झारखण्ड : 4 उपचुनावों में हार से विक्षुब्द निशिकांत को दिन-रात सिर्फ दिख रहा चुनाव

झारखण्ड : आडंबरवाद का जब पर्दाफाश होता है तो वह खुद को ढकने-तोपने के प्रयास में सभी को गंदा बताने लगता है. लोकतंत्र के मजबूतीकरण में आचार संहिता उल्लंघन मामले में बताने के बजाय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा हेमन्त सरकार पर खीज निकाली गई. 

रांची : आडंबरवाद का जब पर्दाफास होता है तो वह खुद को बचाने के लिए सभी को गंदा बताने लगता है. ऐसा ही कुछ हाल भाजपा के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की हो चली है. महज चंद दिनों पहले राजद पार्टी द्वारा भी तंज कसा गया था कि लंबी चोटी रखने वाला हर बाबा ज्ञानी नहीं होता.  ज्ञात हो, झारखण्ड के पिछले लोकसभा चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन के दो केस में नामजद आरोपित गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे मंगलवार को एसडीजेएम जितेंद्र राम की अदालत में हाजिर हुए. 

अधिवक्ता मनोज साह द्वारा मामले के आलोक में बताया गया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जसीडीह में सांसद निशिकांत समेत अन्य पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ था. सभी पर महागठबंधन के प्रत्याशी प्रदीप साह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था. इस केस में उन पर आरोप गठित किया गया. गोड्डा के केस में अभियोग का सारांश पढ़कर सुनाया गया. अब दोनों ही केस गवाही पर है. 17 अप्रैल 2019 को दिलीप साह के बयान पर यह मामला दर्ज हुआ था. इसमें सांसद महोदय को अकेले आरोपित बनाया गया था.

झारखण्ड की लोकतांत्रिक व्यवस्था को राजतंत्र कहा जाना मानुवाद का आडंबरवाद   

अब इस मामले में जनता को जवाब देने के बजाय सांसद महोदय अपनी खीज हेमन्त सरकार पर निकालते दिख रहे है. ठीक वैसे ही जैसे खुद की गंदगी ढकने के प्रयास में कह दिया जाता है कि सारी दुनिया गंदी है. ऐसे में सांसद महोदय द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं से उपचुनाव के लिए तैयार रहने का आह्वान किया जाना, पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी साख बचाने का प्रयास भर ही हो सकता है. और झारखण्ड की लोकतांत्रिक व्यवस्था को राजतंत्र कहा जाना मानुवाद का आडंबरवाद हो सकता है.  

साथ ही पत्रकारों से बातचीत में गोड्डा सांसद द्वारा कहा जाना कि बहुत जल्द दुमका और बरहेट में उपचुनाव होंगे. भाजपा कार्यकर्ताओं को अभी से तैयारियों में जुट जाना चाहिए, केवल मामले से छवि का संरक्षण ही हो सकता है. यदि ऐसा नहीं है तो उन्हें पत्रकारों को पहले चार उपचुनावों में भाजपा के लगातार हार के कारण को बताना चाहिए था. उन्हें बताना चाहिए था कि आखिर क्यों भाजपा को झारखण्ड में हुए एक भी उपचुनावों में सफलता नहीं मिली? क्यों उन्हें हर बार हेमन्त सोरेन से मुंह की खानी पड़ी है. 

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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