक प्रकाश पहुंचेगा। जनजातीय समाज के आवाज को देश के पटल पर मंच मिलेगा। 

रांची : झारखण्ड गठन के बाद राज्य में पहला मौका है जब 9-10 अगस्त 2022 को “झारखण्ड जनजातीय महोत्सव” मनाया जाएगा. यह कार्यक्रम जहां जनजातीय समुदाय के समृद्ध एतहासिक, सामाजिक व पारंपरिक जीवन शैली पर प्रकाश डालेगा तो वहीं गैर जनजातीय वर्ग को इन समुदायों से घुलने-मिलने व समझने का मौका प्रदान करेगा. झारखण्ड जनजातीय बहुल राज्य है ऐसे में यह महोत्सव राज्य वासियों के लिए गौरव की बात है. ज्ञात हो, इस कार्यक्रम में झारखण्ड समेत देश भर के राज्यों से जनजातीय समुदाय व लोग भाग लेंगे. 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा महोत्सव के प्रतीक चिन्ह का अनावरण

झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने महोत्सव के प्रतीक चिन्ह अनावरण के दौरान कहा कि हमारी सरकार जनजातीय बाहुल्य राज्य, झारखण्ड के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है. इसलिए इस प्रकार के कार्यक्रमों को हमारी सरकार और मजबूती प्रदान करती रहेगी. ज्ञात हो, झारखण्ड के जनजातीय समुदाय ने देश समेत विश्व में अपनी अलग इतिहास व पहचान बनायी है. मसलन, इस समुदाय की सभ्यता-संस्कृति को निर्णायक मंच देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है. और “झारखण्ड जनजातीय महोत्सव-2022” का आयोजन इस उदेश्य में मील का पत्थर साबित होगा. 

राज्य के कोने-कोने में बसे जनजातीय समाज के लोग सदियों से अपनी समाज, संस्कृति एवं सभ्यता के संरक्षण के लिए संघर्ष किया है. झारखण्ड की धरती ऐसे वीरों से भरी पड़ी है. धरती आबा बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हु, वीर बुधु भगत, तिलका मांझी, चांद भैरव, तेलंगा खड़िया, शेख भिखारी जैसे कई वीर महापुरुषों ने, नायकों ने राज्य एवं देश को अपना सर्वस्व दिया है. जनजातीय समुदाय के कई ऐसे ऐतिहासिक पन्ने अभी अनछुए हैं जिस पर प्रकाश डाले जाने पर यह समुदाय गौरव के साथ जानें-पहचानें जा सकेंगे. और मजबूती से अपनी विकास गाथा लिखेंगे.

Filed Under: SC-ST-OBC Tagged With: jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

झारखण्ड : 20 साल बनाम ढाई साल – हेमन्त ने पेश किए कई मिसाल

August 5, 2022 by najhma Leave a Comment

हेमन्त सरकार मजदूरों-गरीबों-बेटियों के विश्वास के डोर को मजबूती से थामे दिखती है. इस सरकार में मजदूरों की घर वापसी हवाई जहाज से भी हुई है. मानव तस्करी से बेटियां आजाद हुई है. स्पष्ट तौर 20 साल पर ढाई भारी.

रांची : झारखण्ड के आईने में पूर्व सत्ताओं के 20 साल बनाम हेमन्त सोरेन की नेतृत्व वाली सरकार की ढाई साल का अक्स राहत देने वाला है. ज्ञात हो झारखण्ड सदियों से खनन लूट का शिकार रहा है. लेकिन, झारखण्ड राज्य गठन के बाद सरकारी नीतियों के अक्स में खनन लूट व आदिवासी-मूलवासी की जमीन लूट में वृद्धि हुई. यहाँ तक कि पूर्व की भाजपा सत्ता में साजिशन आदिवासी जमीन की सुरक्षा कवच सीएनटी-एसपीटी कानून पर भी हमले हुए. नतीजतन, गरीबी व बेरोजगारी के अक्स में राज्य को भूख से मौतें, पलायन, मानव तस्करी, आत्महत्या जैसे दंश झेलना पड़ा. 

हेमन्त सरकार मजदूरों-गरीबों-बेटियों का मजबूती हाथ थामी दिखती है

मौजूद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की शासन में राज्य की दशा-दिशा के सुदृकरण में कई ठोस नीतियाँ, कार्यकाल के शुरुआती दौर से देखने को मिली है. सरकार की नीतियों में राज्य की जनता के प्रति संवेदनशीलता दिखी है, जिसे पहली बार भी कहा जा सकता है. हेमन्त सरकार विशेष कर मजदूरों-गरीबों-बेटियों के विश्वास के डोर को मजबूती से थामे दिखती है. इस सरकार में मजदूरों की घर वापसी हवाई जहाज से भी हुई है. मानव तस्करी से बेटियों को आजादी दे स्वाभिमान के साथ उन्हें रोजगार से जोड़ा गया है. 

सरना धर्म कोड बिल को पास कर केंद्र के दहलीज पर भेजा गया

ज्ञात हो, पूर्व के भाजपा शासन में सरना धर्म कोड के नाम पर केवल राजनीतिक रोटियाँ सेंकी गई. और आदिवासियों को सरना धर्म कोड लागू करने के नाम पर आरएसएस की एकल स्कूल, वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठन को जबरन थमा दिया गया. जिसका मूल उद्देश्य केवल आदिवासी का हिन्दुकरण करना है. जो कि सरना कोड की अस्तित्व की मूल लड़ायी से विपरीत उदेश्य लिए हुए है. इस मुद्दे में भी हेमन्त सरकार द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की गई. ज्ञात हो, सरना धर्म कोड बिल को विधानसभा से पास कर केंद्र के दहलीज पर भेजा गया है. 

पारा शिक्षकों व पुरानी पेंशन की लंबी मांग हुई पूरी 

राज्य में वर्षों से पुरानी पेंशन की मांग व पारा शिक्षकों की लंबे संघर्ष को अंजाम तक भी हेमन्त सरकार द्वारा ही पहुंचाया गया. यही नहीं सबसे कम समय में JPSC को सम्पन्न करने का रिकॉर्ड बनाते हुए नियुक्तियाँ सम्पन्न की गई. राज्य के गरीब अनूसूचित जाति के युवाओं के लिए विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु, स्कालर्शिप के माध्यम से रास्ते के खोले गए. राज्य की महिलाओं के मेहनत को सम्मानित किया गया. उनके उत्पाद को पलाश ब्रांड के जरिए बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है. नतीजतन, राज्य खेल से लेकर कई क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. 

मसलन, तमाम उपलब्धियों को देखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता है कि संवैधानिक लकीरों की परिधि में हेमन्त सरकार की नीतियाँ पूर्व की सत्ताओं की 20 साल की नीतियों पर भारी है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की संवेदनशीलता, कुशलता बुनियादी तौर पर संविधान में निहित सभी फंडामेंटल अधिकारों को छूती दिखती है. जो देश में लोकतंत्र को भी मजबूती से परिभाषित करता है.

Filed Under: News in Hindi Tagged With: jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

झारखण्ड : जनजातीय समृद्ध जीवन दर्शन की झलकियों से रूबरू होगा देश

August 4, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : 9 और 10 अगस्त को आयोजित होगा जनजातीय महोत्सव. जनजातीय कलाकारों की अद्भुत और अविस्मरणीय कला एवं जनजातीय फैशन शो का भी होगा प्रदर्शन. मुख्यमंत्री ने किया प्रतीक चिन्ह का शुभारंभ. 

रांची : झारखण्ड में मौजूद हेमन्त सरकार में जनजातियों के कल्याण में ईमानदार प्रयास हो रहे हैं. इस कड़ी मे 9 और 10 अगस्त को झारखण्ड में जनजातीय महोत्सव 2022 का आयोजन होने जा रहा है. रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में नार्थ ईस्ट के कलाकार भी भाग लेंगे. जनजातीय कलाकारों की अद्भुत और अविस्मरणीय कला के प्रदर्शन से संबंधित राज्य सरकार की ओर से तैयारियों को अंतिम चरण में है. मुख्यमंत्री द्वारा आज प्रतीक चिन्ह का शुभारंभ किया गया. 

इस समारोह में जनजातीय इतिहास, साहित्य, मानवशास्त्र समेत अन्य विषयों पर संगोष्ठी, कला एवं संगीत, परिधान, फैशन शो, खान-पान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे. कार्यक्रम में झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मिजोरम समेत अन्य जनजातीय बहुल राज्य के कलाकारों के भाग लेने हेतु अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा आमंत्रित किया गया है. 

कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह 9 अगस्त 2022 को अपराह्न 1 बजे होगा. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद, दिसूम गुरु शिबू सोरेन होंगे. और 10 अगस्त को समापन समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल होंगे. महोत्सव की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन करेंगे. इस दौरान मंत्रिमंडल के समस्त मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महापौर उपस्थित रहेंगे.

Filed Under: News in Hindi Tagged With: jharkhand, scheduled tribe, tribes, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

JMM कार्यकर्ता-नेता : ऐसे ही नहीं कहते हम ‘हेमन्त है तो हिम्मत है

August 4, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता-नेता सभी कहते पाए जाते हैं कि ऐसे ही नहीं कहते हम ‘हेमन्त है तो हिम्मत है’. सटीक दलील भी देते हैं. कहते हैं हेमन्त के नेतृत्व में राज्य राजनीतिक रूप से दक्ष हो रहा है. 

रांची । झारखण्ड में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता-नेता सभी यह कहते पाए जा रहे हैं कि ऐसे ही हम नहीं कहते ‘हेमन्त है तो हिम्मत है’. कारण पूछने पर स्पष्ट कहते हैं कि हेमन्त सोरेन न केवल झारखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर भी सटीक व अलंकृत विकल्प हैं. मसलन, न झारखण्ड की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री चुन कर कोई गलती की है और ना ही हमने.

कार्यकर्ता – सरकार बनते ही राज्य कोरोना महामारी के चपेट में आया. अल्प संसाधन के बीच मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपनी कुशलता से राज्य को संकट से बाहर निकाल. राज्य को भूख से भी मरने नहीं दिया. जबकि भाजपा काल में राज्य में सामान्य दिनों में भी भूख से केई मौतें हुई. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में उतारी गई सारी योजनाएं जहां हर वर्ग के गरीब को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की वकालत करती है तो वहीं महिलाओं को समाजिक सुरक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनाती है.

हेमन्त सरकार को कई केन्द्रीय माध्यमों से अस्थिर करने के प्रयास के बावजूद मुख्यमंत्री अपनी कुशल राजनीति का परिचय दे रहे हैं. एक तरफ वह सरकार को बचा रहें तो दूसरी तरफ उनकी नीतियाँ शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए राज्य को सभी आयामों में विकसित की मोती लकीर खींच रही है. किसान-कृषि, ऊर्जा, इतिहास, पर्यटन, खेल, उद्योग, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, महिला सुरक्षा, न्याय, स्थायीकरण, नियुक्ति, स्वरोजगार, दलित, आदिवासी, पिछड़ों की समस्याओं समेत सभी आयामों में राज्य बुनियादी तौर मजबूत हो रहा है. ऐसे में हम क्यों न कहें –“हेमन्त है तो हिम्मत है…

Filed Under: Jharkhand News Tagged With: hemant government, jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

झारखण्ड : भाजपा सरकार की वर्ष 2016 नियोजन नीति असंवैधानिक

August 4, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड नियोजन नीति 2016 : भाजपा के पूर्व की रघुवर सरकार द्वारा बनायी गई 2016 नियोजन नीति को अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी झारखण्ड हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए असंवैधानिक करार दिया गया है.  

रांची : झारखण्ड में भाजपा के पूर्व की रघुवर सरकार द्वारा बनायी गई वर्ष 2016 नियोजन नीति को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था. ज्ञात हो उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी झारखण्ड हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया गया है. ज्ञात हो, हाईकोर्ट के फैसले को खूंटी व सिमडेगा के शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. मसलन, तत्कालीन विपक्ष द्वारा उस सरकार पर राज्य में फुट डालने का और राजनीति से प्रेरित होने का लगाया गया आरोप सही था.

झारखण्ड भाजपा के पूर्व की रघुवर सरकार में, वर्ष 2016 में तृतीय और चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए बनायी गई नियोजन नीति में अनुसूचित जिलों की नौकरी में सिर्फ उसी जिले के निवासियों को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था. जिसके तहत गैर अनुसूचित जिले इसमें आवेदन नहीं कर सकते थे. जबकि गैर अनुसूचित जिले में सभी जिले आवेदन कर सकते थे. और यह प्रावधान दस साल के लिए किया गया था. जिसको झारखण्ड हाईकोर्ट ने संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होना करार दिया था.

Filed Under: News in Hindi Tagged With: bjp, jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

  • « Go to Previous Page
  • Go to page 1
  • Go to page 2
  • Go to page 3
  • Go to page 4
  • Go to page 5
  • Interim pages omitted …
  • Go to page 48
  • Go to Next Page »

Primary Sidebar

© 2016–2026