कोरोना : हेमन्त सरकार पर दीपक प्रकाश के लगाए चारों आरोप मिथ्या -भ्रमित करने का प्रयास 

कोरोना त्रास्दी से उबरने हेतु केन्द्रीय मदद में झारखण्ड के साथ हुआ पक्षपात. जबकि बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश को 5 जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की सहायता दी गयी. मुद्दे में झारखण्ड भाजपा नेताओं की चुप्पी चारों आरोप को साबित करता है मिथ्या

रांची : करोना संक्रमण में मदद पहुंचाने की जगह झारखण्ड बीजेपी राजनीति करने हेतु फिर एक बार कमर कसते देखे जा सकते हैं. प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश द्वारा हेमन्त सरकार पर आरोप लगाया गया है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर से झारखण्ड सरकार सही तरीके से नहीं लड़ रही. ज्ञात हो, रविवार को बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर उनके द्वारा कुल चार आरोप सरकार पर लगाये गए. जिसमे जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन नहीं लगाना, वैक्सीन को बर्बाद करना, ऑक्सीजन की कमी पूरा न करना जैसे आरोप शामिल हैं.

लेकिन ज़मीनी हकीकत को देखते हुए कहा जा सकता है कि दीपक प्रकाश द्वारा लगाये गए तमाम आरोप भाजपा-संघ के भ्रमवाद एजेंडे के मद्देनजर मिथ्या तथ्यों पर आधारित है. प्रदेश अध्यक्ष आरोप तो लगाते हैं लेकिन नहीं बताते कि उन्होंने अथवा उनके नेताओं ने झारखण्ड के साथ मदद में हुए केन्द्रीय पक्षपात के विरुद्ध क्या कदम उठाया है. इमानदारी से यह भी नहीं बताते कि बिना केन्द्रीय सहयोग व पूर्व भाजपा के डबल इंजन सत्ता द्वारा छोड़े गए खाली खजाने के बावजूद हेमन्त सरकार ने कैसे महामारी में संतुलन बनाया. कैसे हेमन्त सरकार ने महामारी से उत्पन्न सभी परिस्थितियों से मजबूती से लड़ी और स्थितियों पर नियंत्रण स्थापित किया. 

मध्यप्रदेश को केंद्र ने दी जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन और झारखण्ड के साथ पक्षपात

दीपक प्रकाश ने कहा कि हेमन्त सरकार कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ओमिक्रोम के आने से पहले राज्य में जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की व्यवस्था नहीं की. लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भ्रम फैलाने और राजनीति करने के जल्द बाजी में बताना भूल गए जिस जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की बात वह कर रहे हैं, उस मशीन की मांग झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया से पूर्व में ही किया था. पर केंद्र अगर झारखण्ड को मशीन देती तो फिर दीपक प्रकाश जैसे नेता राजनीति कैसे करते!

क्या…? दीपक प्रकाश व झारखण्ड भाजपा नेताओं के नेटवर्क पार्टी में इतने कमजोर हो चले हैं कि केंद्र ने झारखण्ड से पक्षपात करते हुए मशीन भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश को दी और इन्हें पता नहीं चला. यह फिर झारखण्ड के भाजपा नेताओं की साजिश के अक्स में लोकतंत्र में निहित जनहित रेखाओं को मिटाने का कुप्रयास हुआ है. 

क्या…? मोदी सरकार में केवल भाजपा शासित राज्य में ही संक्रमण है? फिर क्यों मध्यप्रदेश को 5 जीनोम सिक्वेंसिंग मशीनें उपलब्ध करायी गयी है. दीपक प्रकाश प्रकाश जैसे भाजपा नेता जनहित में यह बताने की हिम्मत क्यों नहीं दिखा पाते कि उनके द्वारा ऐसे केन्द्रीय पक्षपात रवैये पर क्या कदम उठाया गया है. केंद्र से एक अदद सवाल ही पूछने का हिम्मत जुटा लेते फिर हेमन्त सरकार पर आरोप लगाते तो लहता. 

ऑक्सीजन की सच्चाई, दूसरी लहर में हेमन्त सरकार ने कई राज्यों को पहुंचायी मदद

दीपक प्रकाश ने कहा कि हेमन्त सरकार राज्य में ऑक्सीजन की कमी को पूरा नहीं कर पायी. यह तो ठीक वैसा ही है जैसे जब कोई निट्ठला सुबह सो कर उठता है तो सोचता है, आज तो करने को कुछ नहीं है, चलो अफ़वाह का बाजार गर्म किया जाए. और दो-चार मशाला चौक-चोराहों पर फैला देता है. दीपक प्रकाश जी के आरोप की स्थिति ठीक वैसी सच्चाई रखती प्रतीत होती है. मसलन, मुद्दों के अभाव में दीपक प्रकाश किसी प्रकार झारखण्ड की राजनीति में भाजपा को जिन्दा रखने की कवायद करते दिखते हैं.

ज्ञात हो, हकीकत राज्य ही नहीं देश भी जानता है कि कोरोना की दूसरी लहर में देशभर में उत्पन्न ऑक्सीजन की भारी किल्लत को हेमन्त सरकार ने अपने संसाधनों से झारखण्ड में उत्पादन कर दूर किया. केन्द्रीय नेताओं ने स्वयं सत्य को उजागर भी किया था. जबकि संसद में केंद्र द्वारा आँखों का पानी गिरा कर बताया गया था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत हुई है. ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आरोप में कितनी हकीक़त हो सकती है समझा जा सकता है. मसलन, मुद्दों के अभाव में यह झारखण्ड भाजपा की बौखलाहट की अभिव्यक्ति भर ही हो सकती है. 

केंद्र ने स्वीकार किया है कि हम जबरन वैक्सीन नहीं दे सकते

दीपक प्रकाश का आरोप है कि कोरोना से लड़ाई में राज्य सरकार ने वैक्सीनेशन को प्राथमिकता में नहीं रखा है. लेकिन दीपक प्रकाश का नेटवर्क ही कमजोर हो चला है तो क्या कहा जाए. ज्ञात हो, केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलाफनामा दाखिल कर खुद स्वीकारा है कि कोरोना वैक्सीनेशन गाइडलाइन में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसे जबरन टीका नहीं लगाया जा सकता है. ऐसे में कोई राज्य सरकार जबरन लोगों को वैक्सीन कैसे दे सकती है. जबकि हकीकत यह है कि एक जिम्मेदार सरकार रूप में हेमन्त सरकार ने हमेशा वैक्सीन मामले में लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है. 

वैक्सीन बर्बादी के केन्द्रीय आंकड़ों का मध्य प्रदेश सरकार ने भी किया था खंडन, राजनीति करने की जल्दी में दीपक प्रकाश भूल गये

दीपक प्रकाश का आरोप है कि झारखण्ड में 37.3 फीसदी कोरोना वैक्सीन की बर्बादी हुई है. उनका यह आरोप केंद्र सरकार द्वारा बीते मई-2021 को जारी आंकड़ो के तहत दिया है. लेकिन दीपक प्रकाश यह बताना भूल गये कि बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश ने भी केंद्र के इस आंकड़े पर सवाल खड़ा किया था. मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा था कि केंद्र के आंकड़ों की तुलना में राज्य में वैक्सीन की बर्बादी कम हुई है. बता दें कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा भी केंद्र के आंकड़ों सवाल उठाते हुए कहा गया था, “झारखंड को अब तक जितनी भी वैक्सीन की डोज दी गयी हैं उसमें से केवल 4.65 फीसदी ही बर्बाद हुए हैं.

बहरहाल, यह देश में पहला मौका है जब भाजपा चुनाव से भागती नजर आ रही है. और जन विरोद्ध से बचने के लिए एक तरफ वह केन्द्रीय ताक़त का उपयोग कर भाजपा शासित राज्यों को मदद करने का प्रयास करती दिखती है. जिससे उसका ग्राफ कुछ सुधर सके. वहीं दूसरी तरफ गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ पक्षपात कर अपने इकाइयों को राजनीति करने का भरपूर मौका दे रही है. जिससे गैर भाजपा शासित राज्यों की छवि धूमिल हो. लेकिन, वह इस सत्य से भाग रहे हैं कि काठ का हांडी बार-बार नहीं चढ़ता है.

संपादकीय: यह विश्लेषण स्वतंत्र तथ्यों पर आधारित है।

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