JSSC परीक्षा में हिन्दी में पास होना अनिवार्य

JSSC परीक्षा : (ख) पत्र-1 – भाषा ज्ञान में प्राप्त अंक मात्र अर्हक (Qualifying) होगा, जिसमें उत्तीर्ण होने के लिए हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा ज्ञान में प्राप्त अंकों को जोड़कर 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करना निर्धारित रहेगा. इस पत्र में प्राप्त अंक मेधा सूची निर्धारण के लिए नहीं जोड़ा जाएगा.

(ग) पत्र-2- चिन्हित क्षेत्रीय/जनजातीय भाषा में 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा.(घ) पत्र-3- सामान्य ज्ञान में 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

(ङ) पत्र-2- चिन्हित क्षेत्रीय/जनजातीय भाषा एवं पत्र-3- सामान्य ज्ञान में प्राप्त अंकों को जोड़कर समेकित अंकों के आधार पर उपरोक्त नियम-7(iv) (क) के आलोक में मेधा सूची का निर्धारण किया जाएगा.”

हिन्दी भाषा में पास हुए बिना अभियार्थियों के लिए नहीं खुल सकते क्षेत्रीय भाषा के द्वार

रांची : किसी भी राज्य-समाज-देश की मूल भाषा उसके विकास का द्योतक होता है. झारखण्ड में जब भी हेमन्त सरकार द्वारा क्षेत्रीय भाषा के मद्देनजर कदम उठाये जाते हैं तो राज्य में भाजपा-आजसू की राजनीति द्वारा नया विवाद खड़ा किया जाता है. ज्ञात हो, झारखण्ड सरकार की नीतियों में JSSC परीक्षा में हिंदी भाषा की अनदेखी नहीं हुई है. दस्तावेज़ में JSSC की परीक्षा में हिंदी में पास होने की अनिवार्यता साफ़ तौर पर अंकित है. मसलन, हिन्दी भाषा में पास हुए बिना अभियार्थियों के लिए क्षेत्रीय भाषा के द्वार नहीं खुल सकते. 

ऐसे में विपक्ष की भाषा पर भ्रम फैलाने का राजनीति मंशा साफ़ तौर पर बाहरियों की लूट संरक्षण ही हो सकता है. और यदि ऐसा नहीं है तो भाजपा को राज्य की जनता को बताना चाहिए कि आखिर वह किस उदेश्य से भ्रम के आसरे राज्य को विवादों के आग में झोंकना चाहती है. आखिर क्यों वह ऐसे मूल जन हित कार्य में बाधा उतपन्न कर रही है.

हेमन्त सरकार का यह कदम झारखंडी अस्मिता संरक्षण के मद्देनजर मूल जन अधिकारों की वकालत है. और झारखण्ड हित में बिना ऐसे ठोस कदम उठाये झारखंडी अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना संभव नहीं. सरकार जानती है, झारखण्ड संपन्न राज्य है और सभी वर्ग फल-फूल सकते है. ऐसे में यही वह रास्ता हो सकता है जिस पर चल कर झारखंडी जन मानस को अधिकार संपन्न किया जा सकता है. झारखण्ड को विकसित किया जा सकता है. लेकिन ऐसा होने पर भाजपा-आजसू की राजनीति में जन-मुदों की घोर अभाव हो जाएगा. भाजपा-आजसू को अपने अस्तित्व के मद्देनजर अन्धकारमई भविष्य का डर विवाद का असल हकीकत है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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