BJP की राजनीति को झारखंडी माटी के लाल हेमन्त ने झारखण्ड में रसातल में पहुँचाया

BJP की राजनीति को झारखंडी माटी के लाल हेमन्त ने झारखण्ड में रसातल में पहुँचाया

झारखण्ड में बाहरियों की बैशाखी पर खड़ी BJP की राजनीति को एक आदिवासी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मात खानी पड़ी है. BJP की राजनीति को रसातल में जाने के मुख्य रूप से तीन कारण हैं…

रांची : झारखण्ड में बाहरियों की बैशाखी पर खड़ी BJP की राजनीति को एक आदिवासी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मात खानी पड़ी है. BJP की राजनीत को रसातल में जाने के मुख्य रूप से तीन कारण हैं. पहला सांप्रदायिक राजनीति, दूसरा कॉर्पोरेटप्रस्त राजनीति और तीसरा मानुवाद मानसिकता से ग्रसित राजनीति. जो बीजेपी को न केवल झारखण्ड में बल्कि देश में पल-पल जनता से दूर कर रही है.

ज्ञात हो, झारखण्ड एक गरीब प्रदेश है और आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व जाति व्यवस्था के तौर पर हमेशा से ही इस राज्य का दोहन हुआ है. यही कारण है कि इस क्षेत्र के सतह पर झारखण्ड आंदोलन समेत कई आंदोलन दिखे है. चूंकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा एक आंदोलन से उपजी राजनीतिक पार्टी है और इसकी विचारधारा धर्मनिरपेक्ष के साथ मूल जन समस्या और झारखंडी मानसिकता का स्पष्ट वकालत करती है, इसके साथ जन जुड़ाव है. 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा ज्यों-ज्यों झारखण्ड मुक्ति मोर्चा दल की इस विचारधारा को झारखण्ड के धरातल पर कुशलता से उतारा उतार जाने लगा है. त्यों-त्यों, एक तरफ झारखण्ड की जनता राहत महसूस करने लगी है और दूसरी तरफ बीजेपी की राजनीति झारखण्ड की जमीन पर चित होने लगी है. मौजूदा व्यक्त में प्रदेश में भाजपा की राजनीति को सीएम द्वारा लगभग रसातल में पहुंचा दिया गया है. 

धन बाल से मजबूत BJP की राजनीति को पटकनी देना कतई आसान नहीं था 

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की सत्ता आते ही देश को कोरोना ने जकड़ लिया. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपनी कुशलता से प्रदेश को संकट से बाहर निकाला. लेकिन, बतौर मुख्यमंत्री हेमन्त को शेष कार्यकाल में लंबा सफर तय करना था. उन्होंने तेजी से अपने सधे कदम जन कल्याण की दिशा में बढ़ाया. लेकिन उनके सामने BJP की राजनीति रोड़ा बन खड़ी थी. नियोजन नीति के तरफ कदम बढ़ाने से हेमन्त सोरेन की मुश्किलें और बढ़ गई. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी आगे बढ़ने का सिलसिला जारी रखा. 

चूंकि झारखण्ड बीजेपी को यह भली भांति भान है कि हेमन्त सोरेन न केवल झारखंडी मूल मानुष के समस्याओं को दूर कर लेंगे, झारखण्ड को झारखंडी मानसिकता के अनुरूप नियोजन नीति भी समर्पित कर देंगे. ऐसे में उन पर केन्द्रीय शक्तियों के प्रभाव में भारत के संस्थानों के माध्यम से हमले की शुरुआत हुई. लेकिन मुख्यमंत्री इन सब रोडों की प्रवाह किए बिना जन पक्ष में फैसले लेते चले गए. और समस्याओं के स्थायी हाल निकलते रहे, यह सिलसिला अभी भी जारी है. 

सीएम हेमन्त के जुझारू व्यक्तिव से राज्य की जनता महसूस कर रही है राहत 

मुख्यमंत्री के जुझारू व्यक्तित्व से एक तरफ राज्य की जनता जहां राहत महसूस कर रही थी. तो दूसरी तरफ उनके दल के विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं में भी नई शक्ति का प्रसार हो रहा था. वह मजबूती से पार्टी की विचारधारा के साथ एक हो रहे थे. नतीजतन, जहां एक तरफ झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के साथ जन जुड़ाव मजबूत हुए, तो दूसरी तरफ BJP की राजनीति रसातल में जाती दिखी. 

असोक साम्राट के प्रिय बुद्ध ने दुनिया को सिखाया था कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं. और सीएम हेमन्त ने केवल इस मानसिकता से ओत-प्रोत झारखण्ड मुक्ति मोर्चा दल की विचारधारा को धरातल पर कुशलता उतारना शुरू किया है. इस भावना के साथ जैसे-जैसे सीएम हेमन्त और आगे बढ़ेंगे झारखण्ड राज्य वैसे-वैसे सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता जाएगा.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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