अमृत काल बजट से साफ़ है -झारखण्ड जैसे गरीब राज्यों को अपने बूते सफ़र तय करना है 

रांची : अमृत काल बजट 2022-23 – मोदी सत्ता में किये गए टारगेट की सूची बहुत लंबी है. जैसे किसानों की आय दोगुनी, पीएम कुसुम योजना के तहत लाखों सोलर पंप दिए जाने का टारगेट, डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोलने का टारगेट, 22000 मंडियों को ई नाम से जोड़ने का टारगेट, लेबर फोर्स में महिलाओं की भागीदारी 30% करने का टारगेट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छह करोड़ घर बनने का टारगेट. 

…और सभी टारगेट की मियाद 2022 हो. जो पूरे नहीं हुए. जिसके चर्चा या हिसाब तक अमृत काल बजट में गायब हो. अमृत काल बजट के मद्देनज़र सात सालों के हिसाब में प्रधानमंत्री केवल, “उनकी सरकार तीन करोड़ ग़रीबों को ‘पक्का’ घर देकर उन्हें ‘लखपति’ बनाया है” – “महिलाओं को मालकिन बनाया है” कह पल्ला झाड ले. तो भाजपा सत्ता के ढपोरशंखी वादों के अक्स में देश की असल हकीक़त समझी जा सकती है.

चुनाव के दौर में भाजपा को गंगा घाट की आयी याद – बिना एमएसपी तय किये किसानों को बनाएंगे खुशहाल 

ऐसे में, पूर्व की डबल इंजन सत्ता की नीतियों से त्रस्त झारखण्ड का तेजी से संभले का दौर आरम्भ हो, और झारखण्ड जैसे गरीब प्रदेश के भविष्य के परिपेक्ष में केन्द्रीय बजट 2022-23 विफल नजर आये. झारखण्ड के भाजपा इकाई के नेताओं के बयान भी उस केन्द्रीय हकीकत को छूपाने का सच लिए हो. तो भाजपा-संघ मानसिकता को देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल माना मान जाना चाहिए.

गंगा सफाई तो हुई नहीं लेकिन चुनाव के दौर में भाजपा सरकार को फिर गंगा घाट की याद आयी है. गंगा नदी से सटे पांच किलोमीर चौड़े कॉरिडोर में ऑर्गनिक खेती की जाएगी. लेकिन झारखण्ड में गंगा से सटे क्षेत्र 83 किमी है. और किसानों की एमएसपी की गारेंटी का भी बजट में कोई जिक्र नहीं हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यही हो सकता है कि मोदी सरकार कैसे किसानी को खुशहाल बना सकते है.

होम लोन की प्रिंसिपल पेमेंट में कोई राहत नहीं. बेरोज़गार युवाओं के रोजगार के अवसर के लिए कोई प्रावधान नहीं. ग़रीब-मध्यमवर्ग व नौकरी वालों के लिए कुछ भी नहीं. लघु-मध्यमवर्गीय व्यापारियों के लिए कुछ भी नहीं. मध्यमवर्गीय को महंगाई से राहत देने की दिशा में कोई जिक्र नहीं. फिर से राज्यों की सलाह अनसुनी हुई है. पूंजीपतियों वर्ग के लिए रेलवे निजीकरण का रास्ता साफ़ किया गया है. हीरे के गहने सस्ते होंगे. तो बजट के मायने ज़रुर समझे जाने चाहिए.

झारखण्ड के बहुत सारे अधिकार केंद्र के पास है बकाया – हेमन्त सोरेन 

ऐसे में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का कहना कि केंद्र के पास झारखंड के बहुत सारे अधिकार बकाया हैं. मौजूदा सत्ता के लेखा-जोखाके अक्स में डबल इंजन सरकार झारखण्ड के अधिकार को न देने का सच लिए हो. तो एक करोड़ तक का ठेका झारखण्ड के विस्थापितों को देना भाजपा इकाई के लिए कसमसाहट हो सकती है. सीएम कहे कि केंद्र के द्वारा झारखण्ड के कोयला और लोहे की लूट 100 साल से जारी हो और यहां केवल विस्थापन और धूल के सिवा कुछ न शेष मिलता हो. तो भाजपा-संघ मानसिकता द्वारा झारखण्ड को गरीब बनाने के मंशे को समझा जा सकता है.

मुख्यमंत्री कहे कि भाजपा ने 20 साल में राज्य को समस्याओं की गठरी बना दी है. राज्य को उल्टी दिशा में चलने को मजबूर किया है. ऐसे में उनकी सरकार की कवायद राज्य को बुजुर्गों के दिखाए मार्ग पर सीधे चलकर विकसित करना हो. और वह सफ़र लंबा हो. जिसके अक्स में राज्य में इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने, जिसमे प्राइवेट स्कूलों के तरह अच्छी पढ़ाई कराने के सपने हो. भाजपा द्वारा उसके ही नीतियों के अक्स में संविदाकर्मियों के भरमाने के बीच संविदाकर्मियों की समस्याओं का समाधान निकालने का सच सामने हो. तो केन्द्रीय बजट की पंगु हकीक़त को समझा जा सकता है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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