jharkhand tribals के सवाल उठाने पर झारखण्ड सरकार को अस्थिर करने का प्रयास

jharkhand tribals के सवाल

यह सोचने की बात है कि जिन jharkhand tribals (आदिवासियों) की जमीन पर देश का सबसे ज्यादा खनिज है, वे इतने गरीब क्यों? विस्थापित क्यों? हक-अधिकार के सवाल उठाने पर हेमन्त सोरेन को अस्थिर करने का प्रयास!

Jharkhand news in hindi : jharkhand tribals (आदिवासी) सुरक्षा विषय पर जन सम्मेलन खूब आयोजन होते हैं. लेकिन वहीं एक आदिवासी सीएम केन्द्रीय सत्ता को खटकता है. उस सीएम को हटाने के लिए संविधान से खिलवाड़ होता है. आदिवासियों के हक-अधिकार पर प्रहार होते हैं. आदिवासियों को सरना कोड मुहैया कराने के बजाय जबरन उनकी पहचान हिंदू धर्म से जोड़ने का प्रयास होता है. उन्हें tribals (आदिवासी) के बजाय वनवासी कहा जाता है. उनकी सुरक्षा कवच cnt-spt कानों पर हमले होते हैं.

झारखण्ड में जिन आदिवासियों (tribals) की जमीनों में खनीज की भरमार है उन्हें पूर्व की सत्ता में बेदखल करने का प्रयास हुआ. उनके जनआंदोलनों को दबाया गया। उन्हें जेल में डाल दिया गया. मौजूद दौर में जब एक आदिवासी मुख्यमंत्री hemant soren (हेमन्त सोरेन) द्वारा जब tribals (आदिवासी) अधिकार सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है तो केन्द्रीय सत्ता द्वारा उस सीएम को पद से हटाने का कुप्रयास हो रहा है. 

https://twitter.com/HemantSorenJMM/status/1563169417252720640?s=20&t=TYDnGEAGMHMN3zDOoWOFUQ

jharkhand tribals -आदिवासियों के प्रहरी हेमन्त सोरन को अस्थिर करने का प्रयास 

ज्ञात हो, hemant soren (हेमन्त सोरेन) की विधानसभा की सदस्यता रद्द होने की खबरें ट्रेंड कर रही है. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के खनन पट्टा मामले में निर्वाचन आयोग द्वारा मंतव्य झारखण्ड राजभवन को भेजा गया है. लेकिन, राजभवन द्वारा निर्णय सार्वजनिक करने में विलंब होने के कारण राज्य में अस्थिरता पैदा होने की आशंका बढ़ चली है. भ्रम-अफवाह को बढ़ावा मिल रहा है. विधायकों के संभावित खरीद-फरोख्त जैसे भ्रम को हवा मिल रही है. 

राजभवन के निर्णय में विलंब को लेकर जन चर्चा में बातें आम हो चली है कि यह दुर्भावना से ग्रसित प्रतीत हो रहा है. नतीजतन, सत्ता पक्ष के विधायक खूँटी में सैर-सपाटा कर रहें तो उनकी छत्तीसगढ़ जाने की खबरें आ रही है. झारखण्ड में राजनीतिक उथल पुथल को राज्य की जनता, गिरीडीह के मधुबन में चल रही बीजेपी के तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण शिविर से जोड़ कर देखने लगी है. मसलन, राजभवन पर सवालों का भार बढ़ता जा रहा है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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