झारखण्ड : मुख्यमंत्री के बेहतर प्लानिंग से राज्य के ग्रामीण व दुर्गम इलाकों में पहुंची है स्वास्थ्य सेवाएं

सीएम की सोच – इलाज़ के लिए झारखण्ड की जनता को बेंगलुरु, महाराष्ट्र, दिल्ली, पुणे जैसे अन्य शहरों में न जाना पड़े. ’बाइक एंबुलेंस’, ‘GPS से लैस ई-स्कूटी सेवाएं’, ‘वैक्सीन एक्सप्रेस’ जैसी पहल के साथ हेमन्त सरकार में स्वास्थ्य सर्किट बनाने की तैयारी

प्राइवेट हॉस्पिटल राज्य में स्वास्थ्य की दिशा में काम करें, इसके लिए सिंगल विंडो से सुविधा देने की तैयारी में हेमन्त सरकार

रांची : झारखण्ड के 21 वर्षों के इतिहार में पहली बार है, जब राज्य के सभी जिले, प्रखंड तथा पंचायतों सहित दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत पहुंचाने में कार्य योजना तैयार हुई है. और यह योजना मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के बेहतर प्लानिंग का नतीजा है. स्वास्थ्य विभाग से बेहतर समन्वय स्थापित हो मुख्यमंत्री स्वंय इस दिशा में काम कर रहे हैं. ज्ञात हो, आंगनबाड़ी सेविका – सहायिका, आशा वर्कर, एसएचजी की महिलाओं सहित प्राइवेट हॉस्पिटलों को इस कार्य योजना में शामिल किया गया है.

हेमन्त सरकार की इस दिशा में बड़ी पहलों में बाइक एंबुलेंस सेवाएं, GPS से लैस ई-स्कूटी सेवाएं, वैक्सीन एक्सप्रेस प्रमुखता से शामिल हैं. इसके अलावा हेमन्त सरकार राज्य में हेल्थ कॉरिडोर, प्राइवेट हॉस्पिटलों को सिंगल विंडो सिस्टम से सुविधा देने की तैयारी में है. ताकि राज्य के गरीब जनता को इलाज़ के लिए झारखण्ड की जनता को बेंगलुरु, महाराष्ट्र, दिल्ली, पुणे जैसे अन्य शहरों में न जाना पड़े.

पूरे राज्य में बनेगा हेल्थ कॉरिडोर, प्राइवेट हॉस्पिटलों को सरकार देगी सिंगल विंडो सुविधाएं 

मई 2021, मुख्यमंत्री ने एक निजी कार्यक्रम में 100 बेड वाले हॉस्पिटल के ऑनलाइन उद्घाटन के दौरान राज्यवासियों को बताया था कि सरकार पूरे राज्य में हेल्थ कॉरिडोर बनाने की दिशा में बढ़ चली है. इसके तहत हर गांव के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सकेगी. मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग के साथ प्राइवेट संस्थानों जैसे कि, टाटा समूह, बोकारो स्टील सिटी लिमिटेड, कोल इंडिया, मेदांता समूह आदि के साथ मिलकर काम करेगी. 

ऐसे संस्थानों को सरकार की तरफ से सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से हर सुविधा उपलब्ध कराने पर काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने कहा, ऐसा कर हम राज्य में एक सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी कर पाएंगे, ताकि यहां के लोगों को बेहतर इलाज के लिए बेंगलुरु, महाराष्ट्र, दिल्ली, पुणे न जाना पड़े.

बेहतरीन उदाहरण है, मांडू प्रखंड में ऑक्सीजनयुक्त 80 बेड वाले कोविड केयर सेंटर की शुरूआत

ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुचांने की दिशा में मुख्यमंत्री कार्यरत है, ऐसे उदाहरण सरकार के कामों से पता चलता है. मई 2021 को मुख्यमंत्री ने रामगढ़ जिला स्थित मांडू प्रखंड के डीएवी स्कूल, घाटोटांड़ में बने ऑक्सीजनयुक्त 80 बेड वाले कोविड केयर सेंटर का ऑनलाइन उद्घाटन किया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि जिले के अधिकतर क्षेत्रों में विभिन्न औद्योगिक संस्थानों द्वारा खनन कार्य किये जाते हैं.

आदिम जनजातीय समुदायों के लिए पहली बार शुरू हुई एंबुलेस सेवाएं. 

यह बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि ग्रामीण विशेषकर सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले आदिम जनजाति समुदाय को सुविधाएं और संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ नही रहने के कारण गंभीर बीमारियों से पीड़ित होना पड़ रहा है. आदिम जनजाति समुदाय के लोगों खासकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को त्वरित अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. इसके लिए पहली बार हेमन्त सरकार ने बाइक एंबुलेंस योजना लेकर आयी है. प्रत्येक बाइक एंबुलेंस में जीपीएस सिस्टम स्थापित किया जाएगा, ताकि उसकी निगरानी हो सके. इसके लिए 3.5 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.

टीका एक्सप्रेस सरकार की एक नयी और अनोखी पहल

राज्य विशेषकर ग्रामीण इलाकों में छूटे कोरोना वैक्सीन को रफ्तार देने के लिए बीते साल सरकार ने 60 मोबाइल वैक्सीनेशन वैन को विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया था. ये सभी वैन ‘टीका एक्सप्रेस’ के रूप में टीकाकरण अभियान सहित कई बिमारियों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं. 

चाईबासा के दुर्गम और जंगलों में बसे गांव तक ई-स्कूटी बनी स्वास्थ्य सेवाओं का आधार

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा वर्कर, एसएचजी की महिलाओं का सहयोग लेकर बीमार लोगों का उपचार हो, इसके लिए पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा जिले में बेहतर काम शुरू हुआ है. जिले के दुर्गम सहित साथ जंगल की पगडंडियों के सहारे गांव तक पहुंचने के लिए ई- स्कूटी की सेवाएं ली जा रही है. करीब 342 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सेवाएं पहुंचाने के लिए 180 ई-स्कूटी चलाया जा रहा है. GPS से लैस ई-स्कूटी से ANM दीदी  (Auxiliary Nursing Midwifery / सहायक नर्स दाई) बेहतर तरीके से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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