क्या राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मू झारखण्ड हित में सीएम हेमन्त सोरेन की खास बातें मानेंगी?

झारखण्ड : क्या राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मू झारखण्ड के ‘सरना धर्म कोड’, सीएनटी-एसपीटी, शिक्षा-निजीकरण, गरीबी जैसे जवलन्त सवालों को गंभीरता से ले पाएंगी? ऐसे में सीएम हेमन्त सोरेन का गृह मंत्री से मुलाकात करने का फैसला राज्य हित में सटीक रणनीति. 

रांची : द्रौपदी मुर्मू, एनडीए की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्वारा झामुमो कार्यकारी अध्यक्ष सह झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से पार्टी का समर्थन मांगा गया है. ज्ञात हो, राष्ट्रपति चुनाव के सम्बन्ध में झामुमो कोर कमिटी की प्रथम चरण की बैठक संपन्न हुई है. जिसके तहत झामुमो केंद्रीय अध्यक्ष सह दिसुम गुरु शिबू सोरेन को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है. और पार्टी नेता नलिन सोरेन द्वारा जानकारी दी गयी है कि इस सम्बन्ध में सीएम गृह मंत्री से मुलाकात कर निर्णय लेंगे. 

ज्ञात हो, प्रतीकों की राजनीति के अक्स में आदिवासी-दलित, शोषित-बहुजन, किसान-श्रमिक-गरीब, शिक्षा-निजीकरण जैसे नीतियों के तहत वर्तमान दलित प्रतीक राष्ट्रपति के कार्यकाल की भूमिका को देखते हुए, राष्ट्रपति पद की अगली आदिवासी प्रतीक, प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के नाम को एनडीए द्वारा आगे किया जाना, के बहुसंख्यक गरीब आबादी के समक्ष भाजपा के मंशा पर सवाल खड़े कर रहे है. देश भर में उठ रहे गंभीर सवालों से बीच झारखण्ड जैसे आदिवासी बाहुल्य राज्य व झामुमो दल में गहन चिंतन-मंथन, राज्य के प्रति झामुमो की गंभीरता दर्शाता है.

आदिवासी अस्तित्व से जुड़े ‘सरना धर्म कोड’ में भाजपा का झूठ बोलने का सच सामने 

ऐसे दौर में जब नवंबर 2021, नीति आयोग की बहुआयामी गरीबी सूचकांक में झारखण्ड में करीब 42.16% आबादी गरीबी हो. आदिवासी हिन्दू न होने की लड़ाई लड़ रहा हो. आदिवासी अस्तित्व से जुड़े ‘सरना धर्म कोड’ पर भाजपा द्वारा झूठ बोला गया हो. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में पारित सरना आदिवासी धर्म कोड प्रस्ताव केंद्र द्वारा रोका गया हो. बाहरी मानसिकता के अक्स में आदिवासियों की कवच सीएनटी-एसपीटी को साजिशन ख़त्म करने का बार-बार प्रयास हो रहा हो. मर्जर के नाम पर स्कूल बंद कर राज्य के दलित – आदिवासी, गरीब-बहुजन के शिक्षा के अधिकार पर हमला बोला गया हो, तो कई मायने झामुमो का चिंतन मंथन जायज हो सकता है.

मसलन, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की बैठक में फैसला लिया जाना कि गृह मंत्री अमित शाह से झारखण्ड के मुख्यमंत्री सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन के मुलाकात के बाद निर्णय लिया जाना. साथ ही मुख्यमंत्री का राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू से गंभीर विमर्श, कई मायने में झारखण्ड समेत देश के दर्द के प्रति चिंता को उभारता है

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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