झारखण्ड : केसीसी के माध्यम से हेमन्त सरकार दे रही है राज्य के किसानों को सुरक्षा कवच

झारखण्ड : किसान क्रेडिट कार्ड से खाद, बीज आदि हेतु कर्ज आसानी से मिलता है. मसलन, राज्य में केसीसी को किसानों की सुरक्षा कवच के रूप देखा जाता है. हेमन्त सरकार में बिरसा किसान को कर्ज के अभाव में पलायन न करना पड़े, केसीसी से सम्मानित किया जा रहा है. 

रांची : झारखण्ड एक कृषि बहुल राज्य है. प्रदेश में का अधिकाँश आदिवासी-मूलवासी व बहुसंख्यक गरीब आबादी की जीविका कृषि व वनोत्पाद पर निर्भर करता है. पूर्व की सत्ताओं के नीतियों के अक्स में इन किसानों को पूंजी व संसाधनों के अभाव में पलायन जैसे दंश को झेलना पड़ा है. लेकिन, मौजूदा हेमन्त सत्ता में राज्य के किसानो बिरसा किसान नाम से सम्मानित किया गया है. इन्हें कर्ज के अभाव में पलायन न करने पड़े इसलिए राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड योजना (केसीसी) युद्ध स्तर पर लागू है. 

झारखण्ड में केसीसी को किसानों के सुरक्षा कवच के रूप देखा जाता है

ज्ञात हो, किसान क्रेडिट कार्ड से खाद, बीज आदि के लिए आसानी से कर्ज मिल जाता है. मसलन, राज्य में केसीसी को किसानों की सुरक्षा कवच के रूप देखा जाता है. राज्य में छोटे-छोटे करीब 25.56 लाख किसान हैं, लेकिन अबतक करीब 13 लाख किसानों को ही केसीसी कार्ड की सुविधा प्राप्त थी. और लगभग 12.55 लाख किसान केसीसी कार्ड की सुविधा से वंचित हैं. जिसे सुधारने की दिशा में, हेमन्त सरकार में बिरसा किसान को कर्ज के अभाव में पलायन न करना पड़े, इन्हें ससम्मान कर्ज मिले. इसलिए राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड योजना (केसीसी) को युद्ध स्तर पर लागू किया जा रहा है. 

ज्ञात हो, झारखण्ड में 23 जून 2022 के दिन को राज्य के लगभग सभी प्रखंडों में एक साथ समारोह का आयोजन कर सभी बिरसा किसानों को केसीसी से सम्मानित कर, दिन को खास बनाने का प्रयास सरकार द्वारा हुआ. इस समारोह में 10 लाख से ज्यादा बिरसा किसानों ने शिरकत की. कार्यक्रम के माध्यम से लगभग एक लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने का सराहनीय व ऐतिहासिक प्रयास हुआ है. और शेष पालनहारों को इस योजना से लभान्वित करने का तेजी से प्रयास हो रहा है. जो कि झारखण्ड के इतिहास में ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूतीकरण में किसी सरकार का सराहनीय प्रयास है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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