झारखण्ड : सुधर रही न्यायिक व्यवस्था हाईकोर्ट -173 कोर्ट व अनुमंडलीय भवन निर्माण

झारखण्ड : चार जिलों में बनाए जाएंगे 173 कोर्ट भवन, नगर उंटारी में बनेगा अनुमंडलीय न्यायालय, दुमका में बनेगा हाईकोर्ट का बेंच. हाईकोर्ट नए भवन निर्माण के लिए 148.62 करोड़ रुपये की मिली स्वीकृति

हाईकोर्ट नए भवन निर्माण के लिए मुख्यमंत्री से मिली 148.62 करोड़ रुपये की स्वीकृति

राँची : देश के अतिपिछड़े राज्यों में शुमार झारखण्ड में अधिकतम शासन भाजपा की रही है. और इस दौरान झारखण्ड की न्यायिक व्यवस्था की समस्या गहराती रही है. ज्ञात हो, भाजपा शासन में राज्य नक्सलवाद समेत लॉ एंड आर्डर व महिला सुरक्षा, विस्थापन, बाहरी दबंगई जैसे समस्याओं से ग्रसित रहा है. साथ ही गरीब आदिवासी बेजुबान समुदाय के लोगोगों को नक्सल की संज्ञा दे मौत के घाट उतारे गए हैं. हाईकोर्ट सहित जिला न्यायालयों में हजारों केस आज भी पेंडिंग है. नतीजतन झारखण्ड के 20 वर्षों के इतिहास में गरीब मूलवासी न्याय को तरसते रहे हैं. 

ज्ञात हो, हाईकोर्ट का लोकेसन राजधानी राँची में है. और झारखण्ड की भौगोलिक स्थिति के कारण   अन्य जिलों के मूल निवासी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक समस्याओं को झेलना पड़ता है. साथ ही वर्तमान हाईकोर्ट भवन में जगह की कमी होने से वकीलों और न्यायाधीशों को कई समस्या का सामना करना पड़ता है. तमाम परिस्थतियों के मद्देनजर हेमन्त सरकार में राज्य की न्यायिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा सक्रियता के साथ कदम उठाया गया है. सरकार के अल्प अवधि में न्यायिक क्षेत्र में कई अहम फैसले लिये गये. 

  1. हाईकोर्ट भवन के नए भवन निर्माण के लिए 148.62 करोड़ की राशि की स्वीकृति.
  2. दुमका में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना. 
  3. राज्य के जिलों में कुल 173 कोर्ट भवन बनाने निर्माण 
  4. गढ़वा के नगर उटांरी में अनुमंडलीय न्यायालय गठन. 

हाईकोर्ट के निर्माणाधीन भवन के लिए सीएम ने दी 148.62 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति

धुर्वा स्थित हाईकोर्ट के नए निर्माणाधीन भवन को लेकर बीते दिनों मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा 148.62 करोड़ रुपये के खर्च की प्रशासनिक स्वीकृति दी है. यह राशि योजना के दूसरे चरण के तहत दी जाएगी. दूसरे चरण के लिए कुल प्राक्कलित राशि 148,62,01,000 खर्च किये जाएंगे. खर्च की जाने वाली राशि के प्रस्ताव को शीघ्र ही कैबिनेट की स्वीकृति के लिए रखा जायेगा. कैबिनेट में स्वीकृति के पश्चात दूसरे चरण का काम शीघ्र पूरा हो जाएगा. इससे होईकोर्ट का कामकाज धुर्वा स्थित नवनिर्मित भवन से शुरू हो जायेगा. 

नगर उंटारी अनुमंडलीय न्यायालय के लिए 7 न्यायिक पदाधिकारियों का पद होगा सृजित

हेमन्त सरकार ने कैबिनेट में गढ़वा जिलान्तर्गत गठित नगर उंटारी अनुमंडलीय न्यायालय के लिए न्यायिक पदाधिकारियों के सात विभिन्न पदों के सृजन की स्वीकृति दी है. बता दें कि नगर उंटारी अनुमंडल मे अनुमंडलीय न्यायालय का गठन किया जाना है. अभी अनुमंडलीय न्यायालय के गठन को लेकर न्यायालय भवन, आवासीय भवन और कारागार के निर्माण की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. 

नगर उंटारी अनुमंडल में छह न्यायालय गठित किए जाएंगे. इनमें जिला एवं अपर सत्र न्यायधीश का एक न्यायालय, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी का एक न्यायालय, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) का एक न्यायालय, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी का एक न्यायालय, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) का एक न्यायालय और न्यायिक दंडाधिकारी का दो न्यायालय होगा. 

राज्य के चार जिलों में बनाया जाएगा 173 कोर्ट भवन 

हेमन्त सरकार के कार्यकाल में ही राज्य के चार जिलों में 173 कोर्ट भवन निर्माण कराया जाएगा. केंद्र और राज्य के सहयोग से यह कोर्ट भवन बनेगा. इसमें गिरीडीह में 41 कोर्ट भवन, धनबाद में 79 कोर्ट भवन, देवघर में 41 कोर्ट भवन और लोहरदगा में 12 कोर्ट भवन का निर्माण किया जाना है. इसमें कुल 97.70 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे. जिसमें केंद्र का हिस्सा 62 करोड़ और राज्य का हिस्सा 35.70 करोड़ रुपये का होगा. 

पहली सरकार जिसने दुमका में हाईकोर्ट बेंच बनाने का किया फैसला. 

न्यायिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा में हेमन्त सरकार की मंशा 16 फरवरी 2021 को ही साफ़ हो गया था, जब मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दुमका में झारखण्ड हाई कोर्ट की सर्किट बेंच (खंडपीठ) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की थी. हाई कोर्ट का बेंच बनने से संथाल परगना के आदिवासियों को न्याय के लिए लंबी यात्रा कर राजधानी सफ़र नहीं करनी पड़ेगी. इससे संथाल परगना कश्तकारी अधिनियम (एसपीटी कानून) के उल्लंघन के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकेगा. बता दें कि करीब चार पहले झारखण्ड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल ने भी कहा था कि दुमका में हाईकोर्ट की बेंच जरूरी है. लंबे समय से मांग भी की जा रही है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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