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झारखण्ड : सोलर पंप सिंचाई से मिला महिला किसानों को लाभ -सुखाड़ भूमि में पहुंची जलधार

February 12, 2022 by najhma Leave a Comment

सोलर पंप माउंटेड साइकिल इकाइयों के इंस्टालेशन से दूरस्थ झारखंडी किसानों को सिंचाई में मिला बहुफसलीय खेती का तोहफा. ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ौतरी के दिशा में हो रहा है सराहनीय कार्य…

रांची : झारखण्ड में सोलर पंप माउंटेड साइकिल इकाइयों के इंस्टालेशन से दूरस्थ क्षेत्रों के सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हुई है. खूंटी के कर्रा स्थित सांगोर गांव की बाहलेन आसानी से अपने खेतों तक पानी पहुंचा पाने में सक्षम हुई है. यहां की 33 महिलाएं उच्च मूल्य कृषि के तहत सब्जियों की खेती कर रही हैं. झारखण्ड में छोटे एवं सीमांत किसानों के खेतों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाने जैसे मुश्किल कार्य को सोलर पंप माउंटेड साइकिल ने आसान बना दिया है. 

कल तक जिन खेतों तक साधारण पंप से पानी पहुंचाना मुश्किल होता था, आज जोहार परियोजना के माध्यम से उत्पादक समूह की महिलाएं साईकिल आधारित सोलर पंप से छोटे खेतों तक आसानी पानी उपलब्ध करा रही है. साईकिल आधारित सोलर पंप सिंचाई एक आधुनिक व सुलभ तकनीक व्यवस्था है जिसकी मदद से किसान सोलर प्लेट और पंप को साइकिल के माध्यम से अपने खेत और नजदीकी जलाशयों तक आसानी से ले जाते हैं. 

बाहलेन बताती हैं, इस सोलर पंप के माध्यम से किसान अपने खेतों की सिंचाई आसानी से कर पा रहे हैं. पहले पटवन के लिए डीज़ल पंप का उपयोग करना पड़ता था, जिससे खेती में लागत बढ़ जाती थी. लेकी साइकिल आधारित सोलर पंप जिसे नयी तकनीक की मदद से किसान दिन के 7 घंटे का पटवन बिना किसी खर्च के कर पा रहे हैं.

किसानों को सोलर पंप एवं सोलर लिफ्ट सिंचाई से मिल रहा है सीधा लाभ

झारखण्ड राज्य में 988 उत्पादक समूहों को चलंत सोलर पंप एवं 650 सोलर लिफ्ट सिंचाई उपकरण उपलब्ध कराया गया है. इसके माध्यम से लगभग 19,650 किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है. सोलर चलंत पंप गाँव और खेत के दुर्गम रास्तों पर भी ले जाया जा सकता है. इससे किसानों को रबी आदि की फसलों को सिंचित करने में मदद मिल रही है. आगामी 6 महीनों में कुल लिफ्ट इकाइयों की संख्या बढ़ा कर 1310 करने की योजना है. इसके एवज में 1200 इकाइयों का पंजीकरण व स्थल निरीक्षण कर अनुमोदित किया जा चुका है. आगामी 6 महीने में कुल सिंचित भूमि बढ़ा कर 20 हज़ार हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.

टपक सिंचाई से कम पानी खपत में होती है खेती, दोगुना मुनाफ़ा कमा रहे झारखण्ड के किसान

झारखण्ड में जोहार परियोजना वरदान बन कर आया है सामने 

खूंटी के मुरहू प्रखंड स्थित पंचघाघ जलप्रपात से सटे कोलोम्दा गांव के उत्पादक समूह की 46 ऐसी  अग्रणी महिला किसान हैं, जिनके पास खेती योग्य ज़मीन होने के बावजूद ज्यादा उपज नहीं हो पाती थी. उत्पादक समूह की सदस्य राधिका देवी बताती हैं कि हम वर्षों से खेती-बाड़ी पर निर्भर रहे हैं. हम सभी पारंपरिक ढंग से खेती करते आ रहे हैं. सिंचाई की समस्या से बहुफसलीय खेती नहीं कर पा रहे थे. लेकिन, अक्टूबर 2020 में जोहार परियोजना हमारे लिए वरदान बन कर आयी. समुदाय आधारित लिफ्ट सिंचाई इकाई की शुरुआत की गई है, इस सिंचाई इकाईं के जरिए बदलाव दिखने लगा है.

लिफ्ट सिंचाई के आने से हम आसानी से तीन फसल ले पा रही हैं. इस तरह खेती में उत्पादकता बढ़ाने एवं किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी के लिए जोहार परियोजना मील का पत्थर साबित हो रहा है. किसानों को सिंचाई सुविधा से जोड़कर फसल उत्पादन क्षमता एवं आमदनी में बढ़ोतरी करने के लिए सोलर आधारित सिंचाई की सुविधा से राज्य के किसानों को जोड़ा जा रहा है. इस पहल की खासियत है कि सिंचाई के साथ पर्यावरण संरक्षण, सिंचाई इकाईं का उपयोग भूगर्भ जल की निकासी के लिए न करके सतही जलस्रोतो के जरिए सिंचाई की सुविधा बहाल की जाती है, ताकि भूगर्भ जलस्तर बरकरार रहे.

करीब 19650 किसानों को मिल रही सौर लिफ्ट सिंचाई की सुविधा 

जोहार परियोजना के तहत ग्रामीण महिलाओं की आय दोगुनी करने की दिशा मे कार्य किये जा रहे है, उत्पादक समूह से जुड़ी महिला किसानों को उच्च मूल्य कृषि से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि अच्छी उपज और बड़े बाजार व्यवस्था के जरिए उनकी आमदनी में वृद्धि हो सके. किसान पूरे साल खेती कर सके, इसके लिए परियोजना के तहत सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है. उत्पादक समूह से जुड़े किसानों को 90% अनुदान पर सोलर लिफ्ट सिंचाई उपलब्ध कराया गया है. 

राज्य भर में अब तक 650 इकाइयों को वाटर यूजर ग्रुप के माध्यम से सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है. करीब 650 इकाइयों से कुल 8745 हेक्टेयर (लगभग 21,600 एकड़) खेत में सिंचाई के लिए सालों भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. जोहार परियोजना अंतर्गत उत्पादक समूहों के जरिए महिलाओं का वाटर यूजर ग्रुप बनाकर पानी की कमी वाले इलाकों में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जा रही है. राज्य के करीब 20 हजार किसान परिवारों को इस पहल के जरिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

Filed Under: Women Tagged With: jharkhand, हेमंत सरकार, हेमंत सोरेन

झारखण्ड : दीदी बगिया योजना से किसान बने उद्यमी – सरकार के लिए तैयार कर रहे हैं पौधे 

January 25, 2022 by najhma Leave a Comment

दीदी बगिया योजना के तहत झारखण्ड के किसानों द्वारा नर्सरी में शीशम, गम्हार, सागवान और आम जैसे पौधों को तैयार किया जाता है. सरकार नरेगा के आम बागवानी योजना के तहत उन पौधों को ख़रीदती है. नतीजतन किसान उद्यमी बन रहे हैं और अपनी आय बढ़ा रहे है.

रांची : झारखण्ड में जन कल्याण के मद्देनज़र जल समद्धि योजना के तहत दीदी बाड़ी, दीदी बगिया जैसे योजना को दूरदर्शी सोच के अंतर्गत धरातल पर उतरा गया है. दीदी बगिया योजना का उद्देश्य अविलंब लाभुकों को आत्मनिर्भरता है. मनरेगा जैसे कल्याल्कारी योजना में महिलाओं की 50% भागादारी सुनिश्चित करना है. झारखण्ड जैसे गरीब व कुपोषित राज्य को फलदार वृक्ष से अछान्दित करना है ताकि राज्य में जनता के फल-फूल सेवन हेतु उपलब्ध हो सके. और पौधों की नर्सरी तैयार कर किसानों को उद्यमी बनाना है ताकि वह सरकार से सुनिश्चित आमदनी प्राप्त कर सके.

ज्ञात हो, 24 दिसम्बर 2021 को राजधानी रांची पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव एन.एन. सिन्हा द्वारा भी हेमन्त सरकार की दीदी बागिया योजना की जम कर तारीफ हुई थी. उन्होंने हेमन्त सरकार द्वारा पिछले 2 वर्षों से सखी मंडलों के जरिये आजीविका सशक्तिकरण में किए जा रहे कार्यो की भी सराहना की है. साथ ही, उन्होंने दूसरे राज्यों को भी दीदी बगिया योजना को अपने राज्यों में लागू करने को निर्देशित किया था. 

राज्य के लिए ख़ुशी की खबर – पौधे अब पेड़ बनने को अग्रसर

ऐसे में, दीदी बगिया योजना के मद्देनजर राज्य के लिए ख़ुशी की खबर हो सकती है कि पौधे अब पेड़ बनने को अग्रसर है. किसानों की श्रृखंला में माइकल एक्का जैसे किसान खुद खेती करने के साथ अन्य किसानों को भी खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं. गुमला के रायडीह के सिलम गांव निवासी माइकल की कड़ी मेहनत और राज्य सरकार के सहयोग का नतीजा है कि वह क्षेत्र के किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं. और अपने परिवार आर्थिक रूप से खुशहाल बनाने की ओर भी अग्रसर हैं.

दीदी बगिया का क्रियान्वयन

2021 में राज्य में गुणवत्तापूर्ण पौधों की मांग की आपूर्ति हेतु हेमन्त सरकार में नरेगा योजना के तहत दीदी बगिया योजना का शुभारंभ हुआ था. हेमन्त सरकार अपनी दूरदर्शी सोच के तहत, राज्य के किसानों को एक उद्यमी के रूप में तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया था. इस योजना के तहत राज्य के प्रशिक्षित किसानों को पौधे तैयार करने हेतु प्रेरित किया गया और सरकार ने तैयार पौधे की ख़रीददारी नरेगा योजना के तहत सुनिश्चित की थी. 

मसलन, राज्य के किसानो के आत्मविश्वास को बल मिला और भारी संख्या में किसान इस योजना से जुड़े. नतीजन किसानों ने इमारती पौधे – जैसे शीशम, गम्हार, सागवान एवं आम जैसे फलदार पौधे के आम्रपाली, मालदा, मल्लिका जैसे विभिन्न प्रजातियो के पौधों को तैयार कर सरकार को उपलब्ध कराया. जिससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण पौधों की मांग की आपूर्ति हुई. और नए सिरे से किसानों के जीवन को सवारने की सरकार के मंशे को बल मिला.  

किसानों की श्रृखंला में माइकल जैसे किस्सनों की कड़ी मेहनत का मिला इनाम 

दीदी बगिया योजना के तहत राज्य के किसानों को सरकारी खर्च पर बागवानी एवं पौधा तैयार करने का प्रशिक्षिण मिला. माइकल एक्का कहते हैं कि उन्होंने वर्ष 2021-22 में दीदी बगिया योजना के जरिये प्रशिक्षिण के बाद अपनी नर्सरी में शीशम, गम्हार, सागवान और आम के 8000 पौधे उगाए. पौधों को नरेगा के आम बागवानी योजना के तहत सरकार द्वारा ख़रीदा गया. माइकल को 25 हजार रुपये की आय हुई. मसलन, दीदी बगिया योजना से माइकल एक्का जैसे किसानों को अतिरिक्त आजीविका का साधन उपलब्ध हुआ और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक आय भी प्राप्त हो रहा है. 

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झारखण्ड के उन 8 सशक्त महिलाओं की कहानी, जिसने मुख्यमंत्री के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को किया सच साबित

January 3, 2022 by najhma Leave a Comment

मुख्यमंत्री ने कहा था कि 1 रुपये में जमीन रजिस्ट्री की योजना बंद कर महिलाओं के लिए शुरू की फूलो-झानो आशीर्वाद योजना, जिसका मिल रहा राज्य के गरीब महिलाओं को लाभ. कहानी उन 8 सशक्त महिलाओं की…

रांची : पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित विपक्ष (भाजपा) मुद्दों के अभाव में झारखण्ड सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोपों यदा-कदा लगाती रही है. लेकिन, झारखण्ड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने जवाब जुबानी देने के बजाय हमेशा अपने फैसलों से दिया है. जो झारखण्डी महिलाओं के कल्याण व सशक्तिकरण में मील के पत्थर साबित हुए हैं. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय शुरू हुई “1 रूपये में महिलाओं की जमीन रजिस्ट्री योजना” के आलोक में विपक्ष का आरोप है कि हेमन्त सरकार में योजना को बंद कर दिया गया. 

लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उक्त योजना गरीबों के लिए नहीं बल्कि अमीरों के लिए थी. इसलिए सरकार ने गरीबी विरोधी योजनाओं को बंद कर गरीब महिला हितैषी कई योजनाओं को शुरू किया. जिसमे फूलो-झानो आशीर्वाद योजना, यूनिवर्सल पेंशन योजना प्रमुखता से शामिल हैं. फूलो झानो योजना से झारखण्ड की वैसी महिलाओं को सीधा फायदा पहुंचा है, जो हड़िया-दारू बेचकर जीवन यापन करने को अभिशप्त थी. हम यहां झारखण्ड की 8 वैसी सशक्त महिलाओं की तस्वीर रखने जा रहे हैं, जो फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ लेकर समाज में इज्जत से जीवन व्यतीत कर रही है अपने परिवार को एक स्तरीय जीवन भी दे पा रही है. 

मजबूरी वश कोई महिला हड़िया-दारू नहीं बेचे, इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा है कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के माध्यम से अबतक 18000 से अधिक महिलाओं को हड़िया-दारू के निर्माण और बिक्री से अलग कर वैकल्पिक रोजगार का साधन उपलब्ध कराया गया है. मजबूरी वश अब महिलायें हड़िया-दारू नहीं बेचे, इसी लक्ष्य के साथ झारखण्ड सरकार आगे बढ़ रही है. बता दें कि हेमन्त सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही है. और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही है. योजना के माध्यम से महिलाओं एवं उनके परिवार का विकास होगा. जिससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आएगा.

योजना का लाभ ले जीवन स्तर सुधरने वाली 8 सशक्त महिलाओं की कहानी

1. चिरेश्वरी देवी ने खोला खुद की साइकिल मरम्मत की दुकान 

खूंटी के अनिगड़ा गांव की रहने वाली चिरेश्वरी देवी आजीविका के श्रोत की कमी की वजह से मजबूरन दारु निर्माण का काम कर बाजारों में बेचा करती थी. पूंजी के आभाव में किसी प्रकार का व्यवसाय नहीं कर पा रही थी. ‘आपके अधिकार आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम’ के माध्यम से उन्हें त्वरित लाभ प्राप्त हुआ और चौक पर ही खुद की साइकिल मरम्मत की दुकान खोल ली.

2. 15000 रुपये का ब्याज रहित ऋण ले मिनोति देवी ने गांव में ही नास्ता का दुकान शुरू किया

गोड्डा के पथरथामा प्रखंड के वोहा ग्राम निवासी मिनोती देवी को भी फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ मिला. हड़िया शराब बेचकर दो वयस्क एवं तीन बच्चे के साथ किसी तरह से घर का गुजर-बसर करने वाली मिनोती देवी ने इस योजना का भरपूर फायदा उठाया. योजना के तहत मिनोती देवी को ब्याज रहित 15000 रुपये का ऋण मिला, जिससे उसने गांव में ही नास्ता का दुकान शुरू किया. 

3.  विनीता हेंब्रम की बदली दुनिया

साहिबगंज की महिला विनीता हेंब्रम से सीएम हेमन्त सोरेन से संवाद कर बताया था कि पहले वह दारू हड़िया बेच कर अपना पेट भरती थी. बाद में उन्हें फूलो-झानो योजना अंतर्गत 10000 का ब्याज रहित ऋण दिया गया. मिली राशि से वह बकरी पालन एवं खेती से जुड़े कार्य कर रही है. सरकार की योजना एवं जेएसएलपीएस से जुड़कर उन्होंने टुकटुक खरीदा जिसके माध्यम से अब अच्छी कमाई कर रहीं है. उनका जीवन स्तर सुधर गया है.

4. संगीता दास ने किराना दुकान खोला और पति संग किया सब्जी का व्यापार

पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला प्रखंड अंतर्गत उत्तरी मऊभंडार पंचायत के तुमाडुंगरी की रहने वाली संगीता दास अब शराब बेचनी थी. पति की बेरोजगारी और परिवार की जिम्मेवारी के कारण यह काम करना पड़ता था. इससे घर में तनावपूर्ण माहौल बनता था जिसका असर बच्चों पर पड़ता है. बाद में फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से संगीता को बिना ब्याज का 10,000 का ऋण मिला. इससे उसने घर में ही किराना दुकान खोल लिया, साथ में पति को भी सब्जी का व्यापार कराने लगीं.

5. अंजू देवी को राशन की दुकान से प्रतिदिन 400 से 500 रुपये की होने लगी आमदनी

बोकारो के पेटरवार प्रखंड की अंजू देवी बताती है कि परिवार के भरण पोषण के लिए गांव में ही वह हड़िया बेचती थी. पति मजदूरी करता है पर रोज मजदूरी नहीं मिलने से परिवार को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था. वह शराब बेचने का काम छोड़ना चाहती थी. इस काम में मदद मिला, फूलो-आशीर्वाद योजना से. 10,000 रुपये के ऋण से उसने चाय-नाश्ते की दुकान खोली. जब दुकान में ग्राहकों की भीड़ बढ़ी तो अंजू ने दोबारा 20,000 रुपये का ऋण लिया. उसने चाय दुकान के बगल में किराना (राशन) की दुकान खोल ली. अब उसे प्रतिदिन 400 से 500 रुपये की आमदनी हो जाती है.

6. दूध बेचकर परिवार का पालन अच्छे से कर रही गुड़िया देवी

हजारीबाग जिले के दारू प्रखण्ड के रचंका गांव की निवासी गुड़िया देवी की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. घर काफी मुश्किल से चल पाता था. जरूरत पड़ने पर गांव के महाजन एवं माईक्रो फाइनांस से ऋण लेना पड़ता था. ऐसे ही समय में गुड़िया देवी को फूलो झानो आर्शीवाद अभियान के तहत महिलाओं की काउंसेलिंग कर हड़िया-दारू की बिक्री छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया. उसे 15,000 रुपये का लोन मिला. लोन से गुड़िया देवी ने गाय और बकरी खरीदी. अब गुड़िया देवी गाय तथा बकरी का दूध बेचकर परिवार का पालन अच्छे से कर रही है.

7. लोगों के बुरे व्यवहार झेलने से मिली सोमनी देवी को मुक्ति

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के कोम्बाकेरा गांव की सोमानी देवी पहले हड़िया और शराब बेचती थी. इससे उसे लोगों के बुरे व्यवहार को झेलना पड़ता था. आज उसी हाट-बाजार में अपने होटल का संचालन कर रही हैं. सोमानी बताती है कि बिना ब्याज के 10000 का ऋण उसे फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का लाभ मिला. इससे उसने यह काम शुरू किया.

8, बदली किरण देवी की जिंदगी.

खूंटी के तोरपा के कोचा पाकरटोली की महिला किरण देवी कभी हड़िया-दारू बेचा करती थी. इससे उसकी जिंदगी जिल्लतों से भर गई थी. लेकिन आज फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से उसका जीवन बदल गया है. आज किरण देवी बेबाक होकर कहती है कि जब वह हड़िया-दारू बनाकर बेचा करती थीं, तब लोग उससे गंदे तरीके से मजाक किया करते थे, लेकिन आज उसे सम्मान की नजर से देखा जाता है.

मसलन, राज्य के लिए यह 8 सशक्त महिलाओं की कहानी बदलाव की जीवंत तस्वीर हो सकती है. साथ ही महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर एक मजबूत व ठोस कदम भी माना जाना चाहिए. साथ ही ये 8 सशक्त महिलाओं की कहानी राज्य के उन मेहनती महिलाओं को हेमन्त सरकार के योजनाओं से जुड़ अपनी अलग पहचान गढ़ने को प्रेरित भी करती रहेगी जो आत्मनिर्भर व सशक्त बनना चाहेगी.

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