गणतन्त्र दिवस : हेमन्त सरकार में गरीब को पेट्रोल में Rs 25 सब्सिडी -संविधान के लकीरों को बचाने का प्रयास 

हेमन्त सरकार में गणतन्त्र दिवस के दिन झारखण्ड के गरीब जनता को जीवन-यापन हेतु पेट्रोल में 25 रुपए सब्सिडी देने की कवायद हो. तो इस मानवीय प्रयास को संविधान से खिलवाड़ के दौर में संविधान की मूल लकीरों को बचाने का प्रयास माना जाना चाहिए…

भारत में गणतन्त्र दिवस एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है. सन् 1950, इस दिन भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था. देश को एक स्वतन्त्र गणराज्य कानून के साथ संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था. 

भारत देश की आज़ादी बहुसंख्य देश भक्तों के बलिलान का परिणाम है. गणतंत्र दिवस के दिन हम अपने महापुरुषों के बलिदान को याद करते हैं और प्रेरणा लेते है कि अपने देश की आन-मान-शान और आपसी सोहार्द के लिए अपने प्राण त्याग कर सकें. और दोबारा कभी अपने देश को गुलामी की ज़नज़ीरो में बंधने नहीं देंगे. साथ ही यह भी प्राण लेते हैं कि हम महापुरुषों के सोच पर आधारित देश का निर्माण करें.

भारतीय संविधान की मूल भावना 

भारतीय संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है. केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है. देश का वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मन्त्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमन्त्री हैं. जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं. मन्त्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है.

प्रत्‍येक राज्‍य में विधानसभा है और राज्‍यपाल राज्‍य का प्रमुख है. मन्त्रिपरिषद का प्रमुख मुख्‍यमन्त्री है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है. राज्‍य की मन्त्रिपरिषद राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है. भारतीय संविधान 22 भागों में विभजित है तथा इसमे 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियाँ हैं. भीमराव आम्बेडकर भारतीय संविधान के प्रधान निर्माता हैं. और संविधान के मूल भावना के अनुसार भारत सम्प्रुभतासम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है. 

जो जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है. जहाँ सरकार केवल कुछ लोगों के हाथों में धन जमा होने से रोकेगी तथा सभी नागरिकों को एक अच्छा जीवन स्तर प्रदान करने की कोशिश करेगी.

एनडीए गठबंधन की मोदी सरकार की नीतियों पर देश की संघीय व्यवस्था से खिलवाड़ का आरोप 

ऐसे में बहुमत से सत्ता में आई एनडीए गठबंधन की मोदी सरकार की नीतियों पर देश की संघीय व्यवस्था से खिलवाड़ करने, तोड़ने के आरोप लगे. गैर भाजपा शासित राज्यों का विरोध तथ्य को सत्यापित भी करे. और संघ के मनुवादी एजेंडे को साफ़ तौर पर केन्द्रीय सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए आगे बढाए. जिसके अक्स में बेरोजगारी-महंगाई से देश की जनता त्राहिमाम हो. और ब्लैक मेल की स्थिति में देश भर में भयानक ख़ामोशी का दौर हो. तो भारतीय संविधान के मूल भावना से खिलवाड़ होने की पराकाष्ठा समझा जा सकता है.

और तमाम परस्थितियों के बीच भी हेमन्त सोरेन का झारखण्ड के बतौर मुख्यमंत्री देश भर में जिम्मेदार दस्तक हो. जिसके अक्स में संघीय ढांचे से खिलवाड़ का मुद्दा हो या जनहित से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, भाषा, जीएसटी, खनन, आदिवासी-दलित-पिछड़ों के अधिकार, गरीबी, महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर एक मजबूत अभिव्यक्ति चुप्पी के दौर में भी गूंजे. और वह मुख्यमंत्री झारखंडी जनता को महंगाई से राहत देने के अक्स में पेट्रोल योजना चलाये. जिसके अक्स में गरीब जनता को जीवन-यापन हेतु पेट्रोल में 25 रुपए सब्सिडी देने की कवायद वह गणतन्त्र दिवस के ही दिन करे. तो इस मानवीय प्रयास को संविधान से खिलवाड़ के दौर में संविधान को बचाने का प्रयास भी माना जा सकता है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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