भाजपा आइडियोलॉजी का ठेका बहाली पर तानाशाही, तो हेमन्त सत्ता में ठेका कर्मी के स्थाई पर जोर

झारखण्ड : देश भर में एक तरफ भाजपा आइडियोलॉजी के तानाशाही रवैया तहत ठेका बहाली जारी है, जो युवाओं के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह अंकित करते है, तो हेमन्त सत्ता में अनुबंध कर्मियों के स्थाईकरण जोर, युवा भविष्य का संरक्षण दर्शाता है.

राँची : देश भर में भाजपा शासन आइडियोलॉजी के तहत ठेका बहाली अर्थात अनुबंध कर्मी बहाली पर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है. झारखण्ड इस नीति का दंश लम्बे समय से झेलता आ रहा है. ज्ञात हो, ठेका बहाली नीतियों के अक्स में राज्य के पारा शिक्षक, पूर्व के भाजपा शासन में 12 महीने में 11 महीने स्कूलों के बजाय सड़कों पर आन्दोलनरत दिखती रही है. कई बार उन्हें अधिकार के मांग के एवज में दमन सहना पड़ा है, पीठ पर लाठिय खानी पड़ी है. 

ज्ञात हो, राज्य में पूर्व भाजपा शासन में महिलाओं-दीदियों तक को भी नहीं बक्सा गया. उनपर भी लाठियां बरसाई गई. इसी प्रकार कई ऐसे क्षेत्र है जहाँ अनुबंध कर्मियों के सर पर छटनी की तलवार लटकी हुई है. नतीजतन वह पूरी क्षमता से अपनी सेवा देने में असमर्थ हैं. जो न केवल देश-राज्य के विकास में एक गंभीर बाधक के रूप में बल्कि गण अधिकार हनन के रूप में भी सामने आया है.

लेकिन, हेमन्त सरकार में, राज्य में इन तमाम संविदाकर्मियों के स्थायीकरण की नीतियों पर गंभीरता से कार्य हो रहा है. ज्ञात हो, महज चंद महीने पहले ही नियमावली में संशोधन कर राज्य के पारा शिक्षकों को सहायक शिक्षक का दर्जा दे कर, उनका स्थाईकरण किया गया. साथ ही, रिक्त पदों पर स्थाई नियुक्तियां दे युवाओं के भविष्य को सवार जा रहा है. इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया है कि राज्य के अन्य अनुबंध कर्मियों के स्थाईकरण के दिशा में नियमावली तैयार किया जा रहे है. जल्द उनका भी स्थायीकरण होगा. जिसे लोकतंत्र की रक्षा में सराहनीय कदम माना जाना चाहिए.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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