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आदिवासी हितों की रक्षा

एक आदिवासी की आपबीती दर्शाती है भाजपा का आदिवासी समाज के प्रति संकीर्ण सोच

September 1, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : भाजपा नेत्री की आदिवासी बेटी से बर्बरता के मामले पीएम, गृहमंत्री, ज्ञानी! बाबा श्री श्री निशिकांत! समेत किसी का भी माफीनामा या बयान ना आना भाजपा का आदिवासी समाज के प्रति संकीर्ण सोच दर्शाता है

रांची : झारखण्ड में एक आदिवासी बेटी की आपबीती में मनुवाद का घृणित बर्बरता का पैटर्न साफ तौर पर झलकता है. भारत में बहुजन समाज जात-पात से उत्पन्न त्रासदी को मनुवाद व्यवस्था की देन मानते है. ज्ञात हो, देश में सवर्ण जातियों द्वारा बहुजनों की प्रताड़ना का इतिहास पुराना है. और वर्तमान में भाजपा-संघ की फ़िलॉसफ़ी में यह पैटर्न दिखता है. क्योंकि एससी-एसटी-ओबीसी से संबंधित कई मामलों यह दिखाता है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी अपने वक्तव्य में कहा कि आदिवासियों को अपमानित करना भाजपा की डीएनए में है.

ज्ञात हो, आदिवासी की बेटी के साथ भाजपा नेत्री सीमा पात्रा द्वारा रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का क्राइम किया गया है. भाजपा नेत्री सीमा पात्रा द्वारा आदिवासी बेटी को बंधक बनाया जाना. जीभ से घर का फर्श साफ करवाया जाना, गर्म तवे से उसकी शरीर को दागा जाना, माल-मूत्र पिलाया जाना, मनुवाद के प्रताड़ित करने की पुराने टूल्स हैं. ऐसे टूल्स का जिक्र स्वयं बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर द्वारा किया गया है. और मानुवाद के ऐसे त्रासदी से बहुजन समाज को बचाने के लिए संविधान में आर्टिकल 15 का प्रावधान किया गया है. 

ऐसे जघन्य अपराध करने वाले अधिकांश इन दिनों भाजपा में ही क्यों पाए जा रहे

ज्ञात हो, ऐसे जघन्य अपराध करने वाले अधिकांश लोग इन दिनों भाजपा के दल में ही पाए जा रहे हैं. झारखण्ड के मामले में भी अपराधी भाजपा की ही नेत्री है. संकीर्ण सोच से ग्रसित यह महिला भाजपा की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का प्रदेश संयोजक थी. इसके दो ही प्रमुख कारण हो सकते हैं. या तो भाजपा-संघ में इसकी ट्रेनिंग मिलती है या फिर ऐसे सोच वाले लोगों को ही भाजपा में नेतृत्व करने का मौका मिलता है. 

झारखण्ड के ज्ञानी! बाबा श्री श्री निशिकांत दुबे द्वारा भी मामले कोई बयान ना आना भाजपा की संकीर्ण सोच दर्शाता है 

इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि हमेशा की भांति न प्रधानमंत्री, ना ही गृह मंत्री और ना ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का ही इस मामले में कोई वक्तव्य आया है. जबकि पार्टी के मुखिया होने के नाते इन्हें देश के आदिवासियों से माफी प्रथम पंक्ति में खड़ा हो माफी मांगनी चाहिए थी. यही नहीं इस मामले में न तो झारखण्ड के ज्ञानी! बाबा श्री श्री निशिकांत दुबेऔर ना ही बाबूलाल मारांडी सरीखे नेताओं का कोई ठोस बयान सामने ना आना भाजपा का आदिवासी समाज के प्रति संकीर्ण सोच दर्शाता है. 

Filed Under: SC-ST-OBC Tagged With: jharkhand, scheduled cast, scheduled tribe, आदिवासी हितों की रक्षा, बीजेपी, भाजपा

हेमन्त के नेतृत्व में आदिवासी हित में कई ठोस फैसले हुए, नहीं मिली बीजेपी की सराहना

August 22, 2022 by najhma Leave a Comment

झारखण्ड : 21 वर्षों में पहली बार हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में गंभीरता से आदिवासियों की वर्तमान स्थिति का आकलन हुआ और आदिवासी वर्ग के हित में कई ठोस व निर्णायक फैसले लिए गए. लेकिन भाजपा की नहीं मिली सराहना.

रांची : झारखण्ड के 21 वर्षों के इतिहास में एक आदिवासी सीएम, हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में पहली बार गंभीरता से सोच गया कि जिन आदिवासियों की जमीन के नीचे देश का सबसे ज्यादा खनिज दबा है, वह गरीब क्यों हैं? क्यों हक-अधिकार के प्रति आवाज उठाने पर उन आदिवासियों को जेल में डाला जाता है? क्यों झारखण्ड में विस्थापन व विकास के नाम पर केवल जमीन व खनीज-संपदा की लूट का सच सामने है.  

इस गंभीर मुद्दे पर झारखंडी दृष्टिकोण से आकलन हुआ और आदिवासी हित में कई ठोस व निर्णायक फैसले लिए गए. सीएम हेमन्त के नेतृत्व में न केवल आदिवासी वर्ग के हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन को संरक्षण मिला है, हाँसिए पर खड़ा इस वर्ग को शिक्षा से लेकर आर्थिक, सामाजिक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से विकास पथ पर अग्रसित करने का प्रयास हुआ है. लेकिन विडंबन है किसी भी निर्णायक सले में भाजपा की सराहना हेमन्त सरकार नहीं मिली. 

सीएम हेमन्त के नेतृत्व में आदिवासी हित में लिए गए ठोस व निर्णायक फैसले 

  • हेमन्त सरकार में जनजातीय वर्ग को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास हुआ है. ज्ञात हो झारखंड के जनजातीय युवा को मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय स्कॉलरशिप स्कीम के तहत सरकारी स्कॉलरशिप पर विदेश भेजकर उच्च शिक्षा लेने का मौका दिया गया है. 
  • जनजातिय बाहुल्य क्षेत्रों में विकास हेतु जनजाति सलाहकार परिषद –TAC का गठन हुआ है.
  • जनजाति समाज के धार्मिक स्थलों को विकसित करने का काम शुरू हुआ. 
  • आदिवासियों की पहचान, सरना धर्म कोड बिल विधानसभा से पारित के केंद्र को भेज गया.
  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के संबंध में जनहित को तरजीह दी गई. 
  • 21 सालों में पहली बार जेपीएससी (JPSC) नियमावली बनी, परीक्षा सम्पन्न हुई, रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुए और दसकों से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्तियाँ हुई. इसमे पहली बार निष्पक्ष रूप से आदिवासी समुदाय को मौका मिला. 
  • निजी क्षेत्र के नियुक्तियों में 75% आरक्षण के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी मिली है. पहली बार हाँसिए पर खड़े आदिवासी वर्ग कि निष्पक्ष रूप से मौका मिल है. 
  • हेमंत सरकार में पहली बार ट्राइबल फिलोसॉफी जोर दिया गया. अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजन हुआ.
  • जनजातीय भाषाओं में शिक्षा पर जोर दिया गया.

Filed Under: Jharkhand News Tagged With: #hemant_soren, bjp, jharkhand, आदिवासी हितों की रक्षा, हेमंत सरकार

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